29 सितंबर 2026
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गंडक नदी 91.25 मीटर के नए रिकॉर्ड पर, बिहार में तीन स्थानों पर तटबंध क्षतिग्रस्त

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गंडक नदी 91.25 मीटर के नए रिकॉर्ड पर, बिहार में तीन स्थानों पर तटबंध क्षतिग्रस्त

सारांश

नेपाल में भारी बारिश के बाद गंडक नदी बगहा गेज स्थल पर 91.25 मीटर के नए रिकॉर्ड पर पहुँच गई — 2024 के पिछले रिकॉर्ड से 0.35 मीटर अधिक। बिहार के दो और यूपी के कुशीनगर में एक तटबंध क्षतिग्रस्त; 169 स्थानों पर सीपेज नियंत्रित। डाउनस्ट्रीम जिलों में अलर्ट जारी।

मुख्य बातें

गंडक नदी का जलस्तर 29 सितंबर 2026 को बगहा गेज स्थल पर 91.25 मीटर के नए रिकॉर्ड पर पहुँचा, जो 2024 के 90.90 मीटर से 0.35 मीटर अधिक है।
वाल्मीकिनगर गंडक बराज से 28 सितंबर की सुबह 5,43,500 क्यूसेक पानी छोड़ा गया; 13 घंटे तक प्रवाह 5 लाख क्यूसेक से अधिक रहा।
पश्चिम चंपारण में खैरतवा और फुलियाखाड़ गाँवों के पास चंपारण तटबंध दो स्थानों पर क्षतिग्रस्त।
कुशीनगर (उत्तर प्रदेश) में गंडक के दाएं तट पर एक स्थान पर तटबंध को क्षति।
विभाग ने 169 स्थानों पर सीपेज और पाइपिंग की समस्या तत्काल सुरक्षित की; चार दल बगहा, बेतिया, मोतिहारी व गोपालगंज भेजे गए।
डाउनस्ट्रीम जिलों में जलस्तर बढ़ने की प्रवृत्ति जारी; निचले इलाकों में प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश।

बिहार में गंडक नदी का जलस्तर 29 सितंबर 2026 को बगहा गेज स्थल पर 91.25 मीटर के नए रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुँच गया — जो 2024 में दर्ज 90.90 मीटर के पिछले उच्चतम स्तर से 0.35 मीटर अधिक है। नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में कम समय में हुई अत्यधिक बारिश के बाद उत्पन्न फ्लैश फ्लड की स्थिति ने पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली जिलों में तटबंधों पर भारी दबाव बना दिया है।

बराज से जलश्राव और रिकॉर्ड प्रवाह

वाल्मीकिनगर गंडक बराज से 28 सितंबर की सुबह छह बजे 5,43,500 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जिसके बाद नदी का जलप्रवाह तेज़ी से डाउनस्ट्रीम की ओर बढ़ा। जल संसाधन विभाग के अनुसार, बराज पर 13 घंटे तक जलश्राव पाँच लाख क्यूसेक से अधिक और 32 घंटे तक चार लाख क्यूसेक से अधिक बना रहा। यह ऐसे समय में आया है जब 26 और 27 सितंबर के बीच पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण और गोपालगंज में भी भारी स्थानीय वर्षा दर्ज की गई थी, जिससे बराज के डाउनस्ट्रीम में जलस्तर पहले से ही ऊँचा था। गौरतलब है कि इस बार बराज से छोड़ा गया अधिकतम जलश्राव वर्ष 2024 के 5,62,500 क्यूसेक के मुकाबले कम रहा, फिर भी बगहा गेज स्थल पर जलस्तर ने नया रिकॉर्ड बनाया — यह दर्शाता है कि स्थानीय वर्षा और जलश्राव की अवधि ने स्थिति को और गंभीर बना दिया।

तीन स्थानों पर तटबंध क्षतिग्रस्त

28-29 सितंबर की मध्यरात्रि में पश्चिम चंपारण जिले में गंडक नदी के बाएं तट पर निर्मित चंपारण तटबंध को दो स्थानों पर क्षति पहुँची। प्रभावित स्थानों में बगहा-1 प्रखंड के खैरतवा गाँव और बैरिया प्रखंड के फुलियाखाड़ गाँव शामिल हैं। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में गंडक नदी के दाएं तट पर बने तटबंध को भी एक स्थान पर क्षति हुई है। विभाग के अनुसार, अब तक 169 स्थानों पर सीपेज और पाइपिंग की समस्या को तत्काल कार्रवाई कर सुरक्षित किया जा चुका है, हालांकि कई संवेदनशील स्थानों पर स्थिति अभी भी निगरानी में है।

