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असीम अरुण का अखिलेश पर हमला: पीडीए फॉर्मूला सत्ता की सीढ़ी, कन्नौज से ढाई साल में एक रात नहीं

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असीम अरुण का अखिलेश पर हमला: पीडीए फॉर्मूला सत्ता की सीढ़ी, कन्नौज से ढाई साल में एक रात नहीं

सारांश

भाजपा मंत्री असीम अरुण ने अखिलेश यादव के पीडीए नारे को सत्ता की सीढ़ी बताया और कन्नौज में ढाई साल में एक रात न रुकने पर सवाल उठाए। सम्मेलन की खाली कुर्सियों को उन्होंने सपा के बिखरते जनाधार का प्रमाण बताया।

मुख्य बातें

समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने 19 अक्टूबर 2026 को अखिलेश यादव के पीडीए फॉर्मूले को चुनावी ढोंग करार दिया।
अरुण का आरोप — अखिलेश ढाई साल में एक रात भी कन्नौज संसदीय क्षेत्र में नहीं रुके।
कन्नौज पीडीए सम्मेलन में खाली कुर्सियों के बाद जिला कार्यकारिणी भंग की गई।
अरुण ने सपा को नीति और नैतिकता दोनों पर वैचारिक रूप से खोखला बताया।
PM मोदी और CM योगी आदित्यनाथ की डबल इंजन सरकार को विकास का प्रतिमान बताया।

उत्तर प्रदेश के समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने 19 अक्टूबर 2026 को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा राजनीतिक प्रहार करते हुए उनके पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को महज एक चुनावी दिखावा बताया। अरुण ने आरोप लगाया कि यह नारा जनकल्याण के लिए नहीं, बल्कि केवल मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुँचने का माध्यम है।

कन्नौज से ढाई साल में एक रात भी नहीं

मंत्री असीम अरुण ने कहा कि कन्नौज की जनता ने अखिलेश यादव को सांसद चुनकर बड़ी भूल की है। उन्होंने कहा, ढाई साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अखिलेश एक रात भी अपने संसदीय क्षेत्र में नहीं ठहरे। उनके अनुसार, अखिलेश केवल रस्म अदायगी के लिए आते हैं — एक्सप्रेसवे पर गाड़ी रोककर चंद कार्यकर्ताओं से मिलते हैं और वापस लखनऊ लौट जाते हैं।

कन्नौज सम्मेलन की खाली कुर्सियाँ बनीं निशाने पर

कन्नौज में हाल ही में हुए सपा के पीडीए सम्मेलन में खाली कुर्सियाँ और पसरे सन्नाटे के चलते जिला कार्यकारिणी भंग किए जाने पर अरुण ने तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सम्मेलन की तस्वीरें सपा के जमीनी जनाधार का असली आईना हैं। अरुण के अनुसार, कार्यकर्ताओं की गैर-मौजूदगी और जनता की बेरुखी कोई अप्रत्याशित बात नहीं — जो बिखराव कन्नौज में दिखा, वही पूरे प्रदेश में सपा की वास्तविक स्थिति है।

अखिलेश पर विजन और नीति का अभाव

अरुण ने सवाल उठाया कि चुनाव नज़दीक आते ही अखिलेश यादव को पीडीए की याद सताने लगती है, लेकिन कुर्सी मिलने के बाद वे क्या करेंगे, इसका कोई जवाब नहीं देते। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और भ्रष्टाचार जैसे बुनियादी मसलों पर अखिलेश मौन रहते हैं। महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा के सवालों पर भी वे हमेशा चुप्पी साध लेते हैं।

सपा को बताया वैचारिक रूप से खोखला

अरुण ने समाजवादी पार्टी पर और कड़े शब्दों में कहा कि जिस दल का न कोई स्पष्ट विजन हो और न ठोस नीति, जिसका एकमात्र ध्येय सिर्फ अपने परिवार को सत्ता की मलाई खिलाना हो, उसकी ऐसी ही दुर्दशा तय है। उनके मुताबिक, सपा नीति और नैतिकता, दोनों पैमानों पर पूरी तरह दिवालिया हो चुकी है।

भाजपा के 'डबल इंजन' मॉडल का बचाव

सपा पर हमले के साथ-साथ अरुण ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की डबल इंजन सरकार की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) लोक-कल्याणकारी नीतियों और उच्च राजनीतिक नैतिकता की बुनियाद पर जनता के भरोसे के साथ निरंतर आगे बढ़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा जैसे विपक्षी दल सिर्फ अवसरवादी नारों के सहारे अपनी सियासी जमीन तलाशते फिर रहे हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की आहट तेज होती जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भाजपा की उस रणनीति का हिस्सा है जो 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा के पीडीए गठजोड़ को जमीनी स्तर पर कमज़ोर करने की कोशिश कर रही है। कन्नौज सम्मेलन की खाली कुर्सियाँ वाकई सोचने पर मजबूर करती हैं — लेकिन यह भी उतना ही सच है कि भाजपा शासन में उत्तर प्रदेश में पिछड़े और दलित समुदायों की हिस्सेदारी और सत्ता-भागीदारी के सवाल अनुत्तरित हैं। पीडीए की वैचारिक काट तभी विश्वसनीय होगी जब भाजपा अपनी सरकार में इन्हीं वर्गों को नीतिगत प्राथमिकता का ठोस प्रमाण दे सके — केवल विपक्ष की विफलताओं को गिनाना पर्याप्त नहीं।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असीम अरुण ने अखिलेश यादव के पीडीए फॉर्मूले पर क्या कहा?
उत्तर प्रदेश के मंत्री असीम अरुण ने अखिलेश यादव के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को जनकल्याण का नारा नहीं, बल्कि केवल मुख्यमंत्री की कुर्सी पाने का चुनावी ढोंग बताया। उनके अनुसार चुनाव नज़दीक आते ही अखिलेश को यह नारा याद आता है।
कन्नौज पीडीए सम्मेलन में क्या हुआ?
कन्नौज में हुए सपा के पीडीए सम्मेलन में बड़ी संख्या में कुर्सियाँ खाली रहीं और माहौल सन्नाटे में डूबा रहा, जिसके बाद जिला कार्यकारिणी भंग कर दी गई। असीम अरुण ने इसे सपा के बिखरते जमीनी जनाधार का सबूत बताया।
असीम अरुण ने कन्नौज से अखिलेश यादव की अनुपस्थिति पर क्या आरोप लगाए?
असीम अरुण ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव ढाई साल से अधिक समय में एक रात भी अपने कन्नौज संसदीय क्षेत्र में नहीं रुके। उनके मुताबिक, अखिलेश केवल एक्सप्रेसवे पर गाड़ी रोककर कुछ कार्यकर्ताओं से मिलते हैं और वापस लखनऊ लौट जाते हैं।
असीम अरुण ने समाजवादी पार्टी की आलोचना में क्या कहा?
असीम अरुण ने सपा को वैचारिक रूप से खोखला और नीति व नैतिकता दोनों पर दिवालिया बताया। उनका कहना था कि जिस दल का एकमात्र ध्येय परिवार को सत्ता की मलाई खिलाना हो, उसकी यही नियति है।
यह बयान उत्तर प्रदेश की राजनीति में क्यों अहम है?
यह बयान उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में महत्त्वपूर्ण है, जब भाजपा और सपा के बीच पिछड़े व दलित मतदाताओं को लेकर सीधी टक्कर है। सपा के पीडीए गठजोड़ को ज़मीनी स्तर पर चुनौती देना भाजपा की चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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