15 अक्टूबर 2026
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भारत-कनाडा व्यापार को नई दिशा: मैनिटोबा मंत्री जेमी मोसेस की मुंबई यात्रा, लिथियम-निकेल निवेश पर जोर

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भारत-कनाडा व्यापार को नई दिशा: मैनिटोबा मंत्री जेमी मोसेस की मुंबई यात्रा, लिथियम-निकेल निवेश पर जोर

सारांश

कनाडा के मैनिटोबा प्रांत के दो मंत्रियों की मुंबई यात्रा — भारत-कनाडा राजनयिक तनाव के बीच व्यापार की राह खुली रखने की कोशिश। लिथियम, निकेल और कोबाल्ट जैसे खनिजों पर साझेदारी और MERX प्लेटफॉर्म से भारतीय कंपनियों को सीधा निमंत्रण।

मुख्य बातें

मैनिटोबा मंत्री जेमी मोसेस ने 15 अक्टूबर 2026 को मुंबई में भारत-कनाडा आर्थिक सहयोग बढ़ाने की अपील की।
मैनिटोबा में लिथियम, निकेल और कोबाल्ट के भंडार — EV बैटरी और स्वच्छ ऊर्जा उद्योग के लिए महत्वपूर्ण।
मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर समयसीमा देने से मंत्री ने परहेज़ किया; मज़बूत संबंधों को प्राथमिकता बताया।
पब्लिक सर्विस डिलीवरी मंत्री मिंटू संधू ने भारतीय कंपनियों को MERX ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के ज़रिए मैनिटोबा के सरकारी अनुबंधों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया।
दोनों मंत्रियों की यात्रा राजनयिक स्तर की अनिश्चितता के बावजूद प्रांतीय-द्विपक्षीय जुड़ाव बनाए रखने की मैनिटोबा की नीति का हिस्सा।

मैनिटोबा (कनाडा) के बिज़नेस, माइनिंग, ट्रेड एंड जॉब क्रिएशन मंत्री जेमी मोसेस ने 15 अक्टूबर 2026 को मुंबई में कहा कि भारत और कनाडा के बीच आर्थिक सहयोग गहरा करने का यह सबसे उपयुक्त समय है। उन्होंने भारतीय उद्योग जगत के साथ बैठकों के बाद स्पष्ट किया कि मैनिटोबा प्रांत भारतीय बाज़ार में अपार विकास संभावनाएं देख रहा है और व्यापार व निवेश विस्तार के लिए सक्रिय रूप से काम करने को तैयार है।

यात्रा का उद्देश्य और भारत की बढ़ती भूमिका

मंत्री मोसेस ने बताया कि उनकी भारत यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के व्यवसायों के लिए ठोस आर्थिक संबंध स्थापित करना और नए अवसर तैयार करना है। उन्होंने कहा, 'भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और ऐसे में कारोबारी सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।'

यह ऐसे समय में आया है जब भारत-कनाडा राजनयिक संबंधों में पिछले कुछ वर्षों में तनाव के दौर के बाद, व्यापारिक स्तर पर जुड़ाव बहाल करने की कोशिशें तेज़ हो रही हैं। मैनिटोबा का यह प्रतिनिधिमंडल उस पहल का हिस्सा है जो राजनयिक अनिश्चितता के बावजूद आर्थिक सेतु बनाए रखने को प्राथमिकता देता है।

खनिज संसाधन: लिथियम, निकेल और कोबाल्ट की अहमियत

मोसेस ने मैनिटोबा के खनिज संसाधनों को इस साझेदारी की धुरी बताया। उनके अनुसार, मैनिटोबा में लिथियम, निकेल और कोबाल्ट के महत्वपूर्ण भंडार हैं, जो इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बैटरी और स्वच्छ ऊर्जा उद्योग के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। गौरतलब है कि भारत अपनी EV नीति के तहत इन महत्वपूर्ण खनिजों की घरेलू और विदेशी आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ज़ोर दे रहा है।

मंत्री ने कहा कि मैनिटोबा सरकार मज़बूत अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ ऐसी परियोजनाएं विकसित करना चाहती है, जो न केवल मैनिटोबा बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी लाभदायक सिद्ध हों।

मुक्त व्यापार समझौता: समयसीमा से पहले संबंधों की मज़बूती

भारत-कनाडा मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर पूछे गए सवाल के जवाब में मोसेस ने सावधानीपूर्वक कहा कि फिलहाल उनका ध्यान किसी तय समयसीमा के बजाय मज़बूत और सकारात्मक व्यापारिक रिश्ते बनाने पर केंद्रित है। आलोचकों का कहना है कि FTA को लेकर अनिश्चितता दोनों देशों के निवेशकों को सतर्क बनाए हुए है, लेकिन प्रांतीय स्तर की यात्राएं इस रुकावट से अलग द्विपक्षीय गतिविधि जारी रखने का रास्ता खोलती हैं।

