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ट्रंप प्रशासन ने संयुक्त राष्ट्र बजट में $1 अरब से अधिक की कटौती की, 3,000 पद होंगे समाप्त

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ट्रंप प्रशासन ने संयुक्त राष्ट्र बजट में $1 अरब से अधिक की कटौती की, 3,000 पद होंगे समाप्त

सारांश

ट्रंप प्रशासन ने संयुक्त राष्ट्र के बजट में $1 अरब से अधिक की कटौती, 3,000 पद समाप्त करने और 25% शांति सैनिकों की वापसी का दावा किया है — यह सब महासभा में ट्रंप के संबोधन से ठीक पहले। संगठन को 'डाइट पर रखने' की यह मुहिम यूएन के 80 साल के इतिहास की सबसे बड़ी संरचनात्मक कटौती बताई जा रही है।

मुख्य बातें

ट्रंप प्रशासन ने संयुक्त राष्ट्र के बजट में $1 अरब से अधिक की कटौती का दावा किया।
यूएन मुख्यालय के 3,000 पद समाप्त किए जा रहे हैं और दुनिया भर में 25% से अधिक शांति सैनिक वापस बुलाए जा रहे हैं।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसे संगठन के 80 साल के इतिहास में पहली बड़ी संरचनात्मक कटौती बताया।
राष्ट्रपति ट्रंप मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे; ब्रिटिश , जापानी PM और GCC नेताओं से बैठकें तय हैं।
भाषण में ईरान परमाणु कार्यक्रम और गाजा शांति योजना पर प्रगति के मुद्दे उठाए जाएँगे।
ब्रीफिंग में बचत, प्रभावित पदों और अभियानों का विस्तृत आँकड़ा नहीं दिया गया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने 19 सितंबर 2026 को घोषणा की कि उसने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के बजट में 1 अरब डॉलर से अधिक की कटौती सुनिश्चित कर ली है। साथ ही मुख्यालय के 3,000 पदों को समाप्त करने और दुनिया भर में 25 प्रतिशत से अधिक शांति सैनिकों को वापस बुलाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। यह बयान ट्रंप के संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने से ठीक पहले आया है।

कटौतियों का दायरा और दावे

एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने पत्रकारों को बताया कि यह कटौती संगठन के 80 साल के इतिहास में पहली बड़ी संरचनात्मक छँटनी है। उन्होंने इसका श्रेय राष्ट्रपति ट्रंप और विदेश मंत्री को दिया। हालाँकि, ब्रीफिंग के दौरान बचत के आँकड़ों, प्रभावित पदों की पूरी सूची और प्रभावित शांति अभियानों का विस्तृत ब्यौरा नहीं दिया गया।

अधिकारी ने कहा, 'हम इसे संयुक्त राष्ट्र को डाइट पर रखना कहते हैं।' उन्होंने इस कदम को संस्था को 'पुनर्जीवित' करने का अभियान बताया और कहा कि इसे 'MUNGA' यानी 'मेक द यूएन ग्रेट अगेन' के रूप में रीब्रांड किया गया है।

प्रशासन का तर्क

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र ने अपने मूल उद्देश्य से परे बहुत अधिक जिम्मेदारियाँ ले ली हैं। अधिकारी के अनुसार, संगठन के संसाधनों को शांति और सुरक्षा पर केंद्रित करना इन कटौतियों का प्राथमिक लक्ष्य है। प्रशासन का तर्क है कि बजट पर सहमति बनाने के लिए व्यापक कूटनीतिक प्रयास और आम सहमति की आवश्यकता थी।

गौरतलब है कि ट्रंप के पहले कार्यकाल में भी अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र की कई एजेंसियों से अपना योगदान वापस लिया था, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर संरचनात्मक कटौती का दावा पहली बार किया जा रहा है।

ट्रंप का महासभा कार्यक्रम

राष्ट्रपति ट्रंप सोमवार दोपहर न्यूयॉर्क पहुँचेंगे और उस शाम ट्रंप टॉवर में राजनीतिक कार्यक्रमों में भाग लेंगे। वह मंगलवार सुबह महासभा को संबोधित करेंगे। उनके कार्यक्रम में ब्रिटिश और जापानी प्रधानमंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें, खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के नेताओं के साथ बहुपक्षीय सत्र और वेनेजुएला के कार्यवाहक राष्ट्रपति से मुलाकात शामिल है।

