15 अगस्त 2026
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मोहन भागवत का 80वें स्वतंत्रता दिवस पर आह्वान: भारत को सुखी, संपन्न और सुरक्षित बनाना हमारा कर्तव्य

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मोहन भागवत का 80वें स्वतंत्रता दिवस पर आह्वान: भारत को सुखी, संपन्न और सुरक्षित बनाना हमारा कर्तव्य

सारांश

80वें स्वतंत्रता दिवस पर नागपुर में RSS सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने तिरंगे के तीनों रंगों की गहरी व्याख्या की और 1857 से 90 वर्षों के बलिदान को याद करते हुए भारत को सुखी, संपन्न और सुरक्षित विश्वगुरु राष्ट्र बनाने का आह्वान किया।

मुख्य बातें

मोहन भागवत ने 15 अगस्त 2026 को नागपुर स्थित RSS मुख्यालय में 80वें स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण किया।
भागवत ने 1857 से 90 वर्षों के त्याग और बलिदान को याद करते हुए स्वतंत्रता को कायम रखने की जिम्मेदारी पर बल दिया।
वीर सावरकर की पंक्तियाँ उद्धृत कर उन्होंने स्वतंत्रता के व्यापक अर्थ — उत्तम, उदात्त और उन्नत जीवन — को रेखांकित किया।
तिरंगे के केसरिया (त्याग-कर्मशीलता), सफेद (निर्मलता-शांति) और हरे (समृद्धि) रंगों की विस्तृत व्याख्या की।
अशोक चक्र को विविधता में एकता और धर्म की मर्यादा का प्रतीक बताया।
भारत को विश्वगुरु बनाना और संपूर्ण मानवता में सार्थक योगदान देना आज का सबसे बड़ा राष्ट्रीय कर्तव्य बताया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने 15 अगस्त 2026 को नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ध्वजारोहण किया और देशवासियों को भारत को सुखी, संपन्न और सुरक्षित राष्ट्र बनाने की जिम्मेदारी याद दिलाई। इस विशेष कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वयंसेवक और सुरक्षा कर्मी उपस्थित रहे, तथा ध्वजारोहण के बाद भारत माता का पूजन भी किया गया।

त्याग और बलिदान की विरासत

अपने संबोधन में भागवत ने स्वतंत्रता संग्राम की विरासत को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, 1857 से गिनें तो लगातार 90 वर्षों तक पूर्वजों ने अनेक प्रकार के त्याग और बलिदान देकर यह स्वतंत्रता दिलाई। उनके शब्दों में, "उस त्याग और बलिदान का गौरव हमारे मन में है और इसका आनंद हमारे मन में है, लेकिन उसके साथ एक और भाव चाहिए — इतना परिश्रम करके, इतना त्याग बलिदान देकर यह जो स्वतंत्रता हमको मिली है, उस स्वतंत्रता को कायम रखना।"

संघ प्रमुख ने वीर सावरकर की पंक्तियाँ उद्धृत कीं — "जे जे उत्तम उदात्त उन्नत महन मधुर ते ते, स्वतंत्रते सत भगवती सर्वतव सहचारी होते।" उन्होंने इसका अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि स्वतंत्रता का परिणाम यह होना चाहिए कि जो उत्तम, उदात्त, उन्नत और मधुर है, वह सब कुछ देश में अवतरित हो।

तिरंगे के रंगों का संदेश

भागवत ने राष्ट्रीय ध्वज के तीनों रंगों की गहरी व्याख्या की। उनके अनुसार केसरिया रंग कर्मशीलता, ज्ञान और त्याग का प्रतीक है — "जिस प्रकार के परिश्रम से एक राष्ट्र को स्वतंत्रता मिलती है और स्वतंत्रता के बाद वह वैभव संपन्न और सुरक्षित बनता है, उस त्याग और बलिदान की आवश्यकता की याद दिलाने वाला यह केसरिया रंग है।"

सफेद रंग को उन्होंने निर्मलता और शांति का प्रतीक बताया। उनका कहना था कि जीवन में त्याग, बलिदान, कर्मशीलता और ज्ञान रहने से समाज में शांति आती है और चित्त निर्मल बनते हैं। हरे रंग को समृद्धि का प्रतीक बताते हुए उन्होंने कहा कि त्याग और निर्मलता का परिणाम ही समृद्धि है।

