क्या पाकिस्तान की ‘3.7% विकास दर’ सिर्फ कागज पर है? रिपोर्ट में खुलासा
सारांश
Key Takeaways
- पाकिस्तान की विकास दर केवल लेखांकन का भ्रम हो सकता है।
- उद्योग और कृषि क्षेत्र में वास्तविक सुधार की कमी है।
- आयात में वृद्धि और निर्यात में कमी से अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।
- खाद्य निर्यात में गिरावट चिंता का विषय है।
- पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में स्थिरता के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
नई दिल्ली, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान ने वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में 3.7 प्रतिशत आर्थिक विकास दर का जो दावा किया है, वह वास्तविक उत्पादन या निर्यात में बढ़ोतरी को दर्शाता नहीं है। यह केवल एक लेखांकन का भ्रम हो सकता है। एक रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है।
एक्सप्रेस ट्रिब्यून द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, थिंक टैंक इकोनॉमिक पॉलिसी एंड बिजनेस डेवलपमेंट (ईपीबीडी) का कहना है कि नेशनल अकाउंट्स कमेटी (नैक) द्वारा स्वीकृत इस विकास दर का आधार “पद्धतिगत चालाकियों, डिफ्लेटर में हेरफेर और आयात-आधारित असेंबली गतिविधियों” है, न कि किसी वास्तविक सुधार का।
ईपीबीडी ने इन आंकड़ों को आर्थिक सुधार का भ्रम बताया है, जबकि जमीनी स्तर पर कारोबारी गतिविधियां, विनिर्माण उत्पादन और निर्यात लगातार दबाव में हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, औद्योगिक क्षेत्र में 9.4 प्रतिशत की वृद्धि मुख्य रूप से लेखांकन समायोजन के कारण है। बिजली, गैस और जल आपूर्ति क्षेत्र में 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, लेकिन यह उत्पादन में बढ़ोतरी से नहीं, बल्कि सब्सिडी के 20 अरब पाकिस्तानी रुपये से बढ़कर 118 अरब पाकिस्तानी रुपये हो जाने के कारण है।
निर्माण क्षेत्र में 21 प्रतिशत वृद्धि का दावा भी संदिग्ध है, क्योंकि इसी अवधि में सीमेंट उत्पादन केवल 15 प्रतिशत बढ़ा। इसके अलावा, परिवहन से जुड़े आयात में भारी उछाल देखा गया, खासकर बसों और ट्रकों के आयात में।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पहली तिमाही के दौरान खाद्य निर्यात में 25.8 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि खाद्य आयात 18.8 प्रतिशत बढ़ गया। इसके बावजूद कृषि और खाद्य विनिर्माण क्षेत्र में वृद्धि दिखाना सवाल खड़े करता है। ईपीबीडी के अनुसार, बाढ़ का असर, फसल उत्पादन में ठहराव और इस तिमाही में गेहूं की फसल न होने के बावजूद कृषि क्षेत्र में 2.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करना वास्तविकता से मेल नहीं खाता।
थिंक टैंक ने घरेलू विकास के दावों और व्यापार संकेतकों के बीच बड़े अंतर की ओर भी इशारा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष की पहली छमाही में आयात 11 प्रतिशत बढ़े, जबकि निर्यात लगभग 9 प्रतिशत घट गए, जिससे यह आशंका गहराती है कि अर्थव्यवस्था में टिकाऊ और निजी क्षेत्र के नेतृत्व वाला विकास नहीं हो रहा है।
इसके अलावा, कपास उत्पादन में गिरावट आई है, जिनिंग में 12 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है और कपास आधारित निर्यात लगभग 10 प्रतिशत घट गया।