पीडीए सम्मेलन में खाली कुर्सियाँ: भाजपा ने अखिलेश पर साधा निशाना, 'प्रण पत्र' को बताया खोखला
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) के पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) सम्मेलन और पार्टी की राजनीतिक रणनीति को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 19 अक्टूबर 2026 को तीखा पलटवार किया। कन्नौज में आयोजित पीडीए सम्मेलन के दौरान कुर्सियाँ खाली रहने और सपा नेतृत्व द्वारा घोषणापत्र का नाम बदलकर 'प्रण पत्र' रखने के मुद्दे पर भाजपा नेताओं ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को घेरा।
गुटबाजी पर भाजपा का सवाल
भाजपा प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि सपा के प्रदेश अध्यक्ष और अखिलेश यादव के बीच बातचीत के बाद पार्टी की प्रदेश कार्यकारिणी और सभी फ्रंटल संगठनों को भंग कर दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि सपा के भीतर आखिर किस तरह की गुटबाजी चल रही है।
उन्होंने कहा कि इससे पहले गोरखपुर में हाथापाई की घटना के बाद वहाँ की कार्यकारिणी भंग की गई थी और अब कन्नौज में पीडीए सम्मेलन में कुर्सियाँ खाली रहने के बाद स्थानीय कार्यकारिणी को भी भंग कर दिया गया। उन्होंने कहा कि सपा ने पहले विधान परिषद में अपना नेता बदला, फिर उत्तराखंड में पार्टी अध्यक्ष को बदला और चुनाव के बीच अपना उम्मीदवार भी बदल दिया।
'प्रण पत्र' पर भाजपा की प्रतिक्रिया
सपा की ओर से 26 नवंबर को संविधान दिवस के अवसर पर घोषणापत्र जारी करने की योजना पर भाजपा प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि इस बार सपा ने घोषणापत्र का नाम बदलकर 'प्रण पत्र' कर दिया है, लेकिन केवल नाम बदलने से इरादे नहीं बदलते। उनका यह बयान सपा की नई ब्रांडिंग रणनीति पर सीधा कटाक्ष माना जा रहा है।
मंत्री कश्यप का सपा से सवाल
यूपी सरकार में मंत्री नरेंद्र कुमार कश्यप ने कहा कि पीडीए का घोषणापत्र जारी करने से पहले अखिलेश यादव को अपनी पार्टी के सदस्यों और उत्तर प्रदेश की जनता को जवाब देना चाहिए। उन्होंने राज्यसभा के लिए सपा द्वारा नामांकित दो उम्मीदवारों का उल्लेख किया — एक अखिलेश यादव के चाचा और दूसरे एक बेहद अमीर व्यक्ति — और इस पर सवाल उठाया कि सपा ने किन लोगों को नामांकित किया।
चंद्रशेखर आजाद और कांग्रेस पर भाजपा सांसद का पलटवार
भाजपा सांसद प्रकाश पाल ने आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दी गई चुनौती पर कहा कि चंद्रशेखर की राजनीति वैसे ही खत्म होने वाली है और उन्हें बड़ी-बड़ी बातें नहीं करनी चाहिए। पाल ने योगी आदित्यनाथ को 'अपराजित योद्धा' बताते हुए कहा कि वे पाँच बार सांसद, एक बार विधान परिषद सदस्य और एक बार विधायक रह चुके हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत के उस बयान पर — जिसमें कहा गया था कि गांधी और नेहरू को अपना नेता नहीं मानने वालों को देशभक्त नहीं माना जा सकता — पाल ने कहा कि किसे अपना नेता मानना है, यह हर व्यक्ति का निजी विचार है और सभी को इसकी स्वतंत्रता है। उन्होंने सरदार पटेल को नेहरू से बड़ा बताते हुए आरोप लगाया कि नेहरू वोटों की चोरी करके प्रधानमंत्री बने थे।
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ धीरे-धीरे तेज हो रही हैं और सपा का पीडीए फॉर्मूला भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक चुनौती के रूप में उभरा है। गौरतलब है कि भाजपा का यह पलटवार दर्शाता है कि वह सपा के संगठनात्मक कमज़ोरियों को जनता के बीच उठाने की रणनीति पर काम कर रही है। आने वाले हफ्तों में दोनों दलों के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।