26 सितंबर 2026
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160 सांसद सस्पेंड कर लाया गया धारा-16 कानून 'वोट चोरी की साजिश' — कांग्रेस का केंद्र पर बड़ा आरोप

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160 सांसद सस्पेंड कर लाया गया धारा-16 कानून 'वोट चोरी की साजिश' — कांग्रेस का केंद्र पर बड़ा आरोप

सारांश

कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सुनियोजित साजिश का आरोप लगाया है — 160 सांसदों को सस्पेंड कर धारा-16 का कानून लाया गया ताकि वोट चोरी के बाद चुनाव आयुक्तों को कानूनी जवाबदेही से बचाया जा सके। यह आरोप चुनावी पारदर्शिता की बहस को नई धार दे रहे हैं।

मुख्य बातें

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि 2023 में 160 सांसदों को निलंबित कर धारा-16 वाला कानून लाया गया, जो चुनाव आयुक्तों को सिविल व आपराधिक मुकदमों से बचाता है।
पंजाब कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने इसे 'वोट चोरी की पूर्व-नियोजित साजिश' बताया।
उत्तराखंड नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के अनुसार, पूर्व चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों में 14 बार आपत्तियाँ दर्ज कराईं, लेकिन उन्हें नजरअंदाज किया गया।
कांग्रेस ने दोषियों के विरुद्ध देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करने और बर्खास्तगी की माँग की है।
उत्तराखंड सहित देशभर में चुनाव आयोग कार्यालयों के घेराव की चेतावनी दी गई है।
केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

कांग्रेस ने 25 सितंबर 2026 को चुनाव आयोग पर वोट चोरी के गंभीर आरोपों को लेकर केंद्र सरकार के विरुद्ध व्यापक राजनीतिक अभियान छेड़ दिया है। पंजाब के कांग्रेस विधायक परगट सिंह और उत्तराखंड में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने आरोप लगाया है कि 2023 में 160 सांसदों को निलंबित कर जो धारा-16 वाला कानून पारित कराया गया, वह इसी साजिश का हिस्सा था — ताकि चुनाव आयुक्तों पर कोई सिविल या आपराधिक मुकदमा न चल सके।

मुख्य आरोप क्या हैं

परगट सिंह ने कहा कि 2023 में सरकार ने 160 सांसदों को सस्पेंड करके जो कानून बनाया था, आज उसी का नतीजा सामने है। उनका आरोप है कि सरकार को पहले से पता था कि वह वोट चोरी करेगी, इसलिए ऐसा कानून बनाया गया ताकि चुनाव आयुक्तों पर कोई मुकदमा न चल सके। उन्होंने कहा कि पंजाब में बहुत बड़ा घोटाला हुआ है और लगातार हो रहा है।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि भगवंत मान के फेक वीडियो मामले में हरियाणा में पर्चा दर्ज होने के बाद क्या कार्रवाई हुई। साथ ही शुभकरण की मौत के मामले पर भी जवाब माँगा।

यशपाल आर्य का विस्तृत बयान

उत्तराखंड में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा, 'यह बहुत ही गंभीर मामला है। जिस तरह से 2023 में सरकार द्वारा इसकी स्क्रिप्ट लिख दी गई थी — लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों को सस्पेंड कर दिया जाता है और उसके बाद धारा-16 के तहत एक बिल लाया जाता है, जिसमें कहा गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त या चुनाव आयुक्तों द्वारा किए गए किसी भी कृत्य पर किसी भी अदालत में न तो कोई सिविल और न ही क्रिमिनल मामला चलेगा।'

आर्य ने यह भी बताया कि पिछले तीन वर्षों से राहुल गांधी लगातार वोट चोरी के इस मुद्दे को प्रमुखता से उठा रहे हैं। उनके अनुसार, पूर्व चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने स्वयं कहा है कि दस महीनों में 14 बार आपत्तियाँ दर्ज कराई गईं, लेकिन उन्हें अनसुना किया गया। उन्होंने कैबिनेट सचिव से भी समय लेकर बातचीत की, किंतु कोई नतीजा नहीं निकला।

