दक्षिण कोरिया की सरकार ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की सुरक्षित निकासी के लिए उठाए कदम
सारांश
Key Takeaways
- दक्षिण कोरिया ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है।
- अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्तों का युद्धविराम हुआ है।
- वर्तमान में वहां सात कोरियाई तेल टैंकर मौजूद हैं।
- दक्षिण कोरिया की सरकार स्थिति पर नजर रख रही है।
- ईरान की मांगों का निर्णय अभी बाकी है।
सियोल, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। दक्षिण कोरिया की सरकार ने बुधवार को यह घोषणा की है कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसे अपने जहाजों को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। यह निर्णय तब लिया गया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम पर सहमति बनी है और इस महत्वपूर्ण तेल मार्ग को फिर से खोलने की चर्चा हो रही है।
अधिकारियों के अनुसार, ट्रेड, इंडस्ट्री और रिसोर्सेज मंत्रालय विदेश मंत्रालय और समुद्री मंत्रालय के सहयोग से काम करेगा, ताकि कोरियाई तेल टैंकर सुरक्षित और शीघ्र इस मार्ग से गुजर सकें।
वर्तमान में, वहां कुल सात तेल टैंकर मौजूद हैं, जिनमें से चार कोरियाई झंडा ले जा रहे हैं। ये टैंकर मिलकर लगभग 1.4 करोड़ बैरल कच्चा तेल ले जा रहे हैं, जो दक्षिण कोरिया की करीब पांच दिन की जरूरत के बराबर है।
इसके अतिरिक्त, वहां आठ और कोरियाई जहाज भी फंसे हुए हैं, जिनमें पेट्रोलियम उत्पाद ले जाने वाले जहाज, पांच बल्क कैरियर, दो गैस कैरियर, एक कंटेनर जहाज और एक गाड़ियों को ढोने वाला जहाज शामिल हैं।
यह सूचना तब आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान पर हमले को दो हफ्तों के लिए रोकने पर सहमति जताई है, लेकिन यह इस शर्त पर है कि ईरान तुरंत और पूरी तरह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने पर राजी हो।
दक्षिण कोरियाई अधिकारियों ने कहा कि सरकार वर्तमान में वहां की स्थिति पर नजर रख रही है और यह देख रही है कि जहाजों के गुजरने के लिए हालात कैसे हैं। दरअसल, अमेरिका के नेतृत्व में ईरान के खिलाफ चल रहे संघर्ष के कारण यह मार्ग लगभग बंद हो गया था।
उधर, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने कहा कि यह दो हफ्ते का युद्धविराम जंग खत्म होने का संकेत नहीं है। आगे की बातचीत में उनकी दस मांगों पर फैसला होना बाकी है।
ईरान की न्यूज एजेंसी के अनुसार, इन दस मांगों में ये मुख्य बातें शामिल हैं—अमेरिका यह भरोसा दे कि आगे कोई हमला नहीं करेगा, होर्मुज पर ईरान का नियंत्रण बना रहेगा, ईरान को परमाणु कार्यक्रम जारी रखने का अधिकार मिलेगा, सभी प्रकार के प्रतिबंध हटाए जाएंगे (चाहे वे सीधे हों या अन्य देशों के माध्यम से लगाए गए हों), और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी के सभी प्रस्ताव खत्म किए जाएंगे।