पाकिस्तान में खसरे का कहर: 2026 के पहले चार महीनों में 71 बच्चों की मौत, सिंध सबसे बुरी तरह प्रभावित
सारांश
Key Takeaways
- 71 बच्चों की मौत: पाकिस्तान में जनवरी-अप्रैल 2026 के दौरान खसरे से 71 बच्चों की जान गई।
- सिंध सबसे प्रभावित: सिंध में सर्वाधिक 40 बच्चों की मौत हुई, इसके बाद पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा में 12-12 मौतें हुईं।
- 4,541 मामले दर्ज: चार महीनों में पूरे पाकिस्तान में खसरे के 4,541 मामले सामने आए, जिनमें खैबर पख्तूनख्वा में 1,712 सर्वाधिक हैं।
- पोलियो संकट जारी: 2024 में 74, 2025 में 31 और 2026 में सुजावल में एक पोलियो मामला दर्ज; सिंध में 80 फीसदी पर्यावरणीय नमूने पॉजिटिव।
- टीकाकरण टीमों पर हमला: 13 अप्रैल 2026 को हंगू में पोलियो टीम की सुरक्षा में तैनात एक पुलिसकर्मी की मौत, चार घायल।
- वैश्विक खतरा: पाकिस्तान और अफगानिस्तान दुनिया के एकमात्र दो देश हैं जहाँ वाइल्ड पोलियोवायरस अभी भी सक्रिय है।
पाकिस्तान में खसरे (Measles) ने साल 2026 के शुरुआती चार महीनों में ही 71 मासूम बच्चों की जान ले ली है। सिंध प्रांत सबसे बुरी तरह प्रभावित रहा, जहाँ 40 बच्चों की मौत हुई। पाकिस्तान के जाने-माने अखबार डॉन ने रविवार को इस दर्दनाक आँकड़े की पुष्टि की।
प्रांतवार मौतों का आँकड़ा
डॉन अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, 71 मौतों में से सिंध में 40, पंजाब में 12, खैबर पख्तूनख्वा में 12 और बलूचिस्तान में 4 बच्चों की मौत हुई है। ये आँकड़े दर्शाते हैं कि पाकिस्तान के लगभग हर प्रांत में खसरे ने अपने पाँव पसारे हुए हैं।
जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच पाकिस्तान में खसरे के कुल 4,541 मामले सामने आए हैं। इनमें खैबर पख्तूनख्वा में 1,712, पंजाब में 1,198, सिंध में 1,183, इस्लामाबाद में 55, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में 151, गिलगित-बाल्टिस्तान में 45 और बलूचिस्तान में 17 मामले शामिल हैं।
पोलियो का खतरा भी बरकरार
खसरे के अलावा पाकिस्तान में पोलियो भी एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है। 2024 में पोलियो के 74 मामले और 2025 में 31 मामले दर्ज किए गए। 2026 में ही सिंध के सुजावल में पोलियो का एक मामला सामने आ चुका है।
2025 में सिंध में पोलियो के नौ मामले दर्ज हुए और लगभग 80 फीसदी पर्यावरणीय नमूने वायरस के लिए पॉजिटिव पाए गए। हालाँकि सिंध के मुख्यमंत्री ने हाल ही में दावा किया कि पोलियो से लड़ाई में सफलता मिल रही है और एनवायरनमेंटल पॉजिटिविटी रेट घटकर 24 फीसदी रह गया है।
वैक्सीन हिचकिचाहट सबसे बड़ी बाधा
पाकिस्तान पीडियाट्रिक एसोसिएशन के प्रतिनिधि खालिद शफी ने कहा कि सरकार अपनी कोशिशें जारी रखे हुए है, लेकिन नियमित टीकाकरण के रास्ते में कई बाधाएँ हैं और सबसे बड़ी चुनौती वैक्सीन को लेकर लोगों की हिचकिचाहट है। उन्होंने सरकार से बच्चों के टीकाकरण के लिए जागरूकता अभियान चलाने की अपील की।
विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक भ्रांतियाँ, शिक्षा की कमी और कट्टरपंथी तत्वों का प्रचार वैक्सीन विरोध की प्रमुख वजहें हैं। यह स्थिति विशेष रूप से खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में अधिक गंभीर है।
पोलियो टीमों पर हमले जानलेवा चुनौती
स्थानीय मीडिया लगातार पोलियो टीमों की सुरक्षा में तैनात कर्मियों पर हमलों की खबरें प्रकाशित करता रहा है। 13 अप्रैल 2026 को खैबर पख्तूनख्वा के हंगू जिले में थल तहसील में अज्ञात हमलावरों ने पोलियो टीम की सुरक्षा में तैनात पुलिस पार्टी पर फायरिंग की। इस हमले में एक पुलिस कांस्टेबल की मौत हो गई और चार अन्य घायल हो गए।
यह घटना 13 से 19 अप्रैल के बीच चलाए जाने वाले राष्ट्रव्यापी वैक्सीनेशन अभियान के पहले ही दिन हुई। इससे पहले फरवरी 2026 में बलूचिस्तान के चमन जिले में भी पुलिस वैक्सीनेशन टीम पर हमले में एक पुलिसकर्मी की जान गई थी।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य और गहरी चिंता
गौरतलब है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान दुनिया के केवल दो ऐसे देश हैं जहाँ वाइल्ड पोलियोवायरस अभी भी सक्रिय है। यह स्थिति न केवल इन देशों के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरा है। आने वाले महीनों में पाकिस्तान सरकार की टीकाकरण नीति और उसकी जमीनी प्रभावशीलता ही यह तय करेगी कि खसरे और पोलियो की यह लड़ाई किस दिशा में जाती है।