24 अक्टूबर 2026
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ईरान की अमेरिकी अधिकारियों पर साजिशें अंतिम चरण में: खुफिया प्रमुख की रुबियो को चेतावनी

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ईरान की अमेरिकी अधिकारियों पर साजिशें अंतिम चरण में: खुफिया प्रमुख की रुबियो को चेतावनी

सारांश

अमेरिका के खुफिया प्रमुख की चेतावनी और मध्य पूर्व से राजनयिकों की वापसी — यह महज़ एहतियाती कदम नहीं, बल्कि ईरान अमेरिका तनाव का एक नया और खतरनाक मोड़ है। जानलेवा साजिशों के 'अंतिम चरण' में होने की खुफिया पुष्टि और ट्रंप की सैन्य कार्रवाई की खुली धमकी के बीच क्षेत्र में बड़े टकराव की आशंका गहराती जा रही है।

मुख्य बातें

नेशनल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर जे क्लेटन ने 23 अक्टूबर 2026 को विदेश मंत्री मार्को रुबियो को अनक्लासिफाइड मेमो के ज़रिए ईरानी साजिशों की चेतावनी दी।
मेमो की एक प्रति सीआईए डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ को भी भेजी गई; जानलेवा साजिशें मध्य पूर्व में अंतिम चरण में बताई गईं।
अमेरिका ने सऊदी अरब (रियाद, जेद्दा, दहरान), यूएई , लेबनान , कतर , जॉर्डन , बहरीन और कुवैत के दूतावासों से गैर ज़रूरी कर्मचारी वापस बुलाए।
राजनयिकों ने वापसी की प्रक्रिया को 'अराजक' बताया; स्टेट डिपार्टमेंट ने कहा वापसी का आदेश 'केवल सऊदी अरब' के लिए।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्लोरिडा रैली में ईरान पर एक और सैन्य ऑपरेशन का संकेत दिया।

अमेरिका के नेशनल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर जे क्लेटन ने 23 अक्टूबर 2026 को विदेश मंत्री मार्को रुबियो को एक अनक्लासिफाइड मेमो के ज़रिए आगाह किया है कि ईरान ने अमेरिकी अधिकारियों को निशाना बनाने की कोशिशें काफी तेज़ कर दी हैं और कुछ जानलेवा साजिशें मध्य पूर्व तथा अन्य देशों में अपने अंतिम चरण तक पहुँच चुकी हैं। इस चेतावनी के बाद वाशिंगटन ने सऊदी अरब समेत कई देशों में अपने दूतावासों से गैर ज़रूरी कर्मचारियों को वापस बुला लिया है।

मेमो में क्या है

रिपोर्टों के अनुसार, एक पन्ने के इस अनक्लासिफाइड मेमो की एक प्रति सीआईए डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ को भी भेजी गई थी। मेमो में स्पष्ट किया गया है कि जानलेवा साजिशें मध्य पूर्व और कुछ अन्य देशों में काफी आगे के चरण तक पहुँच चुकी हैं, हालाँकि मेमो में लक्षित व्यक्तियों या देशों के नाम नहीं बताए गए हैं और न ही साजिशों के स्वरूप का ब्यौरा दिया गया है।

यह खुफिया जानकारी पहले ही स्टेट डिपार्टमेंट के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ साझा की जा चुकी थी। डायरेक्टर क्लेटन ने इसे और अधिक कर्मियों तक पहुँचाने के लिए इसके क्लासिफिकेशन स्तर को कम करने का प्रस्ताव दिया। एक अमेरिकी अधिकारी ने इस मेमो के अस्तित्व की पुष्टि की है।

दूतावासों में कर्मचारियों की वापसी

इस हफ्ते की शुरुआत में विदेश विभाग ने रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास और जेद्दा तथा दहरान के वाणिज्य दूतावासों से गैर ज़रूरी कर्मचारियों को वापस बुलाने का आदेश दिया। इसके बाद शुक्रवार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), लेबनान, कतर और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी दूतावासों में भी स्टाफ की संख्या कम की गई।

रिपोर्टों के मुताबिक यह कटौती बहरीन और कुवैत तक भी पहुँच गई है। सूत्रों के अनुसार राजनयिकों ने इस पूरी प्रक्रिया को "अराजक" बताया है। स्टेट डिपार्टमेंट के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर कहा कि वापसी का आदेश "केवल सऊदी अरब" के लिए लागू है।

