पर्वतासन: हड्डियों से मानसिक शांति तक, रोज़ 10 मिनट बदलेंगे सेहत का नज़ारा

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पर्वतासन: हड्डियों से मानसिक शांति तक, रोज़ 10 मिनट बदलेंगे सेहत का नज़ारा

सारांश

पर्वतासन एक सरल योगासन है जो रोज़ 10 मिनट के अभ्यास से हड्डियों को मजबूत, पाचन को दुरुस्त और मन को शांत बनाता है। आयुष मंत्रालय ने इसे अत्यंत प्रभावी बताया है। छात्रों से लेकर कामकाजी लोगों तक, सभी के लिए यह आसन वरदान है।

Key Takeaways

  • पर्वतासन एक प्राचीन भारतीय योगासन है जो शरीर को पहाड़ की तरह मजबूत और स्थिर बनाता है।
  • आयुष मंत्रालय ने इसे सरल, सुरक्षित और अत्यंत प्रभावी योगाभ्यास के रूप में मान्यता दी है।
  • रोज़ाना 5 से 10 मिनट के अभ्यास से पैर, जांघ, पीठ, कंधे और रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है।
  • पाचन तंत्र में सुधार होता है और मानसिक तनाव, चिंता कम होती है तथा एकाग्रता बढ़ती है।
  • छात्रों, कामकाजी पेशेवरों और गृहिणियों के लिए यह आसन विशेष रूप से उपयोगी है।
  • गंभीर पीठ दर्द, घुटने की समस्या या हालिया सर्जरी वाले लोग इसे डॉक्टर की सलाह के बाद ही करें।

नई दिल्ली: आधुनिक जीवन की भागदौड़ में जब शरीर थकान और मन तनाव से घिर जाता है, तब पर्वतासन एक प्राचीन भारतीय योग विज्ञान का वह अमोघ अस्त्र बनकर सामने आता है जो मात्र 5 से 10 मिनट के दैनिक अभ्यास से शरीर को ऊर्जावान और मन को स्थिर बना सकता है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने इस आसन को सरल, सुरक्षित और अत्यंत प्रभावी योगाभ्यास के रूप में मान्यता दी है।

पर्वतासन क्या है और इसका अर्थ

पर्वतासन दो संस्कृत शब्दों — 'पर्वत' (पहाड़) और 'आसन' (मुद्रा) — से मिलकर बना है। इस आसन के दौरान साधक का शरीर एक ऊंचे, स्थिर और मजबूत पर्वत की आकृति धारण करता है। यह आसन शुरुआती अभ्यासकर्ताओं के लिए भी सहज है और इसे किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं होती।

यह आसन न केवल शारीरिक व्यायाम है, बल्कि शरीर और मन के बीच एक गहरा संतुलन स्थापित करने का माध्यम भी है। योग विशेषज्ञों के अनुसार, इसे सुबह खाली पेट करना सर्वाधिक लाभकारी होता है।

शारीरिक लाभ: हड्डियों से पाचन तक

आयुष मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार, पर्वतासन के नियमित अभ्यास से पैरों, जांघों, पीठ और कंधों की मांसपेशियों को गहरी मजबूती मिलती है। इसके साथ ही यह रीढ़ की हड्डी को सीधा और लचीला बनाए रखने में सहायक है, जो लंबे समय तक कुर्सी पर बैठने वाले कामकाजी लोगों के लिए अत्यंत जरूरी है।

इस आसन के दौरान पेट की मांसपेशियों पर विशेष दबाव पड़ता है, जिससे पाचन तंत्र सक्रिय होता है और अपच, गैस जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। नियमित अभ्यास से शरीर की मुद्रा (Posture) में सुधार आता है और व्यक्ति का कद भी दिखने में लंबा प्रतीत होता है।

मानसिक स्वास्थ्य पर असर: तनाव और चिंता से मुक्ति

पर्वतासन मानसिक स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह एकाग्रता बढ़ाता है, तनाव और चिंता को कम करता है और मन को स्थिरता प्रदान करता है। इससे निर्णय लेने की क्षमता भी प्रबल होती है।

