क्या 10 जनवरी का पंचांग माघ मास की कालाष्टमी के लिए शुभ है?
सारांश
Key Takeaways
- 10 जनवरी को माघ मास की कालाष्टमी का पर्व है।
- राहुकाल सुबह 9:52 बजे से 11:10 बजे तक रहेगा।
- भगवान काल भैरव की पूजा से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
नई दिल्ली, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सनातन धर्म में पंचांग का अत्यधिक महत्व है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पूर्व पंचांग के पांच तत्व - तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण का मूल्यांकन अनिवार्य होता है। इन्हीं के आधार पर शुभ मुहूर्त, राहुकाल और अन्य योगों का निर्धारण किया जाता है, जो कार्य की सफलता और कल्याण में सहायक होते हैं।
10 जनवरी को शनिवार है और यह माघ मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है। इस दिन मासिक कालाष्टमी का त्योहार मनाया जाएगा, जो भगवान काल भैरव की पूजा के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
दृक पंचांग के अनुसार, 10 जनवरी को सूर्योदय सुबह 7:15 बजे और सूर्यास्त शाम 5:42 बजे होगा। चंद्रोदय रात 12:43 बजे और चंद्रास्त सुबह 11:35 बजे होगा। चंद्रमा कन्या राशि में रहेगा। इस दिन सप्तमी तिथि सुबह 8:23 बजे तक रहेगी, फिर अष्टमी तिथि आरंभ होगी।
हस्त नक्षत्र दोपहर 3:40 बजे तक रहेगा, फिर चित्रा नक्षत्र लग जाएगा। वहीं, अतिगण्ड शाम 4:59 बजे तक रहेगा। करण बव सुबह 8:23 बजे तक, फिर बालव शाम 9:17 बजे तक और उसके बाद कौलव करण लगेगा।
शुभ कार्यों के लिए महत्वपूर्ण मुहूर्तों पर ध्यान दें तो राहुकाल सुबह 9:52 बजे से 11:10 बजे तक रहेगा। इस समय किसी भी शुभ कार्य को करने से मना किया गया है। यमगण्ड दोपहर 1:47 बजे से 3:05 बजे तक होगा। गुलिक काल सुबह 7:15 से 8:34 बजे तक रहेगा।
कालाष्टमी भगवान काल भैरव के भक्तों के लिए विशेष होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन काल भैरव की पूजा से भय, रोग से मुक्ति और शत्रुओं से रक्षा प्राप्त होती है। माना जाता है कि काल भैरव की पूजा से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है और कष्ट, रोग-शोक दूर होते हैं। भक्त इस दिन मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना करते हैं, व्रत रखते हैं और काल भैरव के मंत्रों का जाप करते हैं।
हर महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कालाष्टमी पर्व आता है, जो महादेव के रौद्र अवतार काल भैरव की पूजा के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन विधिपूर्वक काल भैरव की पूजा करके उन्हें प्रिय सरसों का तेल, काला तिल चढ़ाकर मस्तक पर भस्म लगाना चाहिए। साथ ही बड़ा, मालपुआ, जलेबी आदि का भोग अर्पित करना चाहिए।