अधिकारियों की प्रतिक्रिया

एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा, "जब दूतावासों में हमारे स्टाफ की बात आती है, तो हम सुरक्षा माहौल के बारे में नई जानकारी का लगातार आकलन करते रहते हैं। हूती हमलों का खतरा और अमेरिकी अधिकारियों को निशाना बनाने की ईरानी आतंकी साजिशें, इस क्षेत्र में 'आरओ स्टेटस' (सीमित परिचालन स्थिति) वाले दूतावासों में स्टाफ की संख्या में बदलाव करने के हमारे फैसलों को प्रभावित कर रही हैं।"

यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी सेना, रिपोर्टों के अनुसार, मध्य पूर्व में अपने ठिकानों पर चुपचाप सैनिकों की तैनाती भी कम कर रही है।

ट्रंप की सैन्य चेतावनी

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को फ्लोरिडा में एक रैली को संबोधित करते हुए सैन्य विकल्प खुला रखने का संकेत दिया। उन्होंने कहा, "हम शायद एक और छोटा 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' चलाएं, या फिर ईरानी मान जाएं।" यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में कूटनीतिक और सुरक्षा तनाव एक साथ बढ़ रहे हैं।

गौरतलब है कि यह स्थिति अमेरिका ईरान संबंधों में एक नई और गंभीर परत जोड़ती है। आने वाले दिनों में वाशिंगटन के अगले कदम और क्षेत्रीय दूतावासों की सुरक्षा व्यवस्था पर सभी की नज़रें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो बताता है कि अमेरिकी नीति अभी भी दो रास्तों के बीच उलझी है। असली सवाल यह है कि क्या यह सार्वजनिक चेतावनी ईरान को कूटनीतिक मेज़ पर लाने की कोशिश है, या फिर किसी बड़े कदम से पहले की तैयारी।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिकी खुफिया प्रमुख ने ईरान के बारे में क्या चेतावनी दी है?
नेशनल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर जे क्लेटन ने 23 अक्टूबर 2026 को विदेश मंत्री मार्को रुबियो को एक अनक्लासिफाइड मेमो में आगाह किया कि ईरान ने अमेरिकी अधिकारियों को निशाना बनाने की कोशिशें काफी तेज़ कर दी हैं। कुछ जानलेवा साजिशें मध्य पूर्व और अन्य देशों में अपने अंतिम चरण तक पहुँच चुकी हैं।
अमेरिका ने किन देशों से अपने राजनयिक वापस बुलाए हैं?
अमेरिका ने सऊदी अरब (रियाद, जेद्दा, दहरान), यूएई, लेबनान, कतर, जॉर्डन, बहरीन और कुवैत स्थित दूतावासों से गैर ज़रूरी कर्मचारियों को वापस बुलाया है। स्टेट डिपार्टमेंट के प्रवक्ता ने हालाँकि कहा कि औपचारिक वापसी का आदेश केवल सऊदी अरब के लिए है।
इस मेमो में लक्षित व्यक्तियों या देशों के नाम क्यों नहीं बताए गए?
रिपोर्टों के अनुसार, मेमो में न तो निशाना बनाए जाने वाले व्यक्तियों के नाम हैं और न ही साजिशों के स्वरूप का ब्यौरा दिया गया है। डायरेक्टर क्लेटन का उद्देश्य इसे अधिक स्टाफ तक पहुँचाने के लिए इसके क्लासिफिकेशन स्तर को कम करना था, ताकि व्यापक सतर्कता सुनिश्चित की जा सके।
राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर क्या कहा?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्लोरिडा में एक रैली में कहा कि 'हम शायद एक और छोटा ऑपरेशन एपिक फ्यूरी चलाएं, या फिर ईरानी मान जाएं।' इस बयान ने मध्य पूर्व में तनाव के बीच सैन्य विकल्प को खुला रखने का स्पष्ट संकेत दिया।
मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति में क्या बदलाव हो रहे हैं?
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना मध्य पूर्व में स्थित अपने ठिकानों पर चुपचाप सैनिकों की संख्या भी कम कर रही है। यह जानकारी 21 अक्टूबर 2026 को सामने आई थी और दूतावासों में कर्मचारियों की कटौती के साथ मिलकर क्षेत्र में अमेरिकी उपस्थिति में व्यापक बदलाव का संकेत देती है।
राष्ट्र प्रेस
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