क्या 12 जनवरी का पंचांग माघ कृष्ण की नवमी तिथि पर शुभ मुहूर्त और राहुकाल बताते हैं?
सारांश
Key Takeaways
- 12 जनवरी को माघ कृष्ण की नवमी तिथि है।
- भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है।
- राहुकाल के समय शुभ कार्य नहीं करें।
- पंचांग का विचार करना आवश्यक है।
- शिव पूजा से सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।
नई दिल्ली, 12 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सनातन धर्म में किसी भी दिन की शुरुआत या शुभ कार्य से पहले पंचांग का ध्यान रखना आवश्यक है। पंचांग के अनुसार 12 जनवरी को सोमवार, माघ माह की कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि है। यह दिन भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष महत्वपूर्ण है।
पंचांग के प्रमुख पांच अंगों- तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण का विचार अनिवार्य माना जाता है। इन्हीं के आधार पर शुभ मुहूर्त, राहुकाल समेत अन्य योगों का निर्धारण किया जाता है, जो कार्य की सफलता और कल्याण सुनिश्चित करते हैं।
विक्रम संवत 2082 (कालयुक्त) और शक संवत 1947 (विश्वावसु) चल रहा है। नवमी तिथि शाम 12 बजकर 42 मिनट तक रहेगी, उसके बाद दशमी शुरू हो जाएगी। स्वाती नक्षत्र शाम 9 बजकर 5 मिनट तक रहेगा, फिर विशाखा नक्षत्र प्रारंभ होगा। योग की बात करें तो धृति शाम 6 बजकर 12 मिनट तक है, उसके बाद शूल योग का आरंभ होगा। वहीं, चंद्रमा तुला राशि में संचरण करेंगे।
सूर्योदय 7 बजकर 15 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 44 मिनट पर होगा। शुभ कार्यों के लिए ये दिन सामान्य है, लेकिन राहुकाल का विशेष ध्यान रखना चाहिए। राहुकाल सुबह 8 बजकर 34 मिनट से 9 बजकर 52 मिनट तक रहेगा। इस दौरान कोई भी शुभ कार्य न करें। राहुकाल के अलावा अन्य समय में शुभ मुहूर्त लेकर कार्य संपन्न किए जा सकते हैं।
सोमवार का दिन भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व रखता है। सोमवार को भोलेनाथ की विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन के दुख दूर होते हैं, मनोकामनाएं पूरी होती हैं और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। बाबा विश्वनाथ की पूजा के लिए सोमवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। घर में या मंदिर में शिवलिंग की ओर मुख करके विधि विधान से पूजा करें। इसके लिए सबसे पहले शिवलिंग पर पंचामृत यानी जल, दूध, शहद, घी और दही से अभिषेक करें। इसके बाद बाबाजी को बेलपत्र, आक के फूल, धतूरा और भांग चढ़ाएं। इत्र, अबीर-बुक्का, भस्म, कुमकुम, अक्षत और पुष्प अर्पित करें। धूप-दीप जलाएं और फल-मिठाई का भोग लगाएं।
पूजने के बाद ओम नमः शिवाय, सांब सदा शिवाय नम: मंत्र का जाप करें और शिव चालीसा या रुद्राष्टक का पाठ करें। अंत में आरती कर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करें। पूजा से महादेव प्रसन्न होते हैं और भक्त को शांति, स्वास्थ्य तथा धन-धान्य की प्राप्ति होती है।