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सीसी-MBS काहिरा बैठक: मिस्र-सऊदी संबंध और यमन संकट पर हुई अहम चर्चा

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सीसी-MBS काहिरा बैठक: मिस्र-सऊदी संबंध और यमन संकट पर हुई अहम चर्चा

सारांश

काहिरा में मिस्र के राष्ट्रपति सीसी और सऊदी क्राउन प्रिंस MBS की बैठक तब हुई जब हूती समूह ने सऊदी एयरबेस पर मिसाइल-ड्रोन हमले का दावा किया और मोखा बंदरगाह व मयून द्वीप पर कब्ज़ा कर लाल सागर मार्ग पर अपनी पकड़ मज़बूत की। यह कूटनीति बढ़ते क्षेत्रीय तनाव की गंभीरता को दर्शाती है।

मुख्य बातें

मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल-फतह अल-सीसी और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने 16 सितंबर को काहिरा में मुलाकात की।
दोनों देशों ने द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने और व्यापार-निवेश की बाधाएँ दूर करने पर सहमति जताई।
सीसी ने सऊदी अरब की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर किसी भी हमले की निंदा की और यमन संकट के राजनीतिक समाधान का समर्थन किया।
हूती समूह ने सोमवार को सऊदी अरब के एक प्रमुख सैन्य एयरबेस पर बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागने का दावा किया।
हूती लड़ाकों ने मोखा बंदरगाह और मयून द्वीप पर कब्ज़ा कर बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर नियंत्रण मज़बूत किया।
क्राउन प्रिंस MBS ने उसी दिन जेद्दा में सेंटकॉम कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर से भी मुलाकात की।

मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल-फतह अल-सीसी ने 16 सितंबर को काहिरा में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस एवं प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात की, जहाँ दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने के साथ-साथ क्षेत्रीय सुरक्षा की बिगड़ती स्थिति पर गहन विचार-विमर्श किया। यह बैठक ऐसे नाज़ुक समय में हुई जब यमन के हूती समूह और सऊदी अरब के बीच सीमा पार संघर्ष तेज़ी से बढ़ रहा है।

बैठक में क्या हुआ

मिस्र के राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग को और आगे बढ़ाने तथा व्यापार एवं निवेश के प्रवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने पर सहमति जताई। बैठक में रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने पर भी बल दिया गया।

राष्ट्रपति सीसी ने सऊदी अरब की संप्रभुता, स्थिरता और क्षेत्रीय अखंडता को नुकसान पहुँचाने वाले किसी भी हमले या धमकी की कड़ी निंदा की और उन्हें पूरी तरह अस्वीकार किया। उन्होंने यह भी दोहराया कि मिस्र, सऊदी अरब की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए हर कदम का समर्थन करता है।

यमन संकट पर मिस्र का रुख

सीसी ने यमन संकट का व्यापक और स्थायी राजनीतिक समाधान निकालने की कोशिशों का भी समर्थन किया। यह बयान ऐसे समय में आया जब हूती समूह ने सोमवार को दावा किया था कि उसने सऊदी अरब के दक्षिण-पश्चिम में स्थित एक प्रमुख सैन्य एयरबेस पर कई बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे।

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह हूती लड़ाकों ने रणनीतिक महत्व वाले मोखा बंदरगाह पर कब्ज़ा कर लिया और दक्षिण की ओर बढ़ते हुए बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य क्षेत्र में पहुँचकर मयून द्वीप पर भी नियंत्रण स्थापित कर लिया। इससे लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाले इस अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर उनकी पकड़ और मज़बूत हो गई है।

सऊदी क्राउन प्रिंस की प्रतिक्रिया

क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने में मिस्र की भूमिका की सराहना की। उन्होंने हाल की भू-राजनीतिक चुनौतियों के दौरान मिस्र द्वारा दिखाई गई एकजुटता और समर्थन की भी प्रशंसा की।

अमेरिका से भी हुई बैठक

इसी दिन सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने जेद्दा में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर से भी मुलाकात की। दोनों पक्षों ने क्षेत्र की ताज़ा परिस्थितियों की समीक्षा की और सऊदी-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों पर भी विस्तृत चर्चा की।

यह श्रृंखलाबद्ध कूटनीतिक गतिविधि संकेत देती है कि लाल सागर क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच खाड़ी देश अपने सहयोगियों के साथ समन्वय को तेज़ कर रहे हैं — और आने वाले हफ्तों में इस क्षेत्र की भू-राजनीतिक दिशा निर्णायक मोड़ ले सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर कम आँकती है। मिस्र का सऊदी अरब के प्रति समर्थन आर्थिक निर्भरता और रणनीतिक हित दोनों से प्रेरित है, लेकिन यमन में राजनीतिक समाधान की वकालत दर्शाती है कि काहिरा एक लंबे सैन्य संघर्ष की थकान से भी वाकिफ है। सेंटकॉम प्रमुख की जेद्दा यात्रा यह स्पष्ट करती है कि अमेरिका भी इस क्षेत्र में अपनी भागीदारी को चुपचाप बढ़ा रहा है।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

काहिरा में सीसी और MBS की बैठक क्यों हुई?
मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल-फतह अल-सीसी और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने 16 सितंबर को काहिरा में द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने और क्षेत्रीय सुरक्षा की बिगड़ती स्थिति पर विचार-विमर्श के लिए मुलाकात की। यह बैठक हूती समूह के बढ़ते हमलों और लाल सागर पर उनके बढ़ते नियंत्रण की पृष्ठभूमि में हुई।
हूती समूह ने सऊदी अरब पर क्या हमले किए?
हूती समूह ने सोमवार को दावा किया कि उसने सऊदी अरब के दक्षिण-पश्चिम में स्थित एक प्रमुख सैन्य एयरबेस पर कई बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे। इसके अलावा, पिछले सप्ताह हूती लड़ाकों ने मोखा बंदरगाह और मयून द्वीप पर कब्ज़ा कर बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ मज़बूत की।
बाब-अल-मंदेब पर हूती नियंत्रण क्यों महत्वपूर्ण है?
बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जिससे वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा गुज़रता है। इस पर हूती नियंत्रण मज़बूत होने से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
मिस्र ने यमन संकट पर क्या रुख अपनाया है?
राष्ट्रपति सीसी ने यमन संकट का व्यापक और स्थायी राजनीतिक समाधान निकालने की कोशिशों का समर्थन किया। साथ ही, उन्होंने सऊदी अरब की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को नुकसान पहुँचाने वाले किसी भी हमले की निंदा की।
सेंटकॉम कमांडर की सऊदी अरब यात्रा का क्या महत्व है?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने जेद्दा में क्राउन प्रिंस MBS से मुलाकात कर क्षेत्रीय परिस्थितियों की समीक्षा की और द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग पर चर्चा की। यह यात्रा दर्शाती है कि अमेरिका लाल सागर क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब के साथ अपने सैन्य समन्वय को सक्रिय रूप से बनाए रख रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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