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क्या 'दित्वाह' के बाद श्रीलंका में भारतीय सेना का ऑपरेशन 'सागर बंधु' अब भी जारी है?

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क्या 'दित्वाह' के बाद श्रीलंका में भारतीय सेना का ऑपरेशन 'सागर बंधु' अब भी जारी है?

सारांश

कोलंबो में आए तूफान दित्वाह ने जबरदस्त तबाही मचाई। भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन सागर बंधु' के तहत रेस्क्यू कार्य जारी रखा है। स्थानीय लोगों ने सेना के प्रयासों के लिए आभार व्यक्त किया है। जानिए इस संकट में भारत का योगदान।

मुख्य बातें

ऑपरेशन सागर बंधु का उद्देश्य श्रीलंका की मदद करना है।
भारतीय सेना की इंजीनियर टास्क फोर्स ने महत्वपूर्ण कार्य किया है।
स्थानीय लोगों ने सेना के प्रयासों के लिए आभार व्यक्त किया है।
भारत का मानवता के प्रति समर्पण एक महत्वपूर्ण पहलू है।
तूफान दित्वाह ने गंभीर नुकसान पहुँचाया है।

कोलंबो, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। श्रीलंका में आए तूफान दित्वाह ने भयंकर तबाही फैलाई है। इस संकट से उबरने और प्रभावित लोगों की सहायता के लिए भारत सरकार ने ऑपरेशन सागर बंधु की शुरुआत की है। इस ऑपरेशन के तहत भारतीय सेना की इंजीनियर टास्क फोर्स बी-492 का मरम्मत कार्य लगातार चल रहा है।

यह बी-492 मार्ग कैंडी को उवा प्रांत के बादुल्ला से जोड़ता है, जो दित्वाह से गंभीर रूप से प्रभावित हुआ था। भारतीय सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें एक स्कूल की छात्रा ने कहा, "आपने हमारे लिए जो सेवा की है, उसके लिए हम वास्तव में आपके आभारी हैं, खासकर भारत से इतनी दूर आने के लिए।"

वीडियो में छात्रा ने आगे कहा, "खराब पुल के कारण हमारे पास यहाँ आने का कोई रास्ता नहीं था। हम सभी के लिए बहुत आभारी हैं कि आप आए और हमारे लिए यह कार्य किया। आपकी मदद के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।"

सेना ने 'एक्स' पर वीडियो और इमेज साझा करते हुए कहा, "भारतीय सेना की इंजीनियर टास्क फोर्स कैंडी को उवा प्रांत के बादुल्ला से जोड़ने वाले बी-492 पर जरूरी रोड कनेक्टिविटी को ठीक करने में लगी हुई है, जो तूफान दित्वाह से बुरी तरह प्रभावित हुआ था।"

इसमें आगे कहा गया, "15 किलोमीटर और 21 किलोमीटर पर बेली ब्रिज के तेजी से निर्माण के जरिए टास्क फोर्स ने समुदाय को फिर से जोड़ा है, यात्रा का समय कम किया है और श्रीलंकाई लोगों के साथ रिश्तों को मजबूत किया है।"

पिछले साल नवंबर 2025 में भारत ने खतरनाक तूफान दित्वाह के तुरंत बाद फर्स्ट रेस्पॉन्डर के तौर पर ऑपरेशन सागर बंधु शुरू किया था, ताकि श्रीलंका को तुरंत मानवीय सहायता तथा आपदा राहत (एचएडीआर) समर्थन प्रदान किया जा सके।

दित्वाह के कारण पूरे श्रीलंका में बड़े पैमाने पर बाढ़, भूमिस्खलन और इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान हुआ, जिससे देश के आपदा-प्रतिक्रिया प्रणाली पर असर पड़ा।

भारतीय नौसेना के जहाज आईएनएस विक्रांत और आईएनएस उदयगिरी इमरजेंसी में रिस्पॉन्ड करने वाले पहले विदेशी जहाजों में शामिल थे। जब तूफान आया, तब दोनों युद्धपोत श्रीलंकाई नौसेना की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2025 के लिए पहले से ही श्रीलंका में उपस्थित थे।

पिछले साल 27 नवंबर को तूफान के लैंडफॉल के बाद जहाजों को एचएडीआर ऑपरेशन के लिए फिर से तैनात किया गया। ऑपरेशन सागर बंधु के तहत भारतीय सेना ने दित्वाह तूफान से हुई तबाही के बाद श्रीलंका में जरूरी कनेक्टिविटी को ठीक करने के प्रयास तेज कर दिए।

भारतीय सेना ने श्रीलंका के कैंडी जिले के पास महियांगनया में एक फील्ड हॉस्पिटल भी स्थापित किया और इलाके में आवश्यक मेडिकल जरूरतों को पूरा किया। भारत के एचएडीआर प्रयासों के तहत, इस तैनाती ने ट्रॉमा मैनेजमेंट, सर्जरी और सामान्य मेडिकल इलाज जैसे जीवन रक्षक देखभाल प्रदान की, जिससे रोजाना लगभग 1,000 से 1,200 मरीजों को लाभ हुआ।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भी मजबूत किया है। यह भारत की मानवता के प्रति समर्पण का एक उदाहरण है।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑपरेशन सागर बंधु क्या है?
ऑपरेशन सागर बंधु भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया एक मानवीय सहायता और आपदा राहत मिशन है, जिसका उद्देश्य श्रीलंका में दित्वाह तूफान से प्रभावित लोगों की मदद करना है।
तूफान दित्वाह ने श्रीलंका में क्या नुकसान पहुँचाया?
तूफान दित्वाह ने पूरे श्रीलंका में बड़े पैमाने पर बाढ़, भूमिस्खलन और इन्फ्रास्ट्रक्चर को गंभीर नुकसान पहुँचाया।
भारतीय सेना ने श्रीलंका में क्या किया?
भारतीय सेना ने ऑपरेशन सागर बंधु के तहत श्रीलंका में आवश्यक कनेक्टिविटी को ठीक करने के लिए कार्य किया और एक फील्ड हॉस्पिटल भी स्थापित किया।
राष्ट्र प्रेस
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