लस्सी है शरीर का नेचुरल कूलर, गर्मियों में पीने का सही समय जानें

Click to start listening
लस्सी है शरीर का नेचुरल कूलर, गर्मियों में पीने का सही समय जानें

सारांश

गर्मियों में लस्सी शरीर का तापमान नियंत्रित करने वाला सबसे प्रभावी प्राकृतिक पेय है। दोपहर में इसका सेवन पाचन सुधारता है, हड्डियां मजबूत करता है और तुरंत ऊर्जा देता है। आर्टिफिशियल कोल्ड ड्रिंक्स की जगह यह देसी विकल्प सेहत के लिए कहीं बेहतर है।

Key Takeaways

  • लस्सी एक प्राकृतिक कूलिंग ड्रिंक है जो गर्मियों में शरीर के तापमान को संतुलित रखती है।
  • इसका सेवन दोपहर के भोजन के साथ करना सबसे अधिक फायदेमंद होता है।
  • लस्सी में कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन बी12 और प्रोबायोटिक्स भरपूर मात्रा में होते हैं।
  • रात में लस्सी पीने से अपच और भारीपन की समस्या हो सकती है।
  • आयुर्वेद में लस्सी को गर्मियों में अमृत समान माना गया है।
  • डिब्बाबंद आर्टिफिशियल पेय पदार्थों की तुलना में लस्सी स्वास्थ्य के लिए कहीं अधिक सुरक्षित और लाभकारी विकल्प है।

नई दिल्ली, 21 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भीषण गर्मी में जब शरीर को राहत की जरूरत होती है, तब लस्सी एक ऐसा प्राकृतिक कूलिंग ड्रिंक साबित होती है जो न केवल तुरंत ताजगी देती है, बल्कि शरीर के तापमान को प्राकृतिक रूप से संतुलित करने में भी सक्षम है। दही से बना यह पारंपरिक भारतीय पेय सदियों से भारतीय खानपान संस्कृति की धरोहर रहा है और आज भी इसकी प्रासंगिकता उतनी ही है।

आर्टिफिशियल ड्रिंक्स से बेहतर क्यों है लस्सी

गर्मियों में बाजार में डिब्बाबंद कोल्ड ड्रिंक्स और आर्टिफिशियल पेय पदार्थों की भरमार हो जाती है। इन पेय पदार्थों में अत्यधिक शुगर, प्रिजर्वेटिव और केमिकल होते हैं जो लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित होते हैं। इसके विपरीत, लस्सी पूरी तरह प्राकृतिक सामग्री से तैयार होती है और शरीर को भीतर से ठंडक पहुंचाती है।

गौरतलब है कि भारत में शीतल पेय उद्योग हर साल हजारों करोड़ रुपये का कारोबार करता है, जबकि पारंपरिक पेय जैसे लस्सी, छाछ और नींबू पानी स्वास्थ्य की दृष्टि से कहीं अधिक लाभकारी हैं। यह विरोधाभास ही उपभोक्ताओं को जागरूक करने की जरूरत को रेखांकित करता है।

लस्सी के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लस्सी की तासीर ठंडी होती है, इसलिए यह गर्मियों में शरीर के आंतरिक तापमान को नियंत्रित करने में विशेष भूमिका निभाती है। इसमें मौजूद प्रोबायोटिक्स पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं और आंतों में लाभकारी बैक्टीरिया की संख्या बढ़ाते हैं।

लस्सी में भरपूर मात्रा में कैल्शियम होता है जो हड्डियों और दांतों को मजबूती देता है। इसके अलावा, यह शरीर को हाइड्रेट रखती है, तुरंत ऊर्जा प्रदान करती है और गर्मी के कारण होने वाली थकान व कमजोरी को दूर करती है। विटामिन बी12 और प्रोटीन की उपस्थिति इसे एक संपूर्ण पोषण पेय बनाती है।

लस्सी पीने का सही समय और तरीका

विशेषज्ञों के मुताबिक, लस्सी का सेवन दोपहर के भोजन के साथ या उसके तुरंत बाद करना सबसे अधिक फायदेमंद होता है। इस समय इसका सेवन पाचन क्रिया को सक्रिय करता है, खाने को जल्दी पचाने में मदद करता है और दोपहर की तेज गर्मी से राहत दिलाता है।