छात्रों, गृहिणियों और कामकाजी पेशेवरों के लिए यह आसन विशेष रूप से उपयोगी सिद्ध हुआ है। जो लोग लंबे समय तक स्क्रीन के सामने काम करते हैं, उनके लिए यह एक प्राकृतिक 'डिजिटल डिटॉक्स' की भूमिका निभाता है।

किसे सावधानी बरतनी चाहिए

हालांकि पर्वतासन अधिकांश लोगों के लिए सुरक्षित है, लेकिन जिन्हें गंभीर पीठ दर्द, घुटने की समस्या हो या जिनकी हाल ही में कोई सर्जरी हुई हो, उन्हें इसे करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि आसन करते समय श्वास की गति सामान्य रखें और शरीर पर अनावश्यक दबाव न डालें। शुरुआत में किसी प्रशिक्षित योग गुरु की देखरेख में अभ्यास करना श्रेयस्कर है।

व्यापक परिप्रेक्ष्य: भारत में योग की बढ़ती प्रासंगिकता

गौरतलब है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्टों के अनुसार, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ रही हैं और भारत में भी तनाव, अवसाद और जीवनशैली जनित बीमारियों का बोझ लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में आयुष मंत्रालय द्वारा योगासनों को बढ़ावा देना एक सुविचारित नीतिगत कदम है।

21 जून को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की पृष्ठभूमि में पर्वतासन जैसे सरल आसनों का प्रचार-प्रसार और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। आने वाले समय में आयुष मंत्रालय के 'योग से निरोग' अभियान के तहत ऐसे आसनों को स्कूलों और कार्यस्थलों में भी शामिल किए जाने की संभावना है।

Point of View

तब पर्वतासन जैसे सरल योगासनों की ओर लौटना केवल स्वास्थ्य का नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण का संकेत है। विडंबना यह है कि भारत ने योग को विश्व को दिया, लेकिन देश के भीतर ही इसे स्कूलों और कार्यस्थलों में अनिवार्य करने में दशकों लग गए। आयुष मंत्रालय की पहल सराहनीय है, पर असली परीक्षा तब होगी जब यह ज्ञान महंगे योग स्टूडियो से निकलकर हर गली-मोहल्ले तक पहुंचेगा। पर्वतासन की सरलता ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है — इसे अपनाना किसी के लिए भी असंभव नहीं।
NationPress
26/04/2026

Frequently Asked Questions

पर्वतासन क्या है और इसे कैसे करते हैं?
पर्वतासन एक योगासन है जिसमें शरीर पहाड़ की आकृति में आता है। इसे करने के लिए सीधे खड़े होकर या बैठकर दोनों हाथ ऊपर उठाएं और शरीर को स्थिर रखें। नियमित अभ्यास से रीढ़, पैर और कंधों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
पर्वतासन के क्या-क्या फायदे हैं?
पर्वतासन से हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत होती हैं, पाचन तंत्र सुधरता है और मानसिक तनाव कम होता है। यह एकाग्रता बढ़ाता है और शरीर की मुद्रा को सही करता है।
पर्वतासन कितने समय तक करना चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार रोज़ाना 5 से 10 मिनट पर्वतासन का अभ्यास पर्याप्त है। सुबह खाली पेट इसे करना सबसे अधिक लाभकारी माना जाता है।
पर्वतासन किसे नहीं करना चाहिए?
जिन्हें गंभीर पीठ दर्द, घुटने की समस्या हो या हाल ही में सर्जरी हुई हो, उन्हें पर्वतासन करने से पहले डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। गर्भवती महिलाएं भी विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही इसे करें।
आयुष मंत्रालय ने पर्वतासन के बारे में क्या कहा है?
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने पर्वतासन को एक सरल, सुरक्षित और प्रभावी योगासन बताया है। उनके अनुसार इसके नियमित अभ्यास से पैर, पीठ, कंधे और रीढ़ की हड्डी को विशेष लाभ मिलता है।
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