कोलोराडो-यूटा सीमा पर जंगल की आग में तीन फायरफाइटर्स की मौत, देशभर में 45 बड़े दावानल सक्रिय
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका के पश्चिमी राज्यों में भीषण दावानल के बीच कोलोराडो-यूटा सीमा पर 29 जून 2026 को तीन वाइल्डलैंड अग्निशमन कर्मियों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से झुलस गए। अमेरिकी वाइल्डलैंड फायर सर्विस के अनुसार, भीषण गर्मी, शुष्क मौसम और तेज हवाओं के संयोजन ने आग को बेकाबू बना दिया, जिससे देशभर में सक्रिय बड़े दावानलों की संख्या बढ़कर 45 हो गई है।
मुख्य घटनाक्रम
कोलोराडो के मेसा काउंटी में नोल्स और गोर में लगी आग पर काबू पाने के दौरान फायरफाइटर्स अचानक बढ़ती लपटों की चपेट में आ गए। अमेरिकी गृह विभाग ने इसे 'बर्नओवर घटना' बताया — एक ऐसी स्थिति जिसमें आग की दिशा और गति अप्रत्याशित रूप से बदल जाती है और क्रू उसकी चपेट में आ जाते हैं। क्रू ने इमरजेंसी फायर शेल्टर तैनात किए, लेकिन तीन की जान नहीं बचाई जा सकी। बाद में नोल्स और गोर की आग एक अन्य आग के साथ मिलकर स्नाइडर फायर बन गई।
फायरफाइटर्स कौन थे
मारे गए तीनों अग्निशमन कर्मी दो संघीय एजेंसियों से थे — अमेरिकी वाइल्डलैंड फायर सर्विस और अमेरिका फॉरेस्ट सर्विस — जो सार्वजनिक भूमि का प्रबंधन देखती हैं। वाइल्डलैंड फायर सर्विस अमेरिकी गृह विभाग का हिस्सा है और इसे इसी वर्ष जनवरी 2026 में सार्वजनिक भूमि पर अग्निशमन प्रयासों को सुव्यवस्थित करने के लिए गठित किया गया था।
सरकार की प्रतिक्रिया
कोलोराडो के गवर्नर जेरेड पोलिस ने शनिवार को डिजास्टर इमरजेंसी की घोषणा की और आग से लड़ने के लिए कोलोराडो नेशनल गार्ड को तैनात करने की अनुमति दी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर गवर्नर पोलिस ने लिखा, 'वेस्टर्न कोलोराडो में ड्यूटी के दौरान मारे गए तीन बहादुर फायरफाइटर्स के जाने से मैं बहुत दुखी हूं। जो पुरुष और महिलाएं इन आग के सामने अपनी जान जोखिम में डालकर हमें सुरक्षित रखते हैं और उन जमीनों और समुदायों की रक्षा करते हैं जिन्हें हम प्यार करते हैं।' उन्होंने आगे कहा कि राज्य ब्यूरो ऑफ लैंड मैनेजमेंट और स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर सभी जरूरी संसाधन लगाए जा रहे हैं।
आम जनता और राज्य पर असर
देशभर में एक साथ 45 बड़े दावानल सक्रिय होने से पश्चिमी अमेरिका के कई समुदायों पर खतरा मंडरा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका के पश्चिमी राज्य लंबे समय से सूखे और रिकॉर्ड तापमान की मार झेल रहे हैं। गौरतलब है कि हाल के वर्षों में जंगल की आग की तीव्रता और आवृत्ति दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जिसे पर्यावरण विशेषज्ञ जलवायु परिवर्तन से जोड़ते हैं।
क्या होगा आगे
अधिकारियों के अनुसार, मारे गए तीनों फायरफाइटर्स के शवों को निकालने का काम जारी है। नेशनल गार्ड की तैनाती के साथ अग्निशमन अभियान को और मजबूत किया जा रहा है। मौसम विभाग की चेतावनियों के मद्देनजर आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।