अधिकारी के अनुसार, ट्रंप के भाषण में शांति समझौतों, चल रही वार्ताओं और उन समस्याओं पर प्रकाश डाला जाएगा जिन्हें प्रशासन का मानना है कि पिछली सरकारों ने टाल दिया था। ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाएँ और गाजा शांति योजना पर प्रगति भी भाषण के प्रमुख विषय होंगे।

व्यापक कूटनीतिक एजेंडा

राष्ट्रपति के कार्यक्रम के अतिरिक्त, अमेरिकी अधिकारियों ने एक व्यापक कूटनीतिक एजेंडे की रूपरेखा भी सामने रखी। इसमें एआई गवर्नेंस, समुद्र के नीचे केबल नेटवर्क, समुद्र तल के खनिज संसाधन और सहायता के बजाय व्यापार पर जोर देने वाली पहलें शामिल हैं।

अधिकारी ने पिछले साल की महासभा बैठक का उल्लेख करते हुए कहा कि तब ट्रंप ने खाड़ी देशों और पाकिस्तान, तुर्की तथा इंडोनेशिया सहित मुस्लिम-बहुल देशों को एक मंच पर लाया था। उन चर्चाओं को बाद में शर्म अल-शेख शांति समझौतों और ट्रंप की 20-सूत्रीय गाजा शांति योजना से जोड़ा गया।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक शांति अभियानों पर वित्तीय दबाव पहले से बढ़ा हुआ है और कई देश संयुक्त राष्ट्र की प्रभावशीलता पर सवाल उठा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि बिना विस्तृत आँकड़ों के किए गए इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना फिलहाल संभव नहीं है। ट्रंप के महासभा संबोधन के बाद इन कटौतियों का पूरा खाका और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया स्पष्ट होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न प्रभावित अभियानों की सूची। 'MUNGA' जैसी रीब्रांडिंग राजनीतिक संदेश के लिहाज से तेज़ है, पर जमीनी असर का पैमाना तब तक अस्पष्ट रहेगा जब तक स्वतंत्र ऑडिट सामने नहीं आता। भारत के नजरिए से यह महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में शीर्ष सैनिक-योगदानकर्ता देशों में है और इन कटौतियों का सीधा असर उन अभियानों पर पड़ सकता है जहाँ भारतीय सैनिक तैनात हैं। महासभा के मंच से ट्रंप के भाषण के बाद वास्तविक कूटनीतिक प्रतिक्रिया ही बताएगी कि यह घोषणा ठोस नीतिगत बदलाव है या चुनावी बयानबाजी।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप प्रशासन ने संयुक्त राष्ट्र बजट में कितनी कटौती की है?
ट्रंप प्रशासन ने दावा किया है कि संयुक्त राष्ट्र के बजट में $1 अरब से अधिक की कटौती की गई है। हालाँकि ब्रीफिंग में इस बचत का विस्तृत आँकड़ा या स्वतंत्र सत्यापन नहीं दिया गया।
यूएन के कितने पद और शांति सैनिक प्रभावित होंगे?
एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के 3,000 पदों में कटौती की जा रही है और दुनिया भर में 25 प्रतिशत से अधिक शांति सैनिकों को वापस भेजा जा रहा है। प्रभावित देशों और अभियानों का पूरा ब्यौरा अभी सामने नहीं आया है।
ट्रंप महासभा में कब और किस विषय पर बोलेंगे?
राष्ट्रपति ट्रंप मंगलवार सुबह संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे। उनके भाषण में शांति समझौतों, ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं और गाजा शांति योजना पर प्रगति के मुद्दे प्रमुखता से उठाए जाने की उम्मीद है।
ट्रंप प्रशासन इन कटौतियों को क्यों जरूरी बता रहा है?
प्रशासन का तर्क है कि संयुक्त राष्ट्र ने अपने मूल उद्देश्य से परे अत्यधिक जिम्मेदारियाँ ले ली हैं। अधिकारियों के अनुसार, संगठन के संसाधनों को शांति और सुरक्षा पर केंद्रित करना इन कटौतियों का लक्ष्य है और इसे संगठन को 'डाइट पर रखना' कहा जा रहा है।
भारत पर इन यूएन बजट कटौतियों का क्या असर हो सकता है?
भारत संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में सबसे बड़े सैनिक-योगदानकर्ता देशों में से एक है। 25% से अधिक शांति सैनिकों की कटौती से उन अभियानों पर असर पड़ सकता है जहाँ भारतीय सेना के जवान तैनात हैं, हालाँकि प्रभावित विशिष्ट अभियानों की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
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