नवरात्रि 2026: अहमदाबाद में पनघट ग्रुप की कॉस्ट्यूम रिहर्सल, 37 देशों में पहुँचा पारंपरिक गरबा
सारांश
मुख्य बातें
नवरात्रि 2026 की शुरुआत से पहले अहमदाबाद में सांस्कृतिक उत्साह चरम पर है। शहर के जाने-माने पनघट परफॉर्मिंग आर्ट्स ग्रुप ने इस पर्व के लिए एक विशेष कॉस्ट्यूम रिहर्सल का आयोजन किया, जिसमें पारंपरिक पोशाकों से सजे कलाकारों ने गरबा और डांडिया के मनमोहक प्रदर्शन से माहौल को जीवंत कर दिया। डांस स्टेप्स के साथ-साथ स्टेज प्रेजेंटेशन और कॉस्ट्यूम की बारीकियों पर भी विशेष ध्यान दिया गया।
रिहर्सल का स्वरूप और तैयारी
पनघट ग्रुप के को-डायरेक्टर और कोरियोग्राफर जयेश प्रजापति ने बताया कि ग्रुप पिछले एक महीने से लगातार अभ्यास कर रहा है। उन्होंने कहा, 'हमने इस स्पेशल रिहर्सल में एक ऐसा माहौल बनाया है जो पूरी तरह परंपरागत है। कॉस्ट्यूम में ओरिजिनल कच्छी वर्क और पैच वर्क किया गया है, जो आज दुनिया में सबसे महंगी कलाओं में से एक मानी जाती है।' कलाकारों ने ये पोशाकें स्वयं बनवाई हैं और इस पर हजारों रुपये खर्च किए हैं।
यूनेस्को मान्यता और वैश्विक पहचान
जयेश प्रजापति ने गरबा की वैश्विक पहचान का उल्लेख करते हुए कहा, 'हमारा गरबा अब यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची तक पहुँच गया है, इसलिए पूरी दुनिया जानती है कि यह विश्व का सबसे लंबे समय तक चलने वाला नृत्य उत्सव है।' उन्होंने बताया कि पनघट ग्रुप अब तक विश्व के लगभग 37 देशों में पारंपरिक गरबा प्रस्तुत कर चुका है। गरबा को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में शामिल किए जाने के बाद से इस नृत्य रूप की अंतरराष्ट्रीय माँग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
कलाकारों के अनुभव
पनघट परफॉर्मिंग आर्ट्स से पिछले 15 वर्षों से जुड़े अर्पित योगेश भाई भट्ट ने कहा, 'गरबा एक ऐसा माध्यम है जिसके ज़रिए नौ दिनों तक भगवती माता जी की आराधना की जा सकती है।' वहीं 16 वर्षीया युवा कलाकार शगुन प्रजापति ने बताया, 'पनघट में हम जो पारंपरिक गरबा करते हैं, उसमें हम अपने कल्चर को कॉस्ट्यूम के साथ जोड़कर रखते हैं। यह बहुत अच्छी बात है कि हम गुजराती कल्चर को रिप्रेजेंट करते हैं।'
परंपरा बनाम आधुनिकता की चिंता
ग्रुप की कलाकार पल ने सोशल मीडिया के प्रभाव पर चिंता जताई। उनके अनुसार, 'आज की जनरेशन को गरबा का असली मतलब ही नहीं पता। सोशल मीडिया के कारण लोग सिर्फ फोटो खिंचवाने, सजावट देखने और दो-तीन बार गरबा करके निकल जाते हैं। जब कंटेंट बनता है, तो भक्ति पीछे छूट जाती है।' उनकी यह टिप्पणी उस व्यापक बहस को रेखांकित करती है जो नवरात्रि जैसे पर्वों के व्यावसायीकरण और उनके आध्यात्मिक मूल के बीच के अंतर को लेकर देशभर में चल रही है।
परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का संकल्प
जयेश प्रजापति ने स्पष्ट किया कि ग्रुप की प्राथमिकता असली गरबा को जीवित रखना है — पारंपरिक ताली और चपटी सहित उन सभी तत्वों को, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी चले आ रहे हैं। नवरात्रि के नौ दिनों में पनघट ग्रुप की प्रस्तुतियाँ गुजरात की सांस्कृतिक थाती को वैश्विक मंच पर उजागर करने का एक और अवसर होंगी।