ट्रंप का रूस से डीजल सौदा: डेमोक्रेट्स और पत्रकारों ने दोहरे मानदंड पर साधा निशाना
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस से डीजल खरीदने का समझौता करने के बाद वॉशिंगटन में दोहरे मानदंड की बहस तेज हो गई है। कई अमेरिकी पत्रकारों, राजनेताओं और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने सवाल उठाया है कि जब भारत और चीन जैसे देशों को रूसी तेल खरीदने पर आड़े हाथों लिया गया था, तो अब अमेरिका स्वयं यही कदम क्यों उठा रहा है।
समझौते का विवरण और पृष्ठभूमि
ट्रंप ने शुक्रवार को घोषणा की कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अमेरिका और वैश्विक बाज़ारों को लाखों टन डीजल की आपूर्ति करेंगे। इसी के साथ अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने जनरल लाइसेंस 135 जारी करते हुए अप्रैल 2027 तक रूसी डीजल से जुड़े कुछ विशेष लेनदेन पर लगी पाबंदियों में अस्थायी राहत दे दी। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब इससे एक महीने से भी कम पहले ट्रंप ने एक द्विदलीय कानून पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें रूस से तेल और गैस खरीदने वाले बड़े देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का प्रावधान था।
ट्रंप के अनुसार, रूस पहले चरण में तीन लाख टन से अधिक डीजल की आपूर्ति करेगा, इसके बाद नवंबर में पाँच लाख टन और फिर 10 लाख टन अतिरिक्त डीजल भेजा जाएगा। आगे की आपूर्ति रिफाइनरी क्षमता के आधार पर तय होगी।
पत्रकारों और सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया
अमेरिकी पत्रकार कैथरीन रैम्पेल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर तंज कसते हुए लिखा, 'क्या अब हम खुद पर भी टैरिफ लगाने वाले हैं?' राजनीतिक पत्रकार सैम स्टीन ने भी इस विरोधाभास को रेखांकित किया और कहा कि कुछ ही सप्ताह पहले ट्रंप ने रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से एक प्रतिबंध कानून पर हस्ताक्षर किए थे।
वेरिफाइड एक्स अकाउंट 'न्यूज मैट्रिक्स' ने ट्रंप के भारत पर पहले के रुख का हवाला देते हुए सवाल उठाया, 'अगर भारत की ओर से रूसी तेल खरीदना पुतिन के युद्ध को फंड करना है, तो क्या यही तर्क अमेरिका पर भी लागू नहीं होता?' रेडिट पर भी उपयोगकर्ताओं ने नाराज़गी ज़ाहिर की — एक यूजर ने लिखा, 'दूसरों के लिए एक नियम और अपने लिए दूसरा।'
डेमोक्रेट सांसदों की निंदा
डेमोक्रेटिक सीनेटर जीन शाहीन, चक शूमर और एलिज़ाबेथ वॉरेन ने संयुक्त बयान जारी कर प्रशासन द्वारा रूस को छह महीने तक डीजल बेचने की अनुमति देने की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा, 'राष्ट्रपति को ईरान के साथ अपने टकराव को खत्म करना चाहिए, न कि रूस के युद्ध तंत्र को आर्थिक मदद पहुँचानी चाहिए।'
गौरतलब है कि 7 अक्टूबर को सीनेटर जीन शाहीन और रिपब्लिकन सीनेटर रोजर विकर ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो और वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट को पत्र लिखकर रूस के तेल टैंकरों, वित्तीय नेटवर्क और सैन्य तकनीक आपूर्तिकर्ताओं पर और सख्त प्रतिबंध लगाने की माँग की थी। सांसदों का तर्क है कि यह कदम यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस पर दबाव बनाने की अमेरिकी कोशिशों को कमज़ोर कर सकता है और मॉस्को की कमाई बढ़ा सकता है।
ट्रंप की सफाई
ट्रंप ने इस समझौते का बचाव करते हुए कहा कि अमेरिकी उपभोक्ताओं, किसानों और ट्रक चालकों के लिए ईंधन की कीमतें कम करने के मकसद से अतिरिक्त डीजल सप्लाई ज़रूरी है। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने पुतिन को धन्यवाद देते हुए कहा कि अमेरिका को अतिरिक्त डीजल की आवश्यकता है।
आगे क्या होगा
अमेरिकी वित्त मंत्रालय का जनरल लाइसेंस 135 अप्रैल 2027 तक प्रभावी रहेगा। इस बीच, डेमोक्रेट और कुछ रिपब्लिकन सीनेटरों का दबाव बनता जा रहा है कि प्रशासन रूस पर प्रतिबंधों को कमज़ोर न पड़ने दे। यह देखना बाकी है कि क्या ट्रंप प्रशासन इस नीतिगत विरोधाभास को सुलझा पाएगा या यह विवाद और गहरा होगा।