शी चिनफिंग का लेख 'छ्यूशी जर्नल' में प्रकाशित: भविष्य के उद्योगों पर चीन की रणनीतिक दिशा
सारांश
मुख्य बातें
चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग का 'भविष्योन्मुखी योजना और भविष्य के उद्योगों का विकास' शीर्षक लेख 1 जून को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) केंद्रीय समिति की प्रमुख पत्रिका 'छ्यूशी जर्नल' के इस वर्ष के 11वें अंक में प्रकाशित होगा। यह लेख क्वांटम प्रौद्योगिकी, जैव-विनिर्माण और उच्च-तकनीकी उद्यमों को केंद्र में रखते हुए चीन की दीर्घकालिक औद्योगिक रणनीति की रूपरेखा प्रस्तुत करता है।
मुख्य संदेश: भविष्य के उद्योगों का महत्व
लेख में रेखांकित किया गया है कि भविष्य के उद्योगों का विकास और पोषण विज्ञान, प्रौद्योगिकी और उद्योग में अग्रणी स्थान सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। शी के अनुसार, यह केवल आर्थिक विकास का प्रश्न नहीं, बल्कि लोगों के सर्वांगीण विकास और समाज की समग्र प्रगति से सीधे जुड़ा विषय है। लेख में नई गुणवत्ता वाली उत्पादक शक्तियों को विकसित करने और आधुनिक औद्योगिक प्रणाली के निर्माण पर विशेष बल दिया गया है।
रणनीतिक योजना और समन्वय पर ज़ोर
लेख के अनुसार, भविष्य के उद्योग दूरदर्शी, रणनीतिक और परिवर्तनकारी प्रकृति के होते हैं, इसलिए इनके विकास के लिए वैज्ञानिक योजना और प्रभावी समन्वय अनिवार्य है। विशेष रूप से क्वांटम प्रौद्योगिकी और जैव-विनिर्माण जैसे उभरते क्षेत्रों में विकास की दिशा को सही ढंग से समझते हुए लक्षित नीतियाँ लागू करने की आवश्यकता बताई गई है। गौरतलब है कि सीपीसी केंद्रीय समिति ने हाल के वर्षों में इस क्षेत्र में रणनीतिक योजना को मजबूत करने और नीतिगत समर्थन बढ़ाने के प्रयास किए हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
तकनीकी नवाचार और उद्यमों की भूमिका
लेख में तकनीकी नवाचार को भविष्य के उद्योगों का प्रमुख आधार बताया गया है। शी के अनुसार, प्रमुख क्षेत्रों में मूलभूत प्रौद्योगिकियों के विकास को तेज करना, बुनियादी अनुसंधान को प्रोत्साहन देना और वैज्ञानिक उपलब्धियों के औद्योगिक रूपांतरण में तेजी लाना आवश्यक है। इसके साथ ही लेख में उद्यमों को नवाचार का प्रमुख वाहक बताते हुए कहा गया है कि विभिन्न नवाचार संसाधनों को उद्यमों की ओर केंद्रित किया जाना चाहिए और उच्च-तकनीकी कंपनियों को सक्रिय रूप से विकसित किया जाना चाहिए।
नीतिगत वातावरण और शासन सुधार
लेख में राजकोषीय और कर नीतियों में सुधार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी वित्त के विकास और सरकारी खरीद नीतियों के अनुकूलन की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया है। प्रतिभाओं की भर्ती, विकास और उपयोग की व्यवस्था में सुधार कर नवाचार और उद्यमिता के लिए उनकी क्षमता को प्रोत्साहित करने की बात भी कही गई है। इसके अलावा, प्रौद्योगिकी निगरानी, जोखिम चेतावनी और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को सुदृढ़ करने पर भी बल दिया गया है।
नेतृत्व क्षमता और आगे की राह
लेख में यह भी स्वीकार किया गया है कि भविष्य के उद्योगों में तकनीकी परिवर्तन की गति बहुत तेज होगी और निर्णय लेने के जोखिम अधिक होंगे। इसीलिए सभी स्तरों के अधिकारियों से अत्याधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी संबंधी ज्ञान का गंभीरता से अध्ययन करने और अपनी पेशेवर क्षमता बढ़ाने का आह्वान किया गया है। यह लेख ऐसे समय में आया है जब चीन और अमेरिका के बीच तकनीकी प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है और वैश्विक औद्योगिक पुनर्गठन की प्रक्रिया जारी है।