16 अप्रैल को मासिक शिवरात्रि, अभिजित व विजय मुहूर्त का महत्व, जानें राहुकाल
सारांश
Key Takeaways
- मासिक शिवरात्रि का पर्व 16 अप्रैल को मनाया जाएगा।
- भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का विशेष महत्व है।
- अभिजित मुहूर्त और विजय मुहूर्त जानना आवश्यक है।
- राहुकाल के समय का ध्यान रखें।
- विशेष चढ़ावे से पूजा का फल बढ़ता है।
नई दिल्ली, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित मासिक शिवरात्रि का पर्व गुरुवार, 16 अप्रैल को मनाया जाएगा। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के लिए विशेष महत्व रखता है। मासिक शिवरात्रि हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है।
बैशाख महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 16 अप्रैल को शाम 8:11 बजे तक रहेगी। हालांकि, उदयातिथि के अनुसार इस दिन चतुर्दशी का मान रहेगा। गुरुवार को सूर्योदय 5:55 बजे और सूर्यास्त शाम 6:47 बजे होगा। नक्षत्र उत्तर भाद्रपद दोपहर 1:59 बजे तक रहेगा, इसके बाद रेवती नक्षत्र प्रारंभ होगा। योग इन्द्र सुबह 10:38 बजे तक रहेगा।
शिवरात्रि के दिन महादेव और माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन शाम को प्रदोष काल में शिवलिंग पर दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल से अभिषेक करें। बेलपत्र, आक के फूल, सफेद चंदन और धतूरा चढ़ाना विशेष फलदायी माना जाता है। इस व्रत से मानसिक शांति, पारिवारिक सुख और सभी बाधाओं का नाश होता है। भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा से भक्तों की इच्छाएँ पूरी होती हैं।
दृक पंचांग के अनुसार, मासिक शिवरात्रि के महत्वपूर्ण मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त 4:26 से 5:10 बजे तक, अभिजित मुहूर्त सुबह 11:55 से 12:47 बजे तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2:30 से 3:21 बजे तक रहेगा। वहीं, अमृत काल सुबह 9:27 से 10:58 बजे तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6:46 से 7:08 बजे तक रहेगा।
अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 1:58 से 3:34 बजे तक, यमगंड सुबह 5:55 से 7:31 बजे तक, गुलिक काल सुबह 9:08 से 10:45 बजे तक रहेगा। वहीं, दुर्मुहूर्त सुबह 10:12 से 11:04 बजे तक रहेगा।