देश के विभिन्न हिस्सों में लस्सी बनाने के तरीके अलग-अलग हैं। पंजाब में मीठी और गाढ़ी लस्सी लोकप्रिय है, जबकि राजस्थान में नमकीन लस्सी और दक्षिण भारत में छाछ के रूप में यह पेय पसंद किया जाता है।

रात में लस्सी पीना क्यों उचित नहीं

कुछ लोग रात के खाने के बाद भी लस्सी पीने की आदत रखते हैं, लेकिन आयुर्वेद विशेषज्ञ और आधुनिक पोषण विशेषज्ञ दोनों ही इसे रात में पीने से बचने की सलाह देते हैं। रात में शरीर की पाचन क्रिया धीमी हो जाती है और ऐसे में लस्सी जैसे भारी पेय से अपच, भारीपन और कफ की समस्या हो सकती है।

विशेष रूप से सर्दी-जुकाम से पीड़ित लोगों, अस्थमा रोगियों और कफ प्रकृति वाले व्यक्तियों को रात में लस्सी के सेवन से परहेज करना चाहिए। दिन में, खासकर सुबह ११ बजे से दोपहर ३ बजे के बीच, इसका सेवन सर्वाधिक लाभकारी माना गया है।

तुलनात्मक दृष्टिकोण और व्यापक संदर्भ

वैश्विक स्तर पर देखें तो ग्रीक योगर्ट ड्रिंक्स और मध्य-पूर्व की अयरान जैसे पेय भी दही आधारित हैं और इन्हें स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है। भारत में लस्सी इन सभी का पारंपरिक और पोषण से भरपूर विकल्प है। भारतीय आयुर्वेद में तक्र (छाछ/लस्सी) को औषधीय गुणों से युक्त बताया गया है और इसे गर्मियों में अमृत के समान माना गया है।

जैसे-जैसे गर्मी का मौसम अपने चरम पर पहुंचेगा, स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों को प्राकृतिक और पारंपरिक पेय पदार्थों की ओर लौटने की सलाह दे रहे हैं। लस्सी, नींबू पानी और नारियल पानी जैसे देसी विकल्प न केवल सस्ते हैं बल्कि शरीर के लिए दीर्घकालिक रूप से भी लाभकारी हैं।

Point of View

जहां दही और लस्सी जैसे पोषण से भरपूर पारंपरिक पेय सदियों से उपलब्ध हैं, वहां अरबों रुपये के विदेशी कोल्ड ड्रिंक ब्रांड्स युवाओं की पहली पसंद क्यों बन गए हैं। यह विरोधाभास विज्ञापन उद्योग और उपभोक्ता जागरूकता की विफलता को दर्शाता है। सरकार और स्वास्थ्य संस्थाओं को पारंपरिक भारतीय खानपान को बढ़ावा देने के लिए ठोस नीति बनानी चाहिए, न कि केवल प्रचार अभियान चलाने चाहिए।
NationPress
26/04/2026

Frequently Asked Questions

लस्सी पीने का सबसे सही समय क्या है?
लस्सी पीने का सबसे सही समय दोपहर का भोजन करते समय या उसके तुरंत बाद है। सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच इसका सेवन सर्वाधिक लाभकारी माना जाता है।
क्या रात को लस्सी पीना नुकसानदेह है?
हां, रात को लस्सी पीना सभी के लिए उचित नहीं है। रात में पाचन क्रिया धीमी होने के कारण इससे अपच, भारीपन और कफ की समस्या हो सकती है।
लस्सी शरीर के तापमान को कैसे नियंत्रित करती है?
लस्सी की तासीर ठंडी होती है, जिससे यह शरीर के आंतरिक तापमान को प्राकृतिक रूप से संतुलित करती है। दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स और जल-तत्व शरीर को हाइड्रेट रखते हैं।
लस्सी में कौन-कौन से पोषक तत्व होते हैं?
लस्सी में कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन बी12 और प्रोबायोटिक्स प्रचुर मात्रा में होते हैं। ये तत्व हड्डियों को मजबूत बनाने, पाचन सुधारने और तुरंत ऊर्जा देने में सहायक हैं।
आर्टिफिशियल कोल्ड ड्रिंक की जगह लस्सी क्यों पीनी चाहिए?
डिब्बाबंद कोल्ड ड्रिंक्स में अत्यधिक शुगर, केमिकल और प्रिजर्वेटिव होते हैं जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। लस्सी पूरी तरह प्राकृतिक है और शरीर को दीर्घकालिक लाभ देती है।
Nation Press