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अंबुजा सीमेंट्स और ब्रिटेन की लीलाक की साझेदारी, कच्छ में बनेगा विश्वस्तरीय लो-कार्बन सीमेंट प्लांट

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अंबुजा सीमेंट्स और ब्रिटेन की लीलाक की साझेदारी, कच्छ में बनेगा विश्वस्तरीय लो-कार्बन सीमेंट प्लांट

सारांश

अंबुजा सीमेंट्स और ब्रिटेन की लीलाक लिमिटेड ने कच्छ के सांघी प्लांट में वाणिज्यिक स्तर का लो-कार्बन सीमेंट प्रोजेक्ट शुरू करने का ऐलान किया। सफल रहा तो यह मॉडल 7-8 गुना बढ़ाया जा सकेगा और सालाना 10 लाख टन से अधिक CO₂ कैप्चर होगी — वैश्विक सीमेंट उद्योग के लिