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नवरात्रि 2026: अहमदाबाद में पनघट ग्रुप की कॉस्ट्यूम रिहर्सल, 37 देशों में पहुँचा पारंपरिक गरबा

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नवरात्रि 2026: अहमदाबाद में पनघट ग्रुप की कॉस्ट्यूम रिहर्सल, 37 देशों में पहुँचा पारंपरिक गरबा

सारांश

नवरात्रि 2026 से पहले अहमदाबाद के पनघट ग्रुप ने पारंपरिक कच्छी वर्क की पोशाकों में कॉस्ट्यूम रिहर्सल की। 37 देशों में गरबा पहुँचा चुका यह ग्रुप यूनेस्को-मान्यता प्राप्त इस नृत्य की शुद्धता बचाने की मुहिम में जुटा है — ऐसे दौर में जब सोशल मीडिया भक्ति की जगह कंटेंट को प्राथमिकता दे रहा है।

मुख्य बातें

अहमदाबाद के पनघट परफॉर्मिंग आर्ट्स ग्रुप ने नवरात्रि 2026 से पहले विशेष कॉस्ट्यूम रिहर्सल का आयोजन किया।
कॉस्ट्यूम में ओरिजिनल कच्छी वर्क और पैच वर्क का उपयोग, जिसे कलाकारों ने स्वयं हजारों रुपये खर्च कर बनवाया।
पनघट ग्रुप अब तक विश्व के 37 देशों में पारंपरिक गरबा प्रस्तुत कर चुका है।
गरबा को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किया जा चुका है।
ग्रुप एक महीने से लगातार अभ्यास कर रहा है; कलाकार पल ने सोशल मीडिया युग में भक्ति की घटती भावना पर चिंता जताई।

नवरात्रि 2026 की शुरुआत से पहले अहमदाबाद में सांस्कृतिक उत्साह चरम पर है। शहर के जाने-माने पनघट परफॉर्मिंग आर्ट्स ग्रुप ने इस पर्व के लिए एक विशेष कॉस्ट्यूम रिहर्सल का आयोजन किया, जिसमें पारंपरिक पोशाकों से सजे कलाकारों ने गरबा और डांडिया के मनमोहक प्रदर्शन से माहौल को जीवंत कर दिया। डांस स्टेप्स के साथ-साथ स्टेज प्रेजेंटेशन और कॉस्ट्यूम की बारीकियों पर भी विशेष ध्यान दिया गया।

रिहर्सल का स्वरूप और तैयारी

पनघट ग्रुप के को-डायरेक्टर और कोरियोग्राफर जयेश प्रजापति ने बताया कि ग्रुप पिछले एक महीने से लगातार अभ्यास कर रहा है। उन्होंने कहा, 'हमने इस स्पेशल रिहर्सल में एक ऐसा माहौल बनाया है जो पूरी तरह परंपरागत है। कॉस्ट्यूम में ओरिजिनल कच्छी वर्क और पैच वर्क किया गया है, जो आज दुनिया में सबसे महंगी कलाओं में से एक मानी जाती है।' कलाकारों ने ये पोशाकें स्वयं बनवाई हैं और इस पर हजारों रुपये खर्च किए हैं।

यूनेस्को मान्यता और वैश्विक पहचान

जयेश प्रजापति ने गरबा की वैश्विक पहचान का उल्लेख करते हुए कहा, 'हमारा गरबा अब यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची तक पहुँच गया है, इसलिए पूरी दुनिया जानती है कि यह विश्व का सबसे लंबे समय तक चलने वाला नृत्य उत्सव है।' उन्होंने बताया कि पनघट ग्रुप अब तक विश्व के लगभग 37 देशों में पारंपरिक गरबा प्रस्तुत कर चुका है। गरबा को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में शामिल किए जाने के बाद से इस नृत्य रूप की अंतरराष्ट्रीय माँग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

कलाकारों के अनुभव

पनघट परफॉर्मिंग आर्ट्स से पिछले 15 वर्षों से जुड़े अर्पित योगेश भाई भट्ट ने कहा, 'गरबा एक ऐसा माध्यम है जिसके ज़रिए नौ दिनों तक भगवती माता जी की आराधना की जा सकती है।' वहीं 16 वर्षीया युवा कलाकार शगुन प्रजापति ने बताया, 'पनघट में हम जो पारंपरिक गरबा करते हैं, उसमें हम अपने कल्चर को कॉस्ट्यूम के साथ जोड़कर रखते हैं। यह बहुत अच्छी बात है कि हम गुजराती कल्चर को रिप्रेजेंट करते हैं।'

परंपरा बनाम आधुनिकता की चिंता

ग्रुप की कलाकार पल ने सोशल मीडिया के प्रभाव पर चिंता जताई। उनके अनुसार, 'आज की जनरेशन को गरबा का असली मतलब ही नहीं पता। सोशल मीडिया के कारण लोग सिर्फ फोटो खिंचवाने, सजावट देखने और दो-तीन बार गरबा करके निकल जाते हैं। जब कंटेंट बनता है, तो भक्ति पीछे छूट जाती है।' उनकी यह टिप्पणी उस व्यापक बहस को रेखांकित करती है जो नवरात्रि जैसे पर्वों के व्यावसायीकरण और उनके आध्यात्मिक मूल के बीच के अंतर को लेकर देशभर में चल रही है।

परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का संकल्प

जयेश प्रजापति ने स्पष्ट किया कि ग्रुप की प्राथमिकता असली गरबा को जीवित रखना है — पारंपरिक ताली और चपटी सहित उन सभी तत्वों को, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी चले आ रहे हैं। नवरात्रि के नौ दिनों में पनघट ग्रुप की प्रस्तुतियाँ गुजरात की सांस्कृतिक थाती को वैश्विक मंच पर उजागर करने का एक और अवसर होंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन देश के भीतर ही इसकी आत्मा को लेकर सवाल उठ रहे हैं — जब भक्ति की जगह 'कंटेंट' लेने लगे, तो संरक्षण का दावा खोखला पड़ सकता है। कलाकार पल की चिंता सिर्फ गरबा की नहीं, बल्कि हर उस परंपरा की है जो सोशल मीडिया के दबाव में अपना अर्थ खो रही है। असली सवाल यह है कि 37 देशों में पहुँचा गरबा क्या अपने ही घर में अपनी जड़ें बचा पाएगा?
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पनघट परफॉर्मिंग आर्ट्स ग्रुप क्या है?
पनघट अहमदाबाद का एक प्रतिष्ठित सांस्कृतिक ग्रुप है जो पारंपरिक गुजराती गरबा और डांडिया के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए जाना जाता है। यह ग्रुप अब तक विश्व के लगभग 37 देशों में पारंपरिक गरबा प्रस्तुत कर चुका है।
गरबा को यूनेस्को की विरासत सूची में कब शामिल किया गया?
गरबा को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Cultural Heritage) सूची में शामिल किया जा चुका है, जिससे इसे विश्व का सबसे लंबे समय तक चलने वाला नृत्य उत्सव के रूप में वैश्विक पहचान मिली है। पनघट ग्रुप के कोरियोग्राफर जयेश प्रजापति के अनुसार यह मान्यता पूरी तरह उचित है।
नवरात्रि 2026 से पहले पनघट ग्रुप ने कौन-सी विशेष तैयारी की?
पनघट ग्रुप ने नवरात्रि 2026 के लिए एक विशेष कॉस्ट्यूम रिहर्सल आयोजित की जिसमें कलाकारों ने ओरिजिनल कच्छी वर्क और पैच वर्क से तैयार पारंपरिक पोशाकें पहनीं। ग्रुप पिछले एक महीने से लगातार अभ्यास कर रहा है और गरबा के मूल स्टेप्स — ताली और चपटी — को प्राथमिकता दी जा रही है।
क्या सोशल मीडिया गरबा की परंपरा को प्रभावित कर रहा है?
पनघट ग्रुप की कलाकार पल ने इस चिंता को रेखांकित किया है कि सोशल मीडिया के कारण लोग गरबा को भक्ति के बजाय कंटेंट की तरह देखने लगे हैं। उनके अनुसार लोग फोटो खिंचवाने और सजावट देखने के बाद निकल जाते हैं, जिससे नौ दिनों की माता जी की आराधना का असली भाव कमज़ोर हो रहा है।
पनघट ग्रुप से युवा कलाकार कैसे जुड़े हैं?
16 वर्षीया शगुन प्रजापति जैसी युवा कलाकार पनघट से जुड़कर पारंपरिक गुजराती संस्कृति को कॉस्ट्यूम और नृत्य के माध्यम से जीवित रख रही हैं। वहीं अर्पित योगेश भाई भट्ट जैसे अनुभवी कलाकार पिछले 15 वर्षों से ग्रुप का हिस्सा हैं।
राष्ट्र प्रेस
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