अजय कुमार लल्लू ने आगरा जेल में बंद कांग्रेस कार्यकर्ताओं से की मुलाकात, ज्ञानेश कुमार पर लगाए गंभीर आरोप
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने 1 अक्टूबर 2026 को आगरा के जिला कारागार में बंद कांग्रेस कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। ये कार्यकर्ता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के आवास के बाहर 'गद्दार' लिखने के मामले में हिरासत में हैं। मुलाकात के बाद लल्लू ने ज्ञानेश कुमार पर तीखे हमले बोले और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए।
मुख्य घटनाक्रम
अजय कुमार लल्लू ने जेल में बंद कार्यकर्ताओं से मिलने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका से देश के लोकतंत्र, किसानों और युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुँचा है। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है तो उन्हें भी गिरफ्तार किया जाए और उनका नाम भी संबंधित मुकदमे में जोड़ा जाए। उनका यह बयान पार्टी एकजुटता की स्पष्ट राजनीतिक अभिव्यक्ति माना जा रहा है।
लल्लू ने कहा कि यदि किसी को 'चोर' या 'गद्दार' कहना अपराध माना जा रहा है, तो वे इस मुद्दे पर अपनी आवाज़ उठाते रहेंगे। उन्होंने घोषणा की कि कांग्रेस कार्यकर्ता गाँव, गली, चौराहों और दीवारों पर चुनावी प्रक्रिया के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराते रहेंगे।
वोट चोरी और पारदर्शिता के आरोप
लल्लू ने चुनावों में 'वोट चोरी' के पुराने आरोपों को एक बार फिर दोहराया। उनका आरोप है कि मौजूदा सरकार कथित वोट चोरी के ज़रिए सत्ता में आई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी लगातार ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाती रही है और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा निष्पक्षता की माँग करती आई है। गौरतलब है कि ये आरोप विपक्षी दलों की ओर से समय-समय पर उठाए जाते रहे हैं, हालाँकि सरकार इन्हें निराधार बताती है।
नियुक्ति प्रक्रिया पर विवाद
लल्लू ने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव का मुद्दा भी उठाया। उनका दावा है कि पहले इस प्रक्रिया में प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की भूमिका होती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कानून में बदलाव के बाद सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की जगह सरकार द्वारा नामित मंत्री को चयन प्रक्रिया में शामिल किया गया है, जिससे नियुक्ति प्रक्रिया में सरकार का प्रभाव बढ़ गया है। यह मुद्दा पहले भी संसदीय बहसों और न्यायिक समीक्षाओं में उठ चुका है।
संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर जोर
लल्लू ने अपने बयान में यह भी रेखांकित किया कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता लोकतंत्र की नींव के लिए अनिवार्य है। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल केंद्रीय चुनावी निकाय की स्वायत्तता को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर आवाज़ें उठा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून में संशोधन से संवैधानिक संतुलन पर असर पड़ा है।
आगे की राह
कांग्रेस के इस आक्रामक रुख से संकेत मिलता है कि पार्टी चुनावी प्रक्रिया को एक राजनीतिक मुद्दा बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है। जेल में बंद कार्यकर्ताओं की रिहाई और मामले की न्यायिक प्रगति आने वाले दिनों में इस विवाद की दिशा तय करेगी।