क्या ट्रंप ने लोकतंत्र की आड़ में चाल चली? अमेरिका वेनेजुएला में तेल के खेल को क्यों बदल रहा है?
सारांश
Key Takeaways
- वेनेजुएला का तेल भंडार विश्व का सबसे बड़ा है।
- पेट्रो डॉलर अमेरिकी अर्थव्यवस्था का आधार है।
- अमेरिका ने वेनेजुएला में प्रतिबंध लागू किए हैं।
- डॉलर प्रणाली से अलग होने से वैश्विक व्यापार में बदलाव आ रहा है।
- ट्रंप की नीति ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में तनाव पैदा किया है।
नई दिल्ली, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। वेनेजुएला में अमेरिकी सैनिकों द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर किए गए हमलों ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। वहां के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनकी पत्नी के साथ उठाए जाने की घटना ने सभी को हैरान कर दिया। अमेरिका इस कार्रवाई को ड्रग्स तस्करी के खिलाफ एक उचित कदम बता रहा है। लेकिन साफ है कि अमेरिका ने ड्रग्स की आड़ में वेनेजुएला के तेल पर नियंत्रण पाने की योजना बनाई है। आइए जानते हैं कि अमेरिका वास्तव में वेनेजुएला में क्या कर रहा है और ट्रंप के लिए पेट्रो डॉलर क्यों एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है।
वेनेजुएला एक ऐसा देश है जिसके पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, फिर भी उसकी स्थिति बेहद खराब है। अमेरिका का लक्ष्य सिर्फ वेनेजुएला के तेल भंडार पर नियंत्रण नहीं है, बल्कि पेट्रो डॉलर के लिए जारी जंग में जीत हासिल करना भी है।
पिछले 50 वर्षों से डॉलर का व्यापार जगत में वर्चस्व रहा है, लेकिन अब वैश्विक राजनीति और व्यापार में बदलाव हो रहा है। पहले सभी व्यापार डॉलर में हुआ करते थे, जिससे इसकी वैल्यू बनी रहती थी, लेकिन अब व्यापार का फोकस धीरे-धीरे बदल रहा है, जिसकी शुरुआत वेनेजुएला ने की थी।
पेट्रोडॉलर का मतलब है कि तेल निर्यातक देश अपनी तेल बिक्री अमेरिकी डॉलर में करते हैं। सरल शब्दों में, पेट्रोडॉलर अमेरिकी डॉलर है, जिसका उपयोग विश्व भर के देश कच्चा तेल खरीदने के लिए करते हैं। यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था की नींव है, इसलिए अमेरिका के लिए पेट्रोडॉलर की मांग बनाए रखना आवश्यक है।
अमेरिका ने 14 मार्च 1900 को गोल्ड स्टैंडर्ड एक्ट को मंजूरी दी, जिसके अनुसार 1 अमेरिकी डॉलर की कीमत 90% प्योर गोल्ड के बराबर तय की गई। इस कदम ने अमेरिकी डॉलर को वैश्विक व्यापार में मजबूती दी।
1970 में वियतनाम युद्ध और बढ़ते घाटों के कारण अन्य देशों ने अमेरिका से अपना गोल्ड मांगना शुरू किया, जिससे अमेरिकी डॉलर पर संकट आ गया। इसके समाधान के लिए 1974 में अमेरिका और सऊदी अरब के बीच एक गुप्त समझौता हुआ, जिसमें तय किया गया कि दुनिया में होने वाले सभी तेल व्यापार डॉलर में होंगे।
इस समझौते के बाद, वेनेजुएला पर अमेरिका ने कई प्रतिबंध लगाए, जिससे वेनेजुएला ने रूस और चीन की ओर रुख किया। वेनेजुएला का व्यापार अब डॉलर में नहीं था, जिससे तनाव बढ़ गया।
1976 में वेनेजुएला ने अपने तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण कर दिया, जिससे सभी विदेशी तेल कंपनियों के ऑपरेशन वहां की सरकारी कंपनी पेट्रोलियोस डी वेनेजुएला (पीडीवीएसए) के तहत आ गए।
वेनेजुएला ने 2018 में डॉलर प्रणाली से खुद को अलग करने का ऐलान किया, जिससे अन्य मुद्राओं में व्यापार का रास्ता खुला। चीन और रूस के साथ व्यापार करते हुए वेनेजुएला ने डॉलर पर निर्भरता कम करने की दिशा में कदम बढ़ाया।
अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला किया और मादुरो को सत्ता से हटाया ताकि तेल का व्यापार फिर से डॉलर में हो सके। यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने ऐसा किया है। जब भी किसी देश के शासक ने डॉलर को ठुकराया, उसका अंजाम बुरा हुआ।