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आईसीसी पर अमेरिकी प्रतिबंध: यूएन महासचिव गुटेरेस की कड़ी चिंता, 8 देशों ने जताया विरोध

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आईसीसी पर अमेरिकी प्रतिबंध: यूएन महासचिव गुटेरेस की कड़ी चिंता, 8 देशों ने जताया विरोध

सारांश

अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय पर वित्तीय प्रतिबंध लगाए — और जवाब में यूएन महासचिव गुटेरेस सहित आठ पश्चिमी देशों ने एकजुट होकर विरोध जताया। यह टकराव बहुपक्षीय न्याय व्यवस्था बनाम अमेरिकी एकतरफावाद की बड़ी लड़ाई की एक नई कड़ी है।

मुख्य बातें

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 10 अक्टूबर 2026 को आईसीसी पर वित्तीय प्रतिबंध लगाने की घोषणा की।
यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इसे 'अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्याय की सामूहिक कोशिशों के लिए बड़ा झटका' बताया।
कनाडा, डेनमार्क, जर्मनी, फ्रांस, इटली, जापान, नीदरलैंड और ब्रिटेन ने संयुक्त बयान जारी कर अमेरिकी कदम की कड़ी निंदा की।
आठ देशों ने रोम संविधि के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और आईसीसी की स्वतंत्रता का समर्थन किया।
दिसंबर 2026 में होने वाली स्टेट्स पार्टीज की बैठक में आगे की रणनीति तय होने की उम्मीद है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और कनाडा, डेनमार्क, जर्मनी, फ्रांस, इटली, जापान, नीदरलैंड तथा ब्रिटेन के विदेश मंत्रियों ने शुक्रवार, 10 अक्टूबर 2026 को अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (आईसीसी) पर अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों की कड़े शब्दों में आलोचना की। गुटेरेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि ये प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्याय की सामूहिक कोशिशों के लिए एक बड़ा झटका हैं।

अमेरिकी प्रतिबंधों का स्वरूप

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने शुक्रवार को ही आईसीसी पर प्रतिबंधों की घोषणा की। इन कदमों के तहत अदालत के साथ वित्तीय लेन-देन पर रोक लगाई जाएगी, उसके संसाधनों को सीमित किया जाएगा और उसकी काम करने की क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित किया जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब आईसीसी कई संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मामलों की जाँच में सक्रिय है।

यूएन महासचिव की प्रतिक्रिया

प्रवक्ता दुजारिक ने कहा, 'महासचिव इस बात को लेकर बेहद चिंतित हैं कि आज लगाए गए प्रतिबंधों का असर पूरे आईसीसी पर पड़ेगा — खास तौर पर अदालत की उन महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर, जिन्हें उसे सुरक्षा परिषद और रोम संविधि के सदस्य देशों की ओर से सौंपा गया है।' उन्होंने यह भी कहा कि गुटेरेस ने आईसीसी और उसके अधिकारियों की स्वतंत्रता के प्रति अपना अटूट समर्थन दोहराया और सभी देशों से अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपनी जिम्मेदारियों का पालन करने की अपील की।

आठ देशों का संयुक्त विरोध

कनाडा, डेनमार्क, जर्मनी, फ्रांस, इटली, जापान, नीदरलैंड और ब्रिटेन के विदेश मंत्रियों ने एक संयुक्त बयान जारी कर अमेरिकी प्रतिबंधों पर खेद जताया और कड़ा विरोध दर्ज कराया। संयुक्त बयान में कहा गया, 'हम आईसीसी की रोम संविधि के हस्ताक्षरकर्ता देश, अदालत की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और ईमानदारी के प्रति अपने निरंतर और अटूट समर्थन की फिर से पुष्टि करते हैं।' गौरतलब है कि अमेरिका रोम संविधि का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है, और उसने पहले भी आईसीसी की कार्यवाहियों पर आपत्ति जताई है।

आगे की कूटनीतिक राह

इन आठ देशों ने यह भी स्पष्ट किया कि वे दिसंबर 2026 में होने वाली स्टेट्स पार्टीज की बैठक की तैयारी के दौरान गैर-सदस्य देशों के साथ रचनात्मक और समावेशी संवाद जारी रखेंगे। यह कदम इस बात का संकेत है कि पश्चिमी सहयोगी देश अमेरिकी दबाव के बावजूद आईसीसी के इर्द-गिर्द एकजुटता बनाए रखने के लिए प्रयासरत हैं।

अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था पर असर

आलोचकों का कहना है कि अमेरिकी प्रतिबंध आईसीसी की वित्तीय और परिचालन क्षमता को कमज़ोर कर सकते हैं, जिससे चल रही जाँचें और पीड़ितों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया बाधित हो सकती है। दुजारिक ने इसे 'अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्याय की सामूहिक कोशिशों के लिए बड़ा झटका' करार दिया। यह घटनाक्रम वैश्विक बहुपक्षीय संस्थाओं पर अमेरिका के बदलते रवैये की व्यापक तस्वीर का हिस्सा है, और आने वाले हफ्तों में कूटनीतिक तनाव और गहरा होने की आशंका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या ये देश आईसीसी को वित्तीय और परिचालन सहायता देने के लिए ठोस कदम उठाएँगे। गौरतलब है कि अमेरिकी दबाव में पहले भी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ झुकती रही हैं। दिसंबर 2026 की स्टेट्स पार्टीज बैठक यह तय करेगी कि बहुपक्षीय न्याय व्यवस्था इस चुनौती का सामना कर सकती है या नहीं।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईसीसी पर अमेरिकी प्रतिबंध क्या हैं?
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा 10 अक्टूबर 2026 को घोषित इन प्रतिबंधों के तहत आईसीसी के साथ वित्तीय लेन-देन पर रोक लगाई जाएगी, उसके संसाधन सीमित किए जाएँगे और उसकी काम करने की क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित किया जाएगा।
यूएन महासचिव गुटेरेस ने क्या कहा?
यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इन प्रतिबंधों को 'अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्याय की सामूहिक कोशिशों के लिए बड़ा झटका' बताया। उनके प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि गुटेरेस विशेष रूप से उन जिम्मेदारियों पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंतित हैं जो सुरक्षा परिषद और रोम संविधि सदस्य देशों ने आईसीसी को सौंपी हैं।
किन आठ देशों ने अमेरिकी प्रतिबंधों का विरोध किया?
कनाडा, डेनमार्क, जर्मनी, फ्रांस, इटली, जापान, नीदरलैंड और ब्रिटेन के विदेश मंत्रियों ने संयुक्त बयान जारी कर अमेरिकी कदम पर खेद जताया और आईसीसी की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और ईमानदारी के प्रति अपना अटूट समर्थन दोहराया।
आगे क्या होगा — दिसंबर 2026 की बैठक क्यों अहम है?
इन आठ देशों ने कहा है कि वे दिसंबर 2026 में होने वाली स्टेट्स पार्टीज की बैठक की तैयारी के दौरान गैर-सदस्य देशों के साथ रचनात्मक संवाद जारी रखेंगे। यह बैठक आईसीसी की भविष्य की रणनीति और अमेरिकी दबाव से निपटने के तरीकों को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय कर सकती है।
क्या अमेरिका पहले भी आईसीसी के खिलाफ कदम उठा चुका है?
हाँ, अमेरिका रोम संविधि का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है और उसने पहले भी आईसीसी के अधिकारियों पर पाबंदियाँ लगाई हैं। यह नया प्रतिबंध उसी नीति की अगली कड़ी माना जा रहा है, जो बहुपक्षीय न्याय संस्थाओं के प्रति अमेरिका के संशय को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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