पाकिस्तान में बढ़ता बिजली संकट: घरेलू नीतियों और मिडिल ईस्ट संकट का असर
सारांश
Key Takeaways
- ऊर्जा संकट पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है।
- एलएनजी की आपूर्ति में कमी से बिजली उत्पादन में भारी गिरावट हो सकती है।
- सरकार ने फर्नेस ऑयल का सहारा लिया है, जिससे लागत बढ़ रही है।
- घरेलू कुप्रबंधन संकट को और बढ़ा रहा है।
- लोगों पर लोड शेडिंग का प्रभाव बढ़ सकता है।
नई दिल्ली, 3 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान में ऊर्जा संकट तीव्र हो रहा है। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, अगले महीने से एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) की आपूर्ति लगभग समाप्त होने की संभावना है, जिससे कुल बिजली उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा प्रभावित होने की आशंका है।
कराची स्थित बिजनेस रिकॉर्डर में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, एलएनजी की कमी के कारण कुल बिजली उत्पादन का 20 प्रतिशत से अधिक प्रभावित हो सकता है, जबकि कोयले की आपूर्ति में दबाव के कारण लगभग 30 प्रतिशत बिजली उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है।
सरकार ने स्थिति से निपटने के लिए फर्नेस ऑयल का सहारा लेने का निर्णय लिया है, लेकिन इससे बिजली उत्पादन की लागत में काफी वृद्धि हो रही है। गैस और कोयले की तुलना में फर्नेस ऑयल से बिजली उत्पादन महंगा पड़ता है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकार रोजाना 2 से 3 घंटे की लोड शेडिंग, बिजली दरों में वृद्धि, और ऊर्जा बचत जैसे कदम उठाने की योजना बना रही है। हालांकि, इन उपायों की सफलता उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि बाजारों को जल्दी बंद करने और अधिक बिजली खपत वाली रोशनी पर प्रतिबंध जैसे सरल उपाय पहले भी प्रभावी साबित हुए हैं, लेकिन इन्हें मौजूदा रणनीति में प्राथमिकता नहीं दी गई है। इससे आम जनता और उद्योगों पर भारी बोझ पड़ सकता है।
रिपोर्ट में घरेलू कुप्रबंधन को भी संकट का एक बड़ा कारण बताया गया है। पाकिस्तान रेलवे और कोयला आधारित बिजली संयंत्रों के बीच विवाद के कारण 1500 से 1800 मेगावाट बिजली उत्पादन खतरे में है। कोयले के परिवहन में बाधाएं, वैगन लोडिंग में देरी और समन्वय की कमी ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
इससे न केवल अतिरिक्त लोड शेडिंग की आशंका बढ़ गई है, बल्कि महंगे ईंधन पर निर्भरता भी बढ़ती जा रही है। वहीं, पाकिस्तान रेलवे को भी माल ढुलाई से होने वाली आय में कमी का सामना करना पड़ सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा संकट भले ही बाहरी कारणों से उत्पन्न हुआ हो, लेकिन इसकी गंभीरता काफी हद तक घरेलू नीतियों और निर्णयों पर निर्भर करेगी। यदि मांग प्रबंधन और आपूर्ति व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो हर संकट की लागत और बढ़ती जाएगी।