पारदर्शी सरकारी खरीद: MERX प्लेटफॉर्म से भारतीय कंपनियों को निमंत्रण

मैनिटोबा सरकार में पब्लिक सर्विस डिलीवरी मंत्री मिंटू संधू ने बताया कि उनकी मुंबई यात्रा अत्यंत सकारात्मक रही है। उन्होंने कहा कि मैनिटोबा सरकार ने सरकारी खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में कई ठोस कदम उठाए हैं।

संधू ने भारतीय उद्योग जगत को MERX नामक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से मैनिटोबा सरकार के अनुबंधों और परियोजनाओं से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय मूल की और अंतरराष्ट्रीय कंपनियां समान रूप से इस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध अवसरों का लाभ उठा सकती हैं।

आगे की राह

मोसेस ने उम्मीद जताई कि भारतीय कंपनियों के साथ हुई बातचीत आगे बड़े निवेश और व्यापारिक अनुबंधों का मार्ग प्रशस्त करेगी। उनके अनुसार, मज़बूत कारोबारी रिश्ते ही दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी की नींव तैयार करते हैं। दोनों मंत्रियों की यह संयुक्त यात्रा इस बात का संकेत है कि कनाडाई प्रांत भारत के साथ आर्थिक संबंधों को राष्ट्रीय राजनयिक उतार-चढ़ाव से परे रखकर आगे बढ़ाने के इच्छुक हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

वहाँ प्रांतीय सरकारें अपनी आर्थिक कूटनीति चला रही हैं। लिथियम और निकेल पर साझेदारी की बात सतह पर आकर्षक लगती है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या भारतीय कंपनियों को मैनिटोबा में निवेश के लिए वैसा नीतिगत ढाँचा मिलेगा जो कनाडाई संघीय अनिश्चितता से प्रभावित न हो। FTA पर समयसीमा से बचना इस बात का संकेत है कि ज़मीनी बाधाएं अभी बनी हुई हैं। MERX जैसे प्लेटफॉर्म के ज़रिए भारतीय कंपनियों को निमंत्रण व्यावहारिक है, लेकिन इसके लिए भारतीय उद्योग को कनाडाई सरकारी खरीद की जटिलताओं को समझने में निवेश करना होगा।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मैनिटोबा मंत्री जेमी मोसेस की भारत यात्रा का उद्देश्य क्या था?
जेमी मोसेस ने 15 अक्टूबर 2026 को मुंबई में भारतीय उद्योग जगत के साथ बैठकें कीं, जिनका उद्देश्य मज़बूत आर्थिक संबंध स्थापित करना और दोनों देशों के व्यवसायों के लिए नए अवसर तैयार करना था। उन्होंने खनिज संसाधनों, व्यापार विस्तार और निवेश संभावनाओं पर विशेष ज़ोर दिया।
मैनिटोबा में कौन-से महत्वपूर्ण खनिज संसाधन उपलब्ध हैं जो भारत के लिए अहम हैं?
मैनिटोबा में लिथियम, निकेल और कोबाल्ट के भंडार हैं, जो इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बैटरी और स्वच्छ ऊर्जा उद्योग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। भारत जैसे-जैसे अपनी EV नीति को आगे बढ़ा रहा है, इन खनिजों की विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला उसके लिए रणनीतिक प्राथमिकता बन गई है।
भारत-कनाडा मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की स्थिति क्या है?
मंत्री मोसेस ने FTA पर कोई तय समयसीमा देने से परहेज़ किया और कहा कि उनका ध्यान पहले मज़बूत व्यापारिक संबंध बनाने पर है। यह संकेत देता है कि दोनों देशों के बीच FTA को लेकर बातचीत अभी प्रारंभिक चरण में है।
MERX प्लेटफॉर्म क्या है और भारतीय कंपनियाँ इसका लाभ कैसे उठा सकती हैं?
MERX एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है जहाँ मैनिटोबा सरकार की सरकारी खरीद प्रक्रियाओं और परियोजनाओं की जानकारी उपलब्ध होती है। मंत्री मिंटू संधू के अनुसार, भारतीय और भारतीय मूल की कंपनियाँ इस प्लेटफॉर्म पर जाकर मैनिटोबा सरकारी अनुबंधों में भाग लेने के अवसर तलाश सकती हैं।
भारत-कनाडा के बीच आर्थिक संबंधों की मौजूदा स्थिति क्या है?
पिछले कुछ वर्षों में राजनयिक स्तर पर तनाव के बावजूद, मैनिटोबा जैसे कनाडाई प्रांत प्रांतीय स्तर पर भारत के साथ व्यापारिक जुड़ाव बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों मंत्रियों की मुंबई यात्रा इस रणनीति का हिस्सा है, जो राष्ट्रीय राजनयिक उतार-चढ़ाव से अलग आर्थिक सहयोग को प्राथमिकता देती है।
राष्ट्र प्रेस
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