अशोक चक्र और एकता का संदेश

तिरंगे के मध्य स्थित अशोक चक्र पर विचार रखते हुए भागवत ने कहा कि विविधता ही एकता की अभिव्यक्ति है। उनके शब्दों में, "चक्र के आरे इतने सारे हैं, लेकिन वह एक ही केंद्र से बाहर निकल रहे हैं और उस चक्र को उसका भान है, उस समाज को उसका भान है। इसलिए अपने अलग-अलग जाने वाले तीक्ष्ण आरों को उसने एक धर्म की मर्यादा के अंदर रखा है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि समाज के सुचारु संचालन के लिए आवश्यक अनुशासन की मर्यादा में रहकर ही आगे बढ़ना होगा, इसीलिए राष्ट्रीय ध्वज पर धर्मचक्र को स्थान दिया गया है।

विश्वगुरु भारत का लक्ष्य

सरसंघचालक ने देश के समक्ष वर्तमान कर्तव्य को स्पष्ट करते हुए कहा, "राष्ट्र अपना स्वतंत्र तो हो गया, स्वतंत्र रहेगा यह बात पक्की है। परंतु उस राष्ट्र को सुखी, संपन्न, सुरक्षित बनाना है। विश्व में अपना नियत योगदान करने वाला राष्ट्र बनाना है।" उन्होंने आगे कहा कि मार्ग में अनेक बाधाएँ और विरोधी शक्तियाँ हैं, किंतु अपने मूल तत्व से विचलित हुए बिना भारत को विश्वगुरु बनाना और संपूर्ण मानवता के जीवन में सार्थक योगदान देने वाला देश बनाना आज की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

भागवत ने अपने संबोधन का समापन इस आह्वान के साथ किया कि ध्वजारोहण के समय तिरंगे के प्रतीकों के पीछे निहित विचारों का चिंतन करना चाहिए और उस चिंतन से प्राप्त सार को जीवन में उतारना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो RSS और सत्तारूढ़ दल के बीच वैचारिक तालमेल को दर्शाती है। आलोचकों का कहना है कि 'धर्म की मर्यादा' जैसे पदों की व्याख्या बहुलवादी लोकतंत्र में विवाद का विषय बन सकती है।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

80वें स्वतंत्रता दिवस पर मोहन भागवत ने क्या कहा?
डॉ. मोहन भागवत ने नागपुर में RSS मुख्यालय पर ध्वजारोहण के बाद कहा कि भारत को सुखी, संपन्न और सुरक्षित बनाना तथा उसे विश्वगुरु के रूप में स्थापित करना आज की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने 1857 से 90 वर्षों के स्वतंत्रता संग्राम के बलिदान को याद करते हुए उस विरासत को जीवित रखने का आह्वान किया।
भागवत ने तिरंगे के रंगों की क्या व्याख्या की?
भागवत के अनुसार केसरिया रंग त्याग, कर्मशीलता और ज्ञान का प्रतीक है; सफेद रंग निर्मलता और शांति का; और हरा रंग समृद्धि का। उन्होंने कहा कि त्याग और निर्मलता का स्वाभाविक परिणाम ही समृद्धि है।
भागवत ने अशोक चक्र के बारे में क्या बताया?
सरसंघचालक ने अशोक चक्र को विविधता में एकता का प्रतीक बताया। उनके अनुसार चक्र के सभी आरे एक ही केंद्र से निकलते हैं और धर्म की मर्यादा में बँधे हैं — यही भारतीय समाज की शक्ति है।
भागवत ने वीर सावरकर को क्यों उद्धृत किया?
भागवत ने वीर सावरकर की पंक्तियाँ — 'जे जे उत्तम उदात्त उन्नत महन मधुर ते ते, स्वतंत्रते सत भगवती सर्वतव सहचारी होते' — उद्धृत कर यह समझाया कि स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ केवल राजनीतिक मुक्ति नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में उत्तम और उन्नत मूल्यों की स्थापना है।
RSS के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में क्या हुआ?
15 अगस्त 2026 को नागपुर स्थित RSS मुख्यालय में विशेष कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने ध्वजारोहण किया। इसके बाद भारत माता का पूजन हुआ और बड़ी संख्या में स्वयंसेवक व सुरक्षा कर्मी उपस्थित रहे।
राष्ट्र प्रेस
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