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लसोड़ा (इंडियन चेरी): प्रोटीन, आयरन और कैल्शियम से भरपूर जंगली फल

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लसोड़ा (इंडियन चेरी): प्रोटीन, आयरन और कैल्शियम से भरपूर जंगली फल

सारांश

लसोड़ा या इंडियन चेरी प्रकृति का एक अमूल्य उपहार है जो प्रोटीन, आयरन और कैल्शियम से भरपूर है। इस जंगली फल के नियमित सेवन से पाचन में सुधार, रक्ताल्पता दूर करने और हड्डियों को मजबूत करने में मदद मिलती है।

मुख्य बातें

लसोड़ा (गोंदी) को 'इंडियन चेरी' कहा जाता है, जिसका वैज्ञानिक नाम कॉर्डिया डाइकोटोमा है।
यह 10 से 20 मीटर ऊंचा पर्णपाती वृक्ष है जो तेजी से बढ़ता है।
इसमें प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, फॉस्फोरस, जिंक और आयरन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
पके फल का स्वाद मीठा है; कच्चे फल का गूदा परंपरागत गोंद के रूप में इस्तेमाल होता है।
उच्च फाइबर से पाचन मजबूत होता है, आयरन से एनीमिया दूर होता है, कैल्शियम से हड्डियाँ मजबूत होती हैं।
आयुर्वेद में इसके पत्ते और बीज औषधीय उपयोग में आते हैं।

नई दिल्ली, 10 मई। आधुनिक जीवनशैली में तेजी से बढ़ते खान-पान की अनियमितता के बीच प्रकृति कई ऐसे पोषक फल प्रदान करती है जो स्वास्थ्य के लिए संपूर्ण भोजन का काम करते हैं। ऐसा ही एक फल है लसोड़ा (जिसे गोंदी भी कहते हैं), जिसे 'इंडियन चेरी' के नाम से जाना जाता है। बिहार वन एवं पर्यावरण विभाग ने इस वृक्ष के व्यापक स्वास्थ्य लाभों और पर्यावरणीय महत्व को रेखांकित किया है।

लसोड़ा का परिचय और पोषक संरचना

लसोड़ा एक तेजी से बढ़ने वाला पर्णपाती वृक्ष है, जिसकी वैज्ञानिक नाम कॉर्डिया डाइकोटोमा है। यह आमतौर पर 10 से 20 मीटर तक ऊंचाई तक पहुँचता है। इसके फल, पत्ते और बीज सभी औषधीय गुणों से संपन्न होते हैं। फल में प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, फॉस्फोरस, जिंक और आयरन जैसे आवश्यक पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।

स्वाद और पाक उपयोग

पके हुए लसोड़े का स्वाद मीठा और स्वादिष्ट होता है, जबकि कच्चे फलों का गूदा परंपरागत रूप से गोंद के विकल्प के रूप में इस्तेमाल होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी सब्जी तैयार की जाती है और स्वादिष्ट अचार भी बनाए जाते हैं। गर्मियों के मौसम में यह आसानी से उपलब्ध हो जाता है, और इसे ताजा, अचार, चटनी या सब्जी के रूप में सेवन किया जा सकता है।

पाचन और रक्त स्वास्थ्य में लाभ

लसोड़ा में उच्च फाइबर सामग्री पाचन तंत्र को सशक्त बनाती है और कब्ज की समस्या से राहत प्रदान करती है। इसमें मौजूद आयरन की अच्छी मात्रा रक्ताल्पता (एनीमिया) को दूर करने में सहायक है। यह विशेषकर उन लोगों के लिए लाभकारी है जो प्राकृतिक स्रोतों से आयरन की पूर्ति करना चाहते हैं।

हड्डियों और प्रतिरक्षा में मजबूती

इसमें पाया जाने वाला कैल्शियम और फॉस्फोरस हड्डियों को मजबूत और घनत्व बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साथ ही, लसोड़े में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को मुक्त कणों (फ्री रेडिकल्स) से सुरक्षित रखते हैं और समग्र प्रतिरक्षा प्रणाली को सशक्त करते हैं।

आयुर्वेदिक और पर्यावरणीय महत्व

लसोड़े के पत्ते और बीज आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं। बिहार वन विभाग के अनुसार, यह वृक्ष न केवल मानव स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इसकी मध्यम आकार की संरचना इसे आसानी से उगाए जाने योग्य बनाती है, जिससे यह वनीकरण और कृषि वानिकी कार्यक्रमों के लिए आदर्श विकल्प बन जाता है।

नियमित सेवन के लाभ

विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित रूप से लसोड़े का सेवन शरीर को प्राकृतिक और संपूर्ण पोषण प्रदान करता है। इसके बहुआयामी स्वास्थ्य लाभ इसे आधुनिक पोषण विज्ञान और पारंपरिक ज्ञान का एक उत्तम उदाहरण बनाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

वहीं भारतीय ग्रामीण इलाकों में ऐसे पोषक फल आसानी से उपलब्ध हैं — लेकिन सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति इन्हें नजरअंदाज करती है। बिहार वन विभाग की पहल सराहनीय है, पर इसे राष्ट्रीय पोषण मिशन का हिस्सा बनाने की जरूरत है। विशेषकर जब स्कूली बच्चों में कुपोषण और महिलाओं में एनीमिया की दरें चिंताजनक रहती हैं, तब लसोड़ा जैसे फलों को बड़े पैमाने पर संरक्षित और प्रचारित करना सार्वजनिक स्वास्थ्य की समझदारी को दर्शाता है।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लसोड़ा क्या है और इसे इंडियन चेरी क्यों कहते हैं?
लसोड़ा (वैज्ञानिक नाम: कॉर्डिया डाइकोटोमा) एक पर्णपाती वृक्ष है जिसे गोंदी भी कहते हैं। इसे इंडियन चेरी इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके पके फल का स्वाद मीठा और चेरी जैसा होता है। यह 10 से 20 मीटर तक ऊंचा होता है।
लसोड़े में कौन-कौन से पोषक तत्व पाए जाते हैं?
लसोड़े में प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, फॉस्फोरस, जिंक और आयरन जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स भी होते हैं जो शरीर को मुक्त कणों से सुरक्षित रखते हैं।
लसोड़े का सेवन पाचन के लिए कैसे फायदेमंद है?
लसोड़े में उच्च मात्रा में फाइबर होता है, जो पाचन तंत्र को मजबूत करता है और कब्ज की समस्या को दूर करने में मदद करता है। नियमित सेवन से आंतों की कार्यप्रणाली में सुधार होता है।
क्या लसोड़ा एनीमिया (खून की कमी) दूर करने में मदद करता है?
हाँ, लसोड़े में आयरन की अच्छी मात्रा होती है, जो रक्ताल्पता (एनीमिया) को दूर करने में प्रभावी है। यह विशेषकर उन लोगों के लिए लाभकारी है जो प्राकृतिक स्रोतों से आयरन की पूर्ति करना चाहते हैं।
लसोड़े का उपयोग रसोई में कैसे किया जाता है?
पके लसोड़े को ताजा खाया जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी सब्जी बनाई जाती है, स्वादिष्ट अचार तैयार किए जाते हैं, और चटनी भी बनती है। कच्चे फलों का गूदा परंपरागत रूप से गोंद के विकल्प के रूप में भी इस्तेमाल होता है।
राष्ट्र प्रेस
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