क्या भगवंत मान ने भाजपा को सीबीआई जांच कराने की चुनौती दी?
सारांश
Key Takeaways
- भगवंत मान ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
- सीबीआई जांच की चुनौती राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।
- सतलुज-यमुना लिंक नहर पर सुप्रीम कोर्ट में मामला चल रहा है।
- चंडीगढ़ के प्रशासनिक ढांचे की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
- पंजाब-पाकिस्तान सीमा पर फेंसिंग का मुद्दा भी उठाया गया है।
नई दिल्ली, 17 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली विधानसभा के स्पीकर विजेंद्र गुप्ता की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद, पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष आतिशी से जुड़े एक वीडियो को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस मामले पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने भारतीय जनता पार्टी को प्रतिक्रिया देते हुए सीबीआई जांच की खुली चुनौती दी।
भगवंत मान ने कहा कि दिल्ली फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की रिपोर्ट और अदालत ने स्पष्ट किया है कि आतिशी ने वीडियो में वह बात नहीं कही, जैसा कि कहा जा रहा है। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि यदि भाजपा को फॉरेंसिक रिपोर्ट और कोर्ट पर भरोसा नहीं है, तो वे सीबीआई जांच करवा लें।
भगवंत मान ने आरोप लगाया कि दिल्ली में भाजपा सरकार जानबूझकर आम आदमी पार्टी की छवि को खराब करने के लिए इस मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रही है।
पंजाब के मुख्यमंत्री ने सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर के मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने बताया कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है और पंजाब सरकार अपने बेहतरीन वकीलों की टीम भेज रही है।
मान ने कहा, "हमारे पास पहले से ही पानी की कमी है। यह मामला जितनी जल्दी हो सुलझना चाहिए, ताकि लोगों को राहत मिल सके।"
चंडीगढ़ के प्रशासनिक ढांचे पर बोलते हुए भगवंत मान ने कहा कि शहर में 60-40 का अनुपात बना रहना चाहिए, जिसमें 60 प्रतिशत अधिकारी पंजाब से और 40 प्रतिशत हरियाणा से हों। फिलहाल यही व्यवस्था लागू है और इसे बनाए रखना आवश्यक है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद, भगवंत मान ने पंजाब-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तारबंदी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि पंजाब की 532 किलोमीटर लंबी सीमा है और कई जगहों पर तारबंदी देश की सीमा के अंदर 2 से 3 किलोमीटर तक लगी हुई है। इसका मतलब यह है कि तार के उस पार की जमीन भी भारत की है। वहां खेती करने के लिए किसानों को विशेष पास और बीएसएफ की सुरक्षा के साथ जाना पड़ता है।
मान ने बताया कि उन्होंने यह मुद्दा पहले भी उठाया था और इस बार अमित शाह ने आश्वासन दिया कि सरकार फेंसिंग को आगे बढ़ाने पर विचार कर रही है, जैसा पहले पठानकोट में किया गया था।