एम्स ऋषिकेश का छठा दीक्षांत समारोह: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने डॉक्टरों को दिया सेवा और नैतिकता का मंत्र

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एम्स ऋषिकेश का छठा दीक्षांत समारोह: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने डॉक्टरों को दिया सेवा और नैतिकता का मंत्र

सारांश

एम्स ऋषिकेश में छठे दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने युवा डॉक्टरों को सेवा, ईमानदारी और नैतिकता का संदेश दिया। CM धामी ने पहाड़ी क्षेत्रों में सेवा की अपील की। स्वर्ण पदक व डिग्रियां प्रदान की गईं।

Key Takeaways

  • 23 अप्रैल 2025 को एम्स ऋषिकेश में छठा दीक्षांत समारोह आयोजित हुआ।
  • उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन मुख्य अतिथि रहे और उन्होंने स्वर्ण पदक व डिग्रियां प्रदान कीं।
  • उपराष्ट्रपति ने वार्षिक पत्रिका 'रुद्राक्ष' का विमोचन किया।
  • मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने युवा डॉक्टरों से पहाड़ी और दूरदराज क्षेत्रों में सेवा देने की अपील की।
  • एम्स ऋषिकेश टेलीमेडिसिन और हेलीकॉप्टर सेवा के जरिए दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचा रहा है।
  • केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि देश में स्वास्थ्य अवसंरचना को निरंतर मजबूत किया जा रहा है।

ऋषिकेश, 23 अप्रैल 2025 (राष्ट्र प्रेस)। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में गुरुवार, 23 अप्रैल को छठे दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस ऐतिहासिक अवसर पर स्नातक हो रहे चिकित्सा छात्रों को डिग्रियां, स्वर्ण पदक और पुरस्कार प्रदान किए गए। समारोह में उपराष्ट्रपति ने युवा डॉक्टरों से अपील की कि वे चिकित्सा पेशे को केवल आजीविका नहीं, बल्कि मानव सेवा का माध्यम मानें।

समारोह में कौन-कौन रहे मौजूद

इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और राज्यपाल गुरमीत सिंह भी विशेष रूप से शामिल हुए। इन सभी गणमान्य हस्तियों की उपस्थिति ने समारोह को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया।

समारोह के दौरान उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने संस्थान की वार्षिक पत्रिका 'रुद्राक्ष' का विमोचन किया। इस पत्रिका में पिछले एक वर्ष में संस्थान की शैक्षणिक उपलब्धियों, शोध कार्यों और प्रगति का विस्तृत विवरण है।

उपराष्ट्रपति का संदेश — सेवा और नैतिकता सर्वोपरि

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने स्नातक छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह केवल शिक्षा की समाप्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि यह एक नई और बड़ी जिम्मेदारी की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि वर्षों की मेहनत, अनुशासन और समर्पण का यह परिणाम अब समाज की सेवा में लगाया जाना चाहिए।

उन्होंने जोर देकर कहा कि चिकित्सा सेवा महज एक पेशा नहीं है — यह समाज के प्रति एक गहरी और अटूट जिम्मेदारी है। उन्होंने युवा डॉक्टरों से ईमानदारी, संवेदनशीलता और सेवाभाव को अपने जीवन का मूल आधार बनाने की अपील की।

उपराष्ट्रपति ने कोरोना महामारी के दौरान भारत की भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने इस वैश्विक संकट का सशक्त और प्रभावी ढंग से सामना किया। विशाल टीकाकरण अभियान और अन्य देशों को टीके उपलब्ध कराने के प्रयासों को उन्होंने मानवता और वैश्विक सहयोग की मिसाल बताया।

केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री के उद्बोधन

केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने स्नातक छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में काम करना मानव सेवा का सर्वोच्च माध्यम है। उन्होंने युवा डॉक्टरों से निरंतर सीखने, मरीजों के साथ सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार रखने और सामाजिक दायित्व निभाने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी बताया कि देश में स्वास्थ्य अवसंरचना को सुदृढ़ करने के प्रयास निरंतर जारी हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर को युवा डॉक्टरों के जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ बताया। उन्होंने विशेष रूप से पहाड़ी और दूरदराज क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर आवश्यकता का उल्लेख करते हुए नवस्नातक डॉक्टरों से वहां सेवा देने की अपील की। यह अपील इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उत्तराखंड के दुर्गम इलाकों में चिकित्सकों की भारी कमी एक पुरानी और गंभीर समस्या रही है।