राहुल गांधी और विपक्षी आरोपों का इतिहास

कांग्रेस नेताओं ने बताया कि राहुल गांधी ने महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार सहित कई राज्यों के चुनावों में यह मुद्दा उठाया है कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर लोकतंत्र को कमज़ोर करने और नागरिकों के मौलिक अधिकार छीनने की कोशिश कर रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो रही है।

कांग्रेस की माँगें और आगे की कार्रवाई

कांग्रेस ने इस पूरे मामले को देशद्रोह करार देते हुए माँग की है कि दोषियों के विरुद्ध देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया जाए और उन्हें बर्खास्त कर जेल भेजा जाए। यशपाल आर्य ने कहा कि उत्तराखंड सहित देशभर में चुनाव आयोग कार्यालयों का घेराव किया जाएगा। उनका कहना है कि यह लड़ाई लंबी है, लेकिन पार्टी इसे मजबूती से जारी रखेगी क्योंकि वोट देने के अधिकार को छीनने का प्रयास हुआ है।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह विवाद संसद और सड़क — दोनों मोर्चों पर और तेज होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनमें एक ठोस विधायी तथ्य है — धारा-16 का वह प्रावधान जो चुनाव आयुक्तों को अदालती जवाबदेही से बाहर रखता है। सवाल यह है कि क्या विपक्ष इन आरोपों को साक्ष्य-आधारित कानूनी चुनौती में बदल पाएगा, या यह केवल राजनीतिक भाषणबाजी बनकर रह जाएगा। यह भी गौरतलब है कि पूर्व चुनाव आयुक्तों की '14 बार आपत्ति' वाली बात सत्यापित हुई तो यह संस्थागत विफलता की कहीं गहरी कहानी है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक रही है वो यह है कि धारा-16 की संवैधानिकता पर खुद कानूनी विशेषज्ञों में मतभेद हैं — और यही असली बहस होनी चाहिए।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांग्रेस का धारा-16 कानून और 160 सांसदों के निलंबन से क्या आरोप है?
कांग्रेस का आरोप है कि 2023 में 160 सांसदों को निलंबित कर जानबूझकर धारा-16 वाला कानून पारित कराया गया, जो चुनाव आयुक्तों को किसी भी सिविल या आपराधिक मुकदमे से कानूनी सुरक्षा देता है। पार्टी का कहना है कि यह वोट चोरी को कानूनी कवर देने की पूर्व-नियोजित साजिश थी।
धारा-16 क्या है और यह विवादास्पद क्यों है?
धारा-16 वह प्रावधान है जिसके तहत मुख्य चुनाव आयुक्त या चुनाव आयुक्तों द्वारा किए गए किसी भी कृत्य पर किसी भी अदालत में न सिविल और न आपराधिक मामला चलाया जा सकता है। विपक्ष का तर्क है कि यह प्रावधान इन संवैधानिक पदाधिकारियों को जवाबदेही से ऊपर रखता है, जो लोकतंत्र की मूल भावना के विरुद्ध है।
पूर्व चुनाव आयुक्तों ने 14 बार आपत्ति दर्ज कराई — यह दावा क्या है?
यशपाल आर्य के अनुसार, पूर्व चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने दस महीनों में 14 बार आपत्तियाँ दर्ज कराईं और कैबिनेट सचिव से भी बातचीत की, लेकिन उनकी शिकायतों को नजरअंदाज किया गया। यह दावा सत्यापित नहीं है और केंद्र सरकार ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।
कांग्रेस ने इस मामले में क्या माँगें रखी हैं?
कांग्रेस ने माँग की है कि इस मामले में दोषियों के विरुद्ध देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया जाए, उन्हें बर्खास्त कर जेल भेजा जाए, और देशभर में चुनाव आयोग कार्यालयों का घेराव किया जाएगा। उत्तराखंड में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने इस अभियान को लंबी लड़ाई बताया है।
राहुल गांधी का इस मुद्दे से क्या संबंध है?
कांग्रेस नेताओं के अनुसार, राहुल गांधी पिछले तीन वर्षों से महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार सहित कई राज्यों के चुनावों में वोट चोरी और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते रहे हैं। पार्टी का दावा है कि उनके तथ्यात्मक बयानों को बार-बार नजरअंदाज किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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