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सफाई अभियान में रूसी दूतावास की पहल, राजदूत डेनिस अलीपोव बोले— पर्यावरण रक्षा में युवाओं की भागीदारी अनिवार्य

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सफाई अभियान में रूसी दूतावास की पहल, राजदूत डेनिस अलीपोव बोले— पर्यावरण रक्षा में युवाओं की भागीदारी अनिवार्य

सारांश

नई दिल्ली में रूसी दूतावास ने 'वी स्टैंड फॉर क्लीननेस' अभियान के तहत सफाई मुहिम चलाई। राजदूत डेनिस अलीपोव ने युवाओं की सक्रिय भागीदारी को पर्यावरण संरक्षण के लिए अनिवार्य बताया और प्रदूषण को वैश्विक चुनौती करार दिया।

मुख्य बातें

रूसी दूतावास ने 26 अप्रैल 2025 को नई दिल्ली में 'वी स्टैंड फॉर क्लीननेस' अभियान के तहत सफाई मुहिम चलाई।
राजदूत डेनिस अलीपोव , उनकी पत्नी डायना अलीपोवा और रूसी राजनयिक मिशन के सदस्य इस अभियान में शामिल हुए।
यह कार्यक्रम भारत के स्वच्छ भारत अभियान और अर्थ डे की भावना को समर्पित था।
राजदूत ने युवाओं की सक्रिय भागीदारी को पर्यावरण आंदोलनों के लिए सबसे जरूरी बताया।
डायना अलीपोवा ने प्रदूषण की गंभीरता को रेखांकित करते हुए अधिक पेड़ लगाने और जागरूकता फैलाने पर जोर दिया।
यह पहल भारत-रूस संबंधों में पर्यावरण सहयोग और लोक-कूटनीति के नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।

नई दिल्ली, 26 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत में रूसी दूतावास ने अखिल रूसी राष्ट्रीय पर्यावरण परियोजना 'वी स्टैंड फॉर क्लीननेस' के अंतर्गत नई दिल्ली में एक विशेष सफाई अभियान का आयोजन किया। यह कार्यक्रम भारत के 'स्वच्छ भारत अभियान' को समर्पित था और इसमें रूसी राजनयिक मिशन के सदस्यों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण और युवा भागीदारी को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया।

अभियान का उद्देश्य और भागीदारी

राजदूत डेनिस अलीपोव, उनकी पत्नी डायना अलीपोवा और रूसी राजनयिक मिशन के तमाम सदस्यों ने इस सफाई मुहिम में सक्रिय भूमिका निभाई। अभियान का आयोजन अर्थ डे की भावना के अनुरूप किया गया, जो पर्यावरण जागरूकता और जलवायु संरक्षण के प्रति वैश्विक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। रूसी दूतावास ने इस पहल के जरिए भारत-रूस मैत्री को एक नई, पर्यावरणीय आयाम भी दिया।

राजदूत अलीपोव ने राष्ट्र प्रेस से खास बातचीत में कहा, "हम सफाई के लिए एकजुट हैं और इस कार्यक्रम के जरिए भारत व रूस — दोनों देशों की स्वच्छता में अपना छोटा-सा योगदान देकर हम प्रसन्न हैं।" उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि एनडीएमसी की सक्रियता की वजह से इलाका पहले से काफी साफ था, फिर भी इस प्रतीकात्मक पहल का महत्व कम नहीं हुआ।

पर्यावरण और जलवायु पर राजदूत का संदेश

राजदूत डेनिस अलीपोव ने अर्थ डे और जलवायु परिवर्तन के मुद्दों को आपस में जोड़ते हुए कहा कि "स्वच्छता, जलवायु और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे से अभिन्न रूप से जुड़े हुए हैं।" उनके अनुसार, जितना साफ-सुथरा हम अपना परिवेश रखेंगे, उतना ही बेहतर यह पूरी दुनिया और जलवायु के लिए होगा।

उन्होंने प्रदूषण को हर देश की साझा चुनौती बताते हुए कहा कि "यह केवल भारत की समस्या नहीं, बल्कि एक वैश्विक संकट है।" स्वयंसेवी आंदोलनों को इस दिशा में कारगर बताते हुए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मजबूत सामूहिक कदम उठाने पर जोर दिया।

युवाओं की भूमिका पर जोर

राजदूत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि "युवा किसी भी राष्ट्र का भविष्य होते हैं और पर्यावरण आंदोलनों में उनकी सक्रिय भागीदारी सबसे अधिक जरूरी है।" इस अभियान में रूसी दूतावास परिवार के बच्चे भी शामिल हुए, जो इस संदेश को व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत करता है।

अभियान में भाग लेने वाली अंजलीना ने कहा कि यह उनके लिए एक अनूठा अनुभव था और इस पहल से भारत की मदद करने का अवसर मिला। वहीं एव्जीनिया ने इस कार्यक्रम को वैश्विक एकता का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रेरणादायक है।