सरकार और विभाग की प्रतिक्रिया

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जल संसाधन विभाग के मुख्यालय से रात में ही कार्यपालक अभियंता की अध्यक्षता में चार दल क्रमशः बगहा, बेतिया, मोतिहारी और गोपालगंज भेजे गए। अतिरिक्त अभियंताओं की पहले से तैनाती की गई है और क्षेत्रीय अभियंता बाढ़ संघर्षात्मक कार्य में जुटे हैं। संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाई गई है तथा ज़रूरत के अनुसार तत्काल बचाव एवं मरम्मत कार्य जारी है।

आम जनता पर असर और आगे की स्थिति

विभाग के अनुसार, अपस्ट्रीम में नदी का जलस्तर घटने और डाउनस्ट्रीम में बढ़ने की प्रवृत्ति अभी बनी हुई है। प्रशासन को निचले इलाकों में संभावित जल फैलाव को देखते हुए सतर्क रहने और आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। वरिष्ठ अधिकारी लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और क्षतिग्रस्त तटबंधों की मरम्मत का काम युद्धस्तर पर जारी है। यह देखना होगा कि डाउनस्ट्रीम जिलों में जलस्तर कब तक नियंत्रण में आता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी जलस्तर नया उच्चतम बना। इसका अर्थ है कि स्थानीय वर्षा और जलश्राव की लंबी अवधि मिलकर उतनी ही विनाशकारी साबित हो सकती है, जितना एकल उच्चतम प्रवाह। बिहार के तटबंधों पर 169 स्थानों पर सीपेज की घटनाएँ यह भी बताती हैं कि बाढ़ प्रबंधन का ढाँचा बार-बार के इन झटकों के लिए पर्याप्त रूप से तैयार नहीं है। नेपाल-बिहार समन्वित बाढ़ प्रबंधन और तटबंध सुदृढ़ीकरण की दीर्घकालिक रणनीति अब केवल सुझाव नहीं, बल्कि अनिवार्यता है।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गंडक नदी का जलस्तर 91.25 मीटर क्यों रिकॉर्ड पर है?
नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में कम समय में हुई अत्यधिक बारिश और स्थानीय स्तर पर हुई वर्षा के संयुक्त प्रभाव से गंडक में फ्लैश फ्लड आई। इससे बगहा गेज स्थल पर जलस्तर 91.25 मीटर तक पहुँच गया, जो 2024 के 90.90 मीटर के पिछले रिकॉर्ड से 0.35 मीटर अधिक है।
बिहार में किन-किन स्थानों पर तटबंध क्षतिग्रस्त हुए हैं?
पश्चिम चंपारण जिले में गंडक के बाएं तट पर चंपारण तटबंध को बगहा-1 प्रखंड के खैरतवा गाँव और बैरिया प्रखंड के फुलियाखाड़ गाँव में क्षति पहुँची है। इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में गंडक के दाएं तट पर एक स्थान पर भी तटबंध क्षतिग्रस्त हुआ है।
वाल्मीकिनगर बराज से कितना पानी छोड़ा गया?
28 सितंबर की सुबह छह बजे वाल्मीकिनगर गंडक बराज से 5,43,500 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। बराज पर 13 घंटे तक जलश्राव पाँच लाख क्यूसेक से अधिक और 32 घंटे तक चार लाख क्यूसेक से अधिक बना रहा।
जल संसाधन विभाग ने क्या कदम उठाए हैं?
विभाग ने 169 स्थानों पर सीपेज और पाइपिंग की समस्या तत्काल सुरक्षित की है और कार्यपालक अभियंता की अध्यक्षता में चार दलों को बगहा, बेतिया, मोतिहारी और गोपालगंज भेजा गया है। क्षतिग्रस्त तटबंधों की मरम्मत का काम जारी है और संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाई गई है।
कौन-से जिले सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं?
पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली जिलों में बाढ़ का खतरा सबसे अधिक है, क्योंकि गंडक का जलप्रवाह इन्हीं जिलों की ओर बढ़ा है। प्रशासन को निचले इलाकों में संभावित जल फैलाव को लेकर सतर्क रहने और आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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