पेइचिंग में दिव्यांगजनों के लिए बाधा-मुक्त बुनियादी ढाँचे में सुधार, दृष्टिबाधितों को मिली राहत
सारांश
मुख्य बातें
चीन की राजधानी पेइचिंग में हाल के वर्षों में दिव्यांगजनों के लिए बाधा-मुक्त सुविधाओं के विस्तार और उन्नयन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पेइचिंग सरकार ने स्थानीय निवासियों की शिकायतों और सुझावों को आधार बनाकर सड़क-स्तरीय अवसंरचना में व्यापक बदलाव किए हैं, जिनमें दृष्टिबाधित नागरिकों की आवाजाही को सुगम बनाना प्रमुख उद्देश्य रहा है।
एक नागरिक की आवाज़, बदलाव की शुरुआत
55 वर्षीय वांग चीकांग रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा नामक नेत्र रोग से पीड़ित हैं। अपने जीवन के शुरुआती पाँच दशकों तक उनकी दृष्टि सामान्य रही, लेकिन पिछले पाँच वर्षों में उनकी आँखों की रोशनी पूरी तरह जाती रही। अब वे दुनिया को ध्वनियों के माध्यम से समझते हैं।
एक गाइड कुत्ते के मिलने के बाद वांग चीकांग के लिए घर से बाहर निकलने की राह खुली। हालाँकि, सड़कों पर निकलते ही उन्हें कई व्यावहारिक अड़चनों का सामना करना पड़ा — जो बाधा-मुक्त बुनियादी ढाँचे की कमियों को उजागर करती थीं।
सरकारी हॉटलाइन से मिला समाधान
वांग चीकांग ने 12345 सरकारी सेवा हॉटलाइन पर संपर्क कर अपनी कठिनाइयाँ दर्ज कराईं। इस मामले की जाँच की जिम्मेदारी सरकारी अधिकारी मंग लिन को सौंपी गई। मंग लिन ने वांग चीकांग के साथ स्वयं उन सड़कों पर जाकर समस्याओं का प्रत्यक्ष मुआयना किया और दृष्टिबाधित लोगों के लिए निर्धारित मार्गों में सुधार के प्रस्ताव दिए।
यह ऐसे समय में आया है जब चीन समेत कई देश संयुक्त राष्ट्र के दिव्यांगता अधिकार सम्मेलन के तहत समावेशी बुनियादी ढाँचे के निर्माण पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। गौरतलब है कि सरकारी शिकायत निवारण प्रणाली का सीधे बुनियादी ढाँचे-सुधार से जुड़ना एक उल्लेखनीय नागरिक-प्रशासन साझेदारी का उदाहरण है।
बाधा-मुक्त सुविधाओं में व्यापक बदलाव
सरकार की सक्रिय पहल के परिणामस्वरूप पेइचिंग की सड़कों पर दृष्टिबाधित लोगों के लिए बने टेक्टाइल पथों और अन्य संकेतक व्यवस्थाओं में सुधार किया गया है। इन बदलावों से न केवल दृष्टिबाधित, बल्कि अन्य दिव्यांग नागरिकों के लिए भी सार्वजनिक स्थलों पर आवाजाही पहले की तुलना में अधिक सहज हो गई है।
रिपोर्टों के अनुसार, इस प्रक्रिया में प्रशासन ने नागरिकों की प्रत्यक्ष भागीदारी को प्राथमिकता दी — जो ऊपर-से-नीचे की पारंपरिक नीति-निर्माण प्रक्रिया से एक अलग दृष्टिकोण दर्शाता है।
आम जनता पर असर
बाधा-मुक्त बुनियादी ढाँचे के सुधार का सबसे अधिक लाभ उन लाखों नागरिकों को मिलता है जो दृष्टिबाधिता, गतिशीलता सीमाओं या अन्य दिव्यांगताओं के साथ जीवन जी रहे हैं। पेइचिंग जैसे बड़े महानगर में ऐसी सुविधाओं का विस्तार सामाजिक समावेश की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
आगे चलकर यदि इस नागरिक-शिकायत मॉडल को अन्य शहरों में भी अपनाया जाता है, तो यह दिव्यांगजन सशक्तिकरण की नीतियों को ज़मीनी स्तर पर लागू करने का एक प्रभावी माध्यम बन सकता है।