एम्स ऋषिकेश की उपलब्धियां और भविष्य की दिशा

समारोह में एम्स ऋषिकेश की विशेष उपलब्धियों की भी सराहना की गई। संस्थान ने टेलीमेडिसिन, हेलीकॉप्टर आपातकालीन सेवा और अन्य अत्याधुनिक सुविधाओं के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है। यह संस्थान उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों के लिए एक महत्वपूर्ण चिकित्सा केंद्र के रूप में उभरा है।

गौरतलब है कि एम्स ऋषिकेश की स्थापना वर्ष 2012 में हुई थी और यह संस्थान अपेक्षाकृत कम समय में ही राष्ट्रीय स्तर पर चिकित्सा शिक्षा और सेवा का एक विश्वसनीय केंद्र बन गया है। देश के अन्य नए एम्स संस्थानों की तुलना में ऋषिकेश एम्स का प्रदर्शन शोध और सेवा दोनों मोर्चों पर सराहनीय रहा है।

समारोह के अंत में विभिन्न पाठ्यक्रमों के छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को उपराष्ट्रपति द्वारा स्वर्ण पदक एवं विशेष पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। आने वाले वर्षों में एम्स ऋषिकेश से और अधिक विशेषज्ञ चिकित्सकों के तैयार होने की उम्मीद है, जो उत्तराखंड सहित पूरे उत्तर भारत की स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई देंगे।

Point of View

बल्कि उत्तराखंड की स्वास्थ्य चुनौतियों के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण संकेत है — जहां पहाड़ी जिलों में प्रति हजार आबादी पर डॉक्टरों की संख्या राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। मुख्यमंत्री धामी की दूरदराज इलाकों में सेवा की अपील सुनने में अच्छी लगती है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार ग्रामीण पोस्टिंग के लिए पर्याप्त प्रोत्साहन और बुनियादी सुविधाएं दे रही है? उपराष्ट्रपति का कोरोना काल में भारत की भूमिका का उल्लेख प्रासंगिक है, लेकिन देश में सार्वजनिक स्वास्थ्य बजट अभी भी जीडीपी के मात्र 2.1%25 के आसपास है — जो WHO के अनुशंसित 5%25 से बहुत दूर है। एम्स जैसे संस्थान तभी अपनी पूरी क्षमता दिखा सकते हैं जब नीतिगत और वित्तीय प्रतिबद्धता भी उसी स्तर की हो।
NationPress
24/04/2026

Frequently Asked Questions

एम्स ऋषिकेश का छठा दीक्षांत समारोह कब और कहां हुआ?
23 अप्रैल 2025 को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में छठा दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। इस समारोह में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन मुख्य अतिथि रहे।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने एम्स के छात्रों को क्या संदेश दिया?
उपराष्ट्रपति ने कहा कि चिकित्सा सेवा केवल एक पेशा नहीं बल्कि समाज के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने छात्रों से ईमानदारी, संवेदनशीलता और सेवाभाव को हमेशा प्राथमिकता देने की अपील की।
एम्स ऋषिकेश दीक्षांत समारोह में कौन-कौन से नेता शामिल हुए?
समारोह में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और राज्यपाल गुरमीत सिंह उपस्थित रहे।
'रुद्राक्ष' पत्रिका क्या है और इसका विमोचन किसने किया?
'रुद्राक्ष' एम्स ऋषिकेश की वार्षिक पत्रिका है, जिसमें संस्थान की शैक्षणिक उपलब्धियों और शोध कार्यों का विवरण होता है। इसका विमोचन उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने दीक्षांत समारोह के दौरान किया।
एम्स ऋषिकेश पहाड़ी इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं कैसे पहुंचाता है?
एम्स ऋषिकेश टेलीमेडिसिन और हेलीकॉप्टर आपातकालीन सेवा के माध्यम से दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाता है। यह संस्थान उत्तर भारत के दुर्गम इलाकों के लिए एक प्रमुख चिकित्सा केंद्र के रूप में कार्य करता है।
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