क्या प्रधानमंत्री मोदी ने 'दारुमा' गुड़िया गिफ्ट पर आभार जताया और भारत के साथ संबंधों को बताया गहरा?

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क्या प्रधानमंत्री मोदी ने 'दारुमा' गुड़िया गिफ्ट पर आभार जताया और भारत के साथ संबंधों को बताया गहरा?

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी ने जापान दौरे के दौरान दारुमा गुड़िया प्राप्त की, जो भारत और जापान के बीच संबंधों को दर्शाती है। इस सांस्कृतिक उपहार के माध्यम से पीएम मोदी ने दोनों देशों के बीच गहरे संबंधों की पुष्टि की है। जानें इस अनोखी गुड़िया के पीछे की कहानी और प्रधानमंत्री मोदी के विचार।

Key Takeaways

  • दारुमा गुड़िया जापान का एक सांस्कृतिक प्रतीक है।
  • यह भारत और जापान के बीच संबंधों को दर्शाती है।
  • गुड़िया का गोल आकार उसे गिरने पर भी खड़ा रहने में मदद करता है।
  • यह दृढ़ता और सौभाग्य का प्रतीक है।
  • इसका उपयोग लक्ष्य प्राप्त करने के लिए किया जाता है।

टोक्यो, 29 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान और चीन के दौरे पर हैं। पहले पड़ाव में पीएम मोदी जापान पहुंचे हैं, जहां वे टोक्यो में आयोजित 15वें भारत-जापान समिट में शामिल होंगे। दारुमा-जी मंदिर के मुख्य पुजारी रेव सीशी हिरोसे ने शुक्रवार को उन्हें एक 'दारुमा' गुड़िया भेंट की। प्रधानमंत्री मोदी ने इस उपहार के लिए उनका आभार व्यक्त किया है।

पीएम नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए कहा कि ताकासाकी-गुन्मा स्थित शोरिनजान दारुमा-जी मंदिर के मुख्य पुजारी रेव सीशी हिरोसे से मिलकर मुझे बहुत खुशी हुई। 'दारुमा' गुड़िया भेंट करने के लिए मैं उनका आभार व्यक्त करता हूं। दारुमा को जापान में एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक प्रतीक माना जाता है और इसका भारत से भी गहरा संबंध है। यह प्रसिद्ध भिक्षु बोधिधर्म से प्रभावित है।

दारुमा गुड़िया जापान का एक खास सांस्कृतिक प्रतीक और यादगार चिह्न है, जो बौद्ध धर्म के जेन संप्रदाय के संस्थापक बोधिधर्म (दारुमा दैशी) पर आधारित है। यह गुड़िया दृढ़ता और सौभाग्य का प्रतीक मानी जाती है। इसका उपयोग लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें प्राप्त करने के लिए किया जाता है।

इसे बनाने की परंपरा में, जब कोई लक्ष्य तय किया जाता है तो गुड़िया की एक आंख भर दी जाती है और जब लक्ष्य प्राप्त हो जाता है तो दूसरी आंख भी भर दी जाती है। यह 'सात बार गिरो, आठ बार उठो' की कहावत को भी दर्शाती है, जो कभी हार न मानने का गुण है। यह गुड़िया का गोल आधार इसके गिरने पर भी वापस खड़े होने में मदद करता है।

'दारुमा' गुड़िया भारत के कांचीपुरम से आए बौद्ध भिक्षु बोधिधर्म पर आधारित है। ऐसा माना जाता है कि बोधिधर्म ने नौ साल तक लगातार दीवार की ओर मुख करके ध्यान किया था, जिसमें उनके हाथ-पैर सिकुड़े हुए थे। यही कारण है कि दारुमा गुड़िया का आकार गोल और बिना हाथ-पैर तथा आंखों वाला है।

जापान दौरे के पहले दिन पीएम मोदी ने बिजनेस जगत के दिग्गजों के साथ चर्चा की। इसके बाद उन्होंने जापान के प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष नुकागा फुकुशिरो और जापानी सांसदों के एक समूह के साथ एक बैठक की। इस दौरान उनके बीच भारत और जापान के बीच मजबूत और मैत्रीपूर्ण संबंधों पर चर्चा हुई।

Point of View

बल्कि भारत और जापान के बीच मजबूत संबंधों की पुष्टि की। इस प्रकार के दौरे दोनों देशों के लिए सामरिक और आर्थिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं।
NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

दारुमा गुड़िया का क्या महत्व है?
दारुमा गुड़िया जापान का एक खास सांस्कृतिक प्रतीक है, जो दृढ़ता और सौभाग्य का प्रतीक मानी जाती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने दारुमा गुड़िया के लिए किसका आभार व्यक्त किया?
पीएम मोदी ने दारुमा-जी मंदिर के मुख्य पुजारी रेव सीशी हिरोसे का आभार व्यक्त किया।
दारुमा गुड़िया का आकार क्यों गोल है?
यह गुड़िया बौद्ध भिक्षु बोधिधर्म के ध्यान की स्थिति से प्रेरित है, जिसमें उनके हाथ-पैर सिकुड़े हुए थे।