क्या ऑनलाइन डिलीवरी पर 10 मिनट में रोक लगने से गिग वर्कर्स के चेहरे खिले?
सारांश
Key Takeaways
- 10 मिनट डिलीवरी का वादा खत्म किया गया।
- गिग वर्कर्स को समय सीमा के दबाव से राहत।
- कंपनियाँ अब 20 मिनट में डिलीवरी करने का प्रयास करेंगी।
- काम करने का माहौल बेहतर होगा।
- सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।
नई दिल्ली, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अब घर पर बैठकर ऑनलाइन सामान ऑर्डर करने पर 10 मिनट में डिलीवरी का दावा नहीं किया जाएगा।
केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के बाद ब्लिंकिट, ज़ेप्टो, ज़ोमैटो और स्विगी जैसी प्रमुख क्विक कॉमर्स कंपनियों ने अपने विज्ञापनों, ब्रांडिंग और ऐप से '10 मिनट डिलीवरी' का वादा हटा दिया है। यह निर्णय गिग वर्करों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
राष्ट्र प्रेस ने नई दिल्ली में कुछ गिग वर्करों से बात की, जो विभिन्न कॉमर्स कंपनियों में काम कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। राहुल, जो दिन में 9 घंटे काम करते हैं, हमेशा इस चिंता में रहते थे कि अगर 10 मिनट में ऑर्डर नहीं पहुंचा तो उन्हें नुकसान न उठाना पड़े। रोजाना 600 रुपए की कमाई करके जब वह घर लौटते हैं, तो उनके परिवार का चूल्हा जलता है।
उन्होंने कहा कि अगर 10 मिनट में डिलीवरी के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा, तो हमें बहुत राहत मिलेगी। ट्रैफिक में फंसने के कारण कभी-कभी 10 मिनट में डिलीवरी करना संभव नहीं होता। कई बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करना पड़ता है, जिससे हमारी जान का खतरा बढ़ जाता है। कभी-कभी तो एक्सीडेंट भी हो जाते हैं। हमारी मेहनत के अनुसार कंपनी बहुत कम पैसे देती है। हम बस यही चाहते हैं कि पेमेंट थोड़ा बढ़ा दें।
9 महीने से काम कर रहे सनी ने बताया कि बहुत दिक्कत होती थी। 10 मिनट का टारगेट होने से जान का खतरा ज्यादा रहता था; बहुत तेजी से बाइक चलानी पड़ती थी। इस सिस्टम के खत्म होने से हमें बहुत राहत मिलेगी। हम दिन में 700 रुपये कमा लेते हैं, लेकिन अगर लेट हो जाएं तो ग्राहक डांटते हैं। यह निर्णय बहुत सही है।
एक अन्य गिग वर्कर ने कहा कि 10 मिनट का दबाव हटने से यह फैसला बहुत अच्छा है। कंपनी कभी-कभी सहयोग करती है, लेकिन ग्राहक नहीं करते। एक्सीडेंट का डर हमेशा बना रहता था। पहले ज्यादा प्रेशर था, और देरी होने पर कई बार कंपनी ने जुर्माना भी लगाया है। डिलिवरी के लिए 10 मिनट की जगह 20 मिनट होना चाहिए।