डायना अलीपोवा का आह्वान — सिखाएं, नेतृत्व थोपें नहीं

राजदूत की पत्नी डायना अलीपोवा ने पर्यावरण जागरूकता पर एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने कहा, "लोगों को सिखाना जरूरी है, उन पर नेतृत्व थोपना नहीं — यही सबसे बड़ा सबक है।" उनके अनुसार, इस तरह की पहल बड़ों और युवा पीढ़ी दोनों के लिए एक जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करती है।

डायना अलीपोवा ने कहा कि अपने शहर, गांव और आस-पड़ोस को आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और हरा-भरा रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि "महज 30 मिनट काम करने के बाद धूल की वजह से उनकी आवाज भारी हो गई — यही वह हवा है जो हम हर रोज सांस लेते हैं।" अधिक पेड़ लगाने को उन्होंने प्रदूषण से लड़ने का सबसे सरल और प्रभावी उपाय बताया।

भारत-रूस संबंधों में पर्यावरण सहयोग का नया अध्याय

यह सफाई अभियान भारत-रूस द्विपक्षीय संबंधों में एक नई और सकारात्मक परत जोड़ता है। परंपरागत रूप से रक्षा, ऊर्जा और व्यापार के क्षेत्र में मजबूत रहे इस रिश्ते में अब पर्यावरण सहयोग भी एक साझा धरातल बन रहा है। गौरतलब है कि भारत और रूस दोनों ही देश जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से जूझ रहे हैं और इस तरह की जन-जागरूकता पहलें नीतिगत स्तर पर भी संवाद का रास्ता खोलती हैं।

आने वाले समय में रूसी दूतावास द्वारा इस तरह के और पर्यावरण-केंद्रित कार्यक्रमों की उम्मीद की जा सकती है, जो भारत के स्वच्छ भारत और नेट-जीरो लक्ष्यों के साथ तालमेल बिठाते हुए दोनों देशों के बीच लोक-कूटनीति को नई ऊंचाई देंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि कूटनीति के बदलते चेहरे का संकेत है — जहां राजनयिक संबंध अब केवल रक्षा सौदों और तेल व्यापार तक सीमित नहीं रहे। दिलचस्प यह है कि जब वैश्विक मंच पर रूस कई मोर्चों पर अलगाव झेल रहा है, तब भारत में इस तरह की लोक-कूटनीति उसकी 'सॉफ्ट पावर' रणनीति का हिस्सा दिखती है। हालांकि, असली सवाल यह है कि क्या ये प्रतीकात्मक पहलें जमीनी स्तर पर नीतिगत बदलाव और दीर्घकालिक पर्यावरण सहयोग में तब्दील होंगी — या महज फोटो-ऑप बनकर रह जाएंगी? युवाओं को आगे लाने की बात तो हर मंच पर होती है, लेकिन संस्थागत ढांचा बनाए बिना यह आह्वान खोखला रह जाता है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रूसी दूतावास ने भारत में सफाई अभियान क्यों चलाया?
रूसी दूतावास ने अखिल रूसी राष्ट्रीय पर्यावरण परियोजना 'वी स्टैंड फॉर क्लीननेस' के तहत यह अभियान चलाया, जो भारत के स्वच्छ भारत अभियान को समर्पित था। यह पहल पर्यावरण जागरूकता और भारत-रूस मैत्री को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई।
भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने सफाई अभियान पर क्या कहा?
राजदूत डेनिस अलीपोव ने कहा कि स्वच्छता, जलवायु और पर्यावरण संरक्षण आपस में जुड़े हुए हैं और युवाओं को ऐसे आंदोलनों में सबसे सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने प्रदूषण को वैश्विक चुनौती बताते हुए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।
'वी स्टैंड फॉर क्लीननेस' परियोजना क्या है?
'वी स्टैंड फॉर क्लीननेस' एक अखिल रूसी राष्ट्रीय पर्यावरण परियोजना है जो स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देती है। रूसी दूतावास ने इसे भारत में भी लागू करते हुए स्वच्छ भारत अभियान से जोड़ा।
डायना अलीपोवा ने पर्यावरण जागरूकता पर क्या संदेश दिया?
डायना अलीपोवा ने कहा कि लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना जरूरी है, न कि उन पर नेतृत्व थोपना। उन्होंने अधिक पेड़ लगाने और अपने शहर-गांव को आने वाली पीढ़ियों के लिए साफ रखने की अपील की।
इस सफाई अभियान का भारत-रूस संबंधों पर क्या प्रभाव है?
यह अभियान भारत-रूस द्विपक्षीय संबंधों में पर्यावरण सहयोग का एक नया आयाम जोड़ता है। परंपरागत रूप से रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में मजबूत इस रिश्ते में अब लोक-कूटनीति और पर्यावरणीय साझेदारी भी शामिल हो रही है।
राष्ट्र प्रेस
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