वांग यी की यूरेशिया यात्रा: शांति, मित्रता, सहयोग और साझेदारी पर चार अहम विचार
सारांश
मुख्य बातें
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने 20 अक्टूबर 2026 को सोफिया में बुल्गारिया की विदेश मंत्री वेलिस्लावा पेत्रोवा के साथ आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी यूरेशिया यात्रा पर चार प्रमुख विचार सार्वजनिक किए। राष्ट्रपति शी चिनफिंग के विशेष प्रतिनिधि के रूप में यह दौरा एशिया में संवाद एवं विश्वास निर्माण उपायों पर सम्मेलन (सीआईसीए) के शिखर सम्मेलन में भागीदारी और अजरबैजान, क्रोएशिया, मोंटेनेग्रो एवं बुल्गारिया के राजनयिक दौरे को समेटे रहा।
पहला विचार: विश्वास शांति की आधारशिला है
वांग यी ने कहा कि सभी पक्षों के लिए चीन का स्पष्ट संदेश है — दृढ़ विश्वास, संवाद और परामर्श, आपसी समझ और सामंजस्य के ज़रिए शांति का निर्माण। उन्होंने रेखांकित किया कि चीन हमेशा इतिहास के सही पक्ष में खड़ा रहेगा, एक प्रमुख शक्ति की ज़िम्मेदारी निभाएगा और विश्वास की कमी को दूर करने तथा संकटों व संघर्षों के समाधान में अपनी भूमिका अदा करेगा।
दूसरा विचार: मित्रता एक अनमोल संपत्ति है
वांग यी के अनुसार, चीन और इन चारों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध समय और दूरी की सीमाओं को पार करते हुए प्राचीन रेशम मार्ग की भावना की निरंतरता को दर्शाते हैं। उन्होंने ज़ोर दिया कि यूरेशिया की विभिन्न सभ्यताओं के बीच इन अनमोल मित्रताओं को समकालीन संदर्भ में नया अर्थ देकर निरंतर प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
तीसरा विचार: सहयोग एक मजबूत प्रेरक शक्ति है
वांग यी ने बताया कि चीन इन चारों देशों के साथ व्यापार, निवेश और अवसंरचना जैसे पारंपरिक क्षेत्रों में सहयोग को और सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही, बेल्ट एंड रोड पहल और मध्य गलियारे के साथ सक्रिय तालमेल बिठाते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और हरित परिवर्तन जैसी नई उत्पादक शक्तियों में सहयोग को नई गति देने की भी बात कही गई।
चौथा विचार: साझेदारी एक साझा लक्ष्य है
वांग यी ने यूरोपीय संघ (EU) के साथ बहुपक्षवाद और मुक्त व्यापार के मार्ग पर चलने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि चीन और मध्य एवं पूर्वी यूरोपीय देशों के बीच सहयोग की 15वीं वर्षगांठ अगले वर्ष आने वाली है, जिसे इस क्षेत्र के देशों के साथ मिलकर सहयोग को नए स्तर पर ले जाने के अवसर के रूप में देखा जाएगा। यह साझेदारी यूरोपीय एकीकरण के लिए एक महत्वपूर्ण तंत्र भी मानी जाती है।
यात्रा का रणनीतिक महत्व
गौरतलब है कि यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव बढ़े हुए हैं और चीन यूरोप के साथ अपने संबंधों को नए सिरे से परिभाषित करने की कोशिश में है। सीआईसीए शिखर सम्मेलन में भागीदारी के साथ-साथ इन चार देशों के साथ द्विपक्षीय बैठकें चीन की व्यापक कूटनीतिक सक्रियता का हिस्सा हैं। आने वाले महीनों में इन विचारों को व्यावहारिक रूप देने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे, इस पर सभी की नज़रें टिकी रहेंगी।