वांग यी की लाओस और बेल्जियम के विदेश मंत्रियों से पेइचिंग में अहम बैठक, द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा
सारांश
Key Takeaways
चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने 30 अप्रैल 2026 को राजधानी पेइचिंग में लाओस के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री थोंगसावन फोमविहाने तथा बेल्जियम के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री मैक्सिम प्रीवोट से अलग-अलग मुलाकात की। इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ करने, व्यापार सहयोग बढ़ाने और बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय को मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा हुई।
चीन-लाओस: 65 वर्षों की मित्रता का उत्सव
वांग यी ने थोंगसावन फोमविहाने की पेइचिंग यात्रा का विशेष स्वागत किया। यह यात्रा चीन और लाओस के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 65वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित स्वागत समारोह में भाग लेने के लिए हुई। वांग यी ने कहा कि चीन और लाओस केवल पड़ोसी नहीं, बल्कि साथी और भाई हैं, जिनके बीच दीर्घकालिक पारंपरिक मित्रता और घनिष्ठ संबंध सभी स्तरों पर कायम हैं।
बैठक में चीन-लाओस रेलवे निर्माण, खनिज संसाधनों के दोहन, व्यापार एवं आर्थिक सहयोग और मानव संसाधन विकास जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई गई। इसके साथ ही आसियान जैसे बहुपक्षीय ढाँचों के भीतर दोनों देशों के समन्वय को और गहरा करने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की गई।
चीन-बेल्जियम: 55 वर्षों की साझेदारी और यूरोपीय भूमिका
वांग यी ने बेल्जियम के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री मैक्सिम प्रीवोट के साथ बातचीत में कहा कि इस वर्ष चीन और बेल्जियम के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 55वीं वर्षगांठ है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के नेताओं के मार्गदर्शन में द्विपक्षीय संबंधों में स्थिर और ठोस विकास हुआ है तथा एक व्यापक मैत्रीपूर्ण सहयोगात्मक साझेदारी स्थापित की गई है।
वांग यी ने रेखांकित किया कि बेल्जियम यूरोपीय संघ के मुख्यालय का स्थल होने के नाते चीन-यूरोप सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार है। उन्होंने उम्मीद जताई कि बेल्जियम यूरोपीय संघ के भीतर सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका निभाएगा तथा व्यापार एवं आर्थिक मतभेदों को संवाद के माध्यम से सुलझाने में योगदान देगा।
खुलेपन और सहयोग पर ज़ोर
वांग यी ने दोनों बैठकों में खुलेपन और सहयोग की नीति को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने यूरोपीय संघ और चीन के बीच संवाद एवं परामर्श को बढ़ावा देकर पारस्परिक लाभ और व्यापक-जीत परिणाम प्राप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया। गौरतलब है कि यह बैठकें ऐसे समय में हुई हैं जब वैश्विक व्यापार तनाव और बहुपक्षीय कूटनीति पर दबाव बढ़ रहा है।
आगे क्या
इन बैठकों से चीन की उस व्यापक कूटनीतिक सक्रियता का संकेत मिलता है जो वह एशिया और यूरोप दोनों दिशाओं में एक साथ अपना रहा है। चीन-लाओस रेलवे जैसी परियोजनाओं की प्रगति और चीन-यूरोप व्यापार वार्ताओं का भविष्य इन बैठकों के नतीजों पर काफी हद तक निर्भर करेगा।
(साभार: चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)