30 जून 2026
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केको फुजीमोरी ने चौथे प्रयास में जीता पेरू राष्ट्रपति चुनाव, 50,000 से कम वोटों के अंतर से मिली जीत

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केको फुजीमोरी ने चौथे प्रयास में जीता पेरू राष्ट्रपति चुनाव, 50,000 से कम वोटों के अंतर से मिली जीत

सारांश

तीन बार हारने के बाद केको फुजीमोरी ने चौथे प्रयास में पेरू की सत्ता हासिल की — 50,000 से कम वोटों के रोमांचक अंतर से। एक विवादास्पद पिता की विरासत, बढ़ता अपराध और राजनीतिक अस्थिरता — इन्हीं के बीच लैटिन अमेरिका में दक्षिणपंथ की एक और वापसी हुई।

मुख्य बातें

केको फुजीमोरी ने 7 जून 2025 के रनऑफ में रोबर्टो सांचेज को पराजित कर पेरू का राष्ट्रपति चुनाव जीता।
जीत का अंतर 1.8 करोड़ से अधिक मतों में से केवल 50,000 से कम वोट — फुजीमोरी को 50.135% और सांचेज को 49.865% मत मिले।
पेरू की राष्ट्रीय निर्वाचन जूरी 3 जुलाई को आधिकारिक विजेता की घोषणा करेगी।
फुजीमोरी 28 जुलाई 2025 को पाँच वर्ष के लिए राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगी।
पेरू में पिछले दस वर्षों में आठ राष्ट्रपति बदल चुके हैं; यह चुनाव अपराध और राजनीतिक अस्थिरता के मुद्दों पर लड़ा गया।
सांचेज ने विदेशी मतों के प्रबंधन में प्रशासनिक अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए परिणाम को मान्यता देने से इनकार किया।

पेरू की दक्षिणपंथी नेता केको फुजीमोरी ने 7 जून 2025 को हुए राष्ट्रपति पद के रनऑफ चुनाव में वामपंथी प्रतिद्वंद्वी रोबर्टो सांचेज को पराजित कर लीमा की सत्ता की कुर्सी पर अपना दावा पक्का किया। 51 वर्षीय फुजीमोरी की यह जीत उनके चौथे राष्ट्रपति चुनाव प्रयास में आई — तीन पूर्व असफलताओं के बाद यह उनके राजनीतिक जीवन का सबसे निर्णायक मोड़ है।

चुनाव परिणाम और मतों का अंतर

पेरू की एंडियाना न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, 1.8 करोड़ से अधिक पड़े कुल मतों में से फुजीमोरी की पार्टी फुएरजा पॉपुलर को 50.135 प्रतिशत वोट मिले, जबकि सांचेज की टुगैदर फॉर पेरू पार्टी को 49.865 प्रतिशत। यह अंतर 50,000 से भी कम मतों का रहा — पेरू के चुनावी इतिहास में अत्यंत कम अंतर की जीतों में से एक।

पेरू की राष्ट्रीय निर्वाचन जूरी ने विवादित मतपत्रों की समीक्षा में कई सप्ताह लगाए और 3 जुलाई को आधिकारिक रूप से विजेता की घोषणा करने का कार्यक्रम निर्धारित किया है।

फुजीमोरी का संकल्प और एक्स पर संदेश

विजेता घोषित होने के बाद फुजीमोरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'हर गुजरते दिन के साथ हम सभी पेरूवासियों के लिए व्यवस्था और उम्मीद के रास्ते पर आगे बढ़ने के और करीब पहुँच रहे हैं।' उन्होंने देश में 'व्यवस्था और उम्मीद' बहाल करने का संकल्प जताया है। 28 जुलाई को वे पाँच वर्ष के कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगी।

चुनाव के मुद्दे और पेरू की राजनीतिक पृष्ठभूमि

यह चुनाव बढ़ते अपराध और लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक अस्थिरता के मुद्दों पर लड़ा गया। एंडीज क्षेत्र के इस देश में पिछले दस वर्षों में आठ राष्ट्रपति बदल चुके हैं। जबरन वसूली करने वाले गिरोहों और सुपारी देकर कराई जाने वाली हत्याओं में वृद्धि के बीच फुजीमोरी ने अपने पिता की तरह सख्त शासन का वादा किया। यह जीत लैटिन अमेरिका में फिर से उभरते दक्षिणपंथ की एक और सफलता मानी जा रही है।

गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों में युवा पीढ़ी व्यवस्था के खिलाफ सड़क पर उतर कर अपनी आवाज बुलंद करती दिखी, जो इस चुनाव की पृष्ठभूमि में एक महत्वपूर्ण सामाजिक संदर्भ रहा।

अल्बर्टो फुजीमोरी की विरासत और केको की राजनीतिक यात्रा

केको के पिता अल्बर्टो फुजीमोरी को माओवादी विद्रोहियों का दमन करने और अत्यधिक महंगाई पर नियंत्रण पाने के लिए सराहा गया था। किंतु बाद में वे भ्रष्टाचार और आतंकवाद से लड़ाई के नाम पर मानवता के विरुद्ध अपराधों के आरोपों में बदनाम हुए, देश छोड़कर भागे और अंततः जेल भेजे गए।

