होर्मुज स्ट्रेट पर मिस्र-सऊदी की चेतावनी: ईरान-अमेरिका तनाव से वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा खतरे में
सारांश
मुख्य बातें
मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलट्टी और सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद ने 13 जुलाई 2026 को एक उच्चस्तरीय टेलीफोन वार्ता में होर्मुज स्ट्रेट में अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को तत्काल कम करने की अपील की। मिस्र के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, दोनों मंत्रियों ने आगाह किया कि समुद्री मार्गों पर किसी भी बाधा का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ेगा।
मुख्य घटनाक्रम
दोनों विदेश मंत्रियों ने अपनी बातचीत में खाड़ी देशों और जॉर्डन पर ईरान के हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से तत्काल तनाव बढ़ाने वाली गतिविधियाँ रोकने की माँग की और अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में रहते हुए कूटनीतिक समाधान की ओर बढ़ने का आह्वान किया। यह ऐसे समय में आया है जब खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियाँ तेज़ी से बढ़ रही हैं।
बंदर अब्बास और केशम द्वीप पर धमाके
अर्ध-सरकारी मेहर समाचार एजेंसी ने स्थानीय सूत्रों के हवाले से बताया कि ईरान के दक्षिणी होर्मोजगन प्रांत के बंदर अब्बास बंदरगाह और केशम द्वीप के आसपास सोमवार दोपहर धमाकों की आवाज़ें सुनी गईं। रिपोर्टों के अनुसार, ये आवाज़ें शहर से दूर के इलाकों से आईं और कथित तौर पर उनका केंद्र बंदर अब्बास के पश्चिमी तट के निकट था। मेहर एजेंसी ने यह भी बताया कि ये धमाके होर्मुज स्ट्रेट और आसपास के समुद्री क्षेत्र में जारी झड़पों से जुड़े हो सकते हैं।
होर्मोजगन प्रशासन और बहरीन की प्रतिक्रिया
होर्मोजगन प्रांत के अधिकारियों ने कहा कि बंदर अब्बास और केशम द्वीप पर अमेरिका के ताज़ा कथित हमलों में किसी के हताहत होने या आवासीय व व्यापारिक इमारतों को नुकसान पहुँचने की कोई पुष्ट सूचना नहीं है। वहीं, बहरीन रक्षा बल ने सोमवार को आधिकारिक बयान में कहा कि उसके हवाई सुरक्षा तंत्र ने ईरान की ओर से दागी गई कई मिसाइलों और ड्रोनों को सफलतापूर्वक रोक दिया। बहरीन ने ईरान पर 'सुनियोजित आक्रामक रवैये' का आरोप लगाते हुए इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बताया।
वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर असर
गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट से विश्व का लगभग 20% कच्चा तेल गुज़रता है, जो इसे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की सबसे संवेदनशील कड़ी बनाता है। किसी भी नाकेबंदी की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय तेल बाज़ारों में तीव्र उथल-पुथल की आशंका है। मिस्र और सऊदी अरब की यह संयुक्त अपील इस बात का संकेत है कि अरब देश इस संघर्ष को क्षेत्रीय सीमाओं से बाहर फैलते नहीं देखना चाहते।
आगे क्या
क्षेत्र में तनाव कम होने के कोई तत्काल संकेत नहीं हैं। कूटनीतिक हलकों में चर्चा है कि अरब लीग और संयुक्त राष्ट्र के स्तर पर मध्यस्थता की कोशिशें तेज़ हो सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या ईरान और अमेरिका बातचीत की मेज़ पर वापस लौटते हैं।