चुनाव से पूर्व ममता बनर्जी को बड़ा झटका, विधायक अब्दुर रज्जाक ने तृणमूल कांग्रेस को अलविदा कहा
सारांश
Key Takeaways
- अब्दुर रज्जाक ने तृणमूल कांग्रेस छोड़ने का निर्णय लिया।
- टिकट न मिलने से नाराजगी थी मुख्य कारण।
- टीएमसी को आगामी चुनावों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
- पार्टी में आंतरिक कलह बढ़ी है।
- अपूर्व सरकार ने रज्जाक के आरोपों का खंडन किया है।
कोलकाता, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले के जलांगी विधानसभा क्षेत्र से तीन बार के अनुभवी तृणमूल कांग्रेस विधायक अब्दुर रज्जाक ने आज पार्टी छोड़ने की घोषणा की। यह फैसला उन्होंने इस बार टिकट न मिलने के नाराजगी के कारण लिया।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, रज्जाक ने तृणमूल कांग्रेस से अपने अलग होने के फैसले को साझा करते हुए पार्टी नेतृत्व पर कड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस बार टीएमसी के उम्मीदवार जलांगी, डोमकल, और रानीनगर विधानसभा क्षेत्रों में हार का सामना करेंगे।
रज्जाक ने यह भी कहा कि उन्हें टिकट नहीं दिया गया क्योंकि वे पार्टी को एक बड़ी राशि नहीं दे पाए। उन्होंने पार्टी के भीतर ईमानदारी की कमी की ओर इशारा किया।
उन्होंने कहा कि पार्टी के उम्मीदवार धन उगाही में माहिर हैं और इसीलिए टिकट पाने के लिए बड़ी रकम का भुगतान कर सकते हैं। जलांगी, डोमकल और रानीनगर में पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहेगा।
वहीं, मुर्शिदाबाद में तृणमूल कांग्रेस के जिला अध्यक्ष अपूर्व सरकार, जिन्हें 'डेविड' के नाम से जाना जाता है, ने कहा कि पार्टी को पता चला था कि रज्जाक विपक्षी दलों के साथ गुपचुप तरीके से सांठ-गांठ बना रहे थे, इसीलिए उन्हें फिर से टिकट नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा कि हर चुनाव से पहले कुछ नेता हताश हो जाते हैं। 2021 के विधानसभा चुनावों से पहले भी ऐसा ही हुआ था।
जिला अध्यक्ष के अनुसार, रज्जाक को टिकट न देने का एक महत्वपूर्ण कारण भ्रष्टाचार में उनकी संलिप्तता थी।
हालांकि रज्जाक ने पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया, लेकिन उन्होंने अपने भविष्य के राजनीतिक कदमों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। इस बार जलांगी से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार बाबर अली हैं। उनके उम्मीदवार बनने के बाद पार्टी के भीतर आपसी कलह शुरू हो गई है।