क्या 2016 से 2025 के बीच 54,511 भारतीय नागरिकों के पार्थिव शरीर वापस लाए गए?

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क्या 2016 से 2025 के बीच 54,511 भारतीय नागरिकों के पार्थिव शरीर वापस लाए गए?

सारांश

विदेश मंत्रालय ने संसद में बताया कि 2016 से 2025 के बीच 54,511 भारतीय नागरिकों के पार्थिव शरीर स्वदेश लाए गए हैं। पिछले नौ वर्षों में विदेशों में भारतीयों की मृत्यु के मामलों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। जानें पूरी प्रक्रिया और चुनौतियाँ।

मुख्य बातें

2016 से 2025 के बीच 54,511 भारतीय नागरिकों के पार्थिव शरीर स्वदेश लाए गए।
सरकार ने पार्थिव शरीर लाने की प्रक्रिया में परिवारों को सहायता प्रदान की है।
पार्थिव शरीर लाने के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर का पालन किया जाता है।
परिवारों की चुनौतियों में उच्च परिवहन लागत शामिल है।
आईसीडब्ल्यूएफ के माध्यम से आर्थिक सहायता उपलब्ध है।

नई दिल्ली, 12 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने शुक्रवार को संसद में जानकारी दी कि पिछले नौ वर्षों में विदेशों में रहने या काम करने वाले भारतीयों की मृत्यु के मामलों में कोई उल्लेखनीय बढ़ोतरी नहीं हुई है। मंत्रालय ने बताया कि 2016 से 2025 के बीच कुल 54,511 भारतीय नागरिकों के पार्थिव शरीर स्वदेश लाए गए हैं।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में इस बात की पुष्टि की।

प्रश्न में पार्थिव शरीरों को भारत लाने की प्रक्रिया, देरी, और परिवारों को आने वाली चुनौतियों के बारे में जानकारी मांगी गई थी।

प्रत्येक वर्ष लाए गए पार्थिव शरीरों की संख्या इस प्रकार है: 2016 में 4,167, 2017 में 4,222, 2018 में 4,205, 2019 में 5,291, 2020 में 5,321, 2021 में 5,834, 2022 में 5,946, 2023 में 6,532, 2024 में 7,096 और 2025 (अक्टूबर तक) 5,897 पार्थिव शरीर लाए गए हैं।

मंत्रालय के अनुसार, प्रत्येक भारतीय मिशन एक विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) के तहत काम करता है, जिसमें स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय, परिवार को सहायता, और स्थानीय कानूनों के अनुसार समय पर परिवहन प्रक्रिया शामिल है।

सरकार ने यह स्पष्ट किया कि कोई निश्चित समयसीमा निर्धारित नहीं की जा सकती, क्योंकि हर मामले की परिस्थितियाँ भिन्न होती हैं। प्राकृतिक मृत्यु के मामलों में सामान्यतः 3 से 14 दिनों का समय लगता है, जबकि हत्या, दुर्घटना, या अन्य अप्राकृतिक मृत्यु के मामलों में पुलिस जांच, पोस्टमॉर्टम और पहचान संबंधी प्रक्रियाओं के कारण देरी हो सकती है। कई मामलों में डीएनए परीक्षण भी आवश्यक होता है।

परिवारों को आने वाली मुख्य चुनौतियों में उच्च परिवहन लागत, स्थानीय पुलिस या चिकित्सा रिपोर्ट में देरी, और दस्तावेजों को लेकर असमंजस शामिल हैं। इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए मिशनों को निर्देश दिया गया है कि ऐसे मामलों को उच्च प्राथमिकता पर निपटाया जाए और आवश्यकता पड़ने पर छुट्टियों में भी एनओसी जारी किए जाएं।

विदेशों में फंसे या आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की सहायता के लिए इंडियन कम्युनिटी वेलफेयर फंड (आईसीडब्ल्यूएफ) की व्यवस्था भी उपलब्ध है, जिसके माध्यम से परिवहन खर्च वहन करने में सहायता प्रदान की जाती है। विश्वभर में स्थित भारतीय मिशनों में पर्याप्त कांसुलर स्टाफ मौजूद हैं, जो स्थानीय प्रशासन और एयरलाइंस के साथ मिलकर पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत भेजने की प्रक्रिया को पूरा करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भी दर्शाता है कि सरकार इन मामलों में गंभीरता से काम कर रही है। यह सुनिश्चित करना कि पार्थिव शरीरों को सही समय पर लाया जाए, एक महत्वपूर्ण कार्य है।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कितने भारतीय नागरिकों के पार्थिव शरीर विदेश से लाए गए?
2016 से 2025 के बीच कुल 54,511 भारतीय नागरिकों के पार्थिव शरीर स्वदेश लाए गए हैं।
पार्थिव शरीर लाने की प्रक्रिया में क्या चुनौतियाँ आती हैं?
परिवारों को उच्च परिवहन लागत, पुलिस या मेडिकल रिपोर्ट में देरी, और दस्तावेजों से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
सरकार पार्थिव शरीर लाने में कितना समय लेती है?
प्राकृतिक मृत्यु के मामलों में आमतौर पर 3 से 14 दिन लगते हैं, जबकि अन्य मामलों में देरी हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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