केको 19 वर्ष की आयु में प्रथम महिला (फर्स्ट लेडी) बनी थीं, जब उनकी माँ ने सार्वजनिक रूप से अल्बर्टो फुजीमोरी से अलग होने का फैसला किया था। बाद में उन्होंने अमेरिका में व्यवसाय प्रशासन की शिक्षा प्राप्त की। दशकों से 'फुजीमोरी' नाम उनके लिए एक ओर वफादार समर्थकों और मजबूत राजनीतिक नेटवर्क का स्रोत रहा, तो दूसरी ओर आलोचना का कारण भी। इस चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने अपनी छवि को नरम और सकारात्मक बनाने का प्रयास किया।

विपक्ष की प्रतिक्रिया और आगे की राह

रोबर्टो सांचेज ने परिणामों की घोषणा पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। मतगणना के शुरुआती दौर में सांचेज आगे चल रहे थे, लेकिन बाद में फुजीमोरी ने उन्हें पीछे छोड़ दिया। सांचेज ने पहले ही कह दिया था कि यदि उनकी प्रतिद्वंद्वी की सरकार बनती है तो वे उसे मान्यता नहीं देंगे — उनका आरोप था कि विदेशों में पड़े वोटों के प्रबंधन में प्रशासनिक अनियमितताएँ हुई हैं। पेरू के लाखों नागरिक आज भी अल्बर्टो फुजीमोरी के शासनकाल की कड़वी यादों के कारण 'फुजीमोरी' नाम वाले किसी भी उम्मीदवार को वोट देने से बचते रहे हैं — यही कारण था कि केको तीन बार राष्ट्रपति बनने से चूक गई थीं। 28 जुलाई 2025 को शपथ ग्रहण के साथ पेरू एक नए राजनीतिक अध्याय में प्रवेश करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि लैटिन अमेरिका में उभरती दक्षिणपंथी लहर का ताजा प्रमाण है — जहाँ अर्जेंटीना से लेकर अब पेरू तक मतदाता 'व्यवस्था और सख्ती' के वादे की ओर झुक रहे हैं। किंतु असली परीक्षा यह होगी कि क्या वे अपने पिता की विरासत के बोझ से अलग एक स्वतंत्र शासन-छवि बना पाती हैं, या 'फुजीमोरी' नाम एक बार फिर विवाद का केंद्र बनेगा। 50,000 से कम वोटों का यह नाजुक जनादेश उन्हें कोई बड़ा राजनीतिक लाइसेंस नहीं देता — और सांचेज का परिणाम न मानने का रुख आने वाले महीनों में संवैधानिक तनाव को जन्म दे सकता है।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केको फुजीमोरी कौन हैं और उन्होंने पेरू राष्ट्रपति चुनाव कैसे जीता?
केको फुजीमोरी पेरू के दिवंगत राष्ट्रपति अल्बर्टो फुजीमोरी की 51 वर्षीय बेटी और दक्षिणपंथी पार्टी फुएरजा पॉपुलर की नेता हैं। उन्होंने 7 जून 2025 के रनऑफ चुनाव में वामपंथी रोबर्टो सांचेज को 50,000 से कम वोटों के अंतर से हराकर अपने चौथे प्रयास में राष्ट्रपति पद जीता।
पेरू चुनाव में मतों का अंतर कितना रहा?
1.8 करोड़ से अधिक पड़े कुल मतों में फुजीमोरी को 50.135 प्रतिशत और सांचेज को 49.865 प्रतिशत वोट मिले — यानी अंतर 50,000 से भी कम मतों का रहा। यह पेरू के चुनावी इतिहास की सबसे कम अंतर की जीतों में से एक है।
केको फुजीमोरी कब राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगी?
केको फुजीमोरी 28 जुलाई 2025 को पाँच वर्ष के कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगी। इससे पहले पेरू की राष्ट्रीय निर्वाचन जूरी 3 जुलाई को आधिकारिक रूप से विजेता की घोषणा करेगी।
रोबर्टो सांचेज ने चुनाव परिणाम को मान्यता क्यों नहीं दी?
सांचेज ने आरोप लगाया कि विदेशों में पड़े वोटों के प्रबंधन में प्रशासनिक अनियमितताएँ हुई हैं। उन्होंने पहले ही घोषणा कर दी थी कि यदि फुजीमोरी की सरकार बनती है तो वे उसे मान्यता नहीं देंगे।
अल्बर्टो फुजीमोरी की विरासत केको के लिए किस तरह चुनौती रही?
अल्बर्टो फुजीमोरी को माओवादी विद्रोह दमन और महंगाई नियंत्रण के लिए सराहा गया, लेकिन मानवता के विरुद्ध अपराधों के आरोपों में वे बदनाम हुए और जेल भेजे गए। पेरू के लाखों नागरिक इन्हीं कड़वी यादों के कारण 'फुजीमोरी' नाम वाले उम्मीदवार को वोट देने से बचते रहे, जिससे केको तीन बार राष्ट्रपति बनने से चूकीं।
राष्ट्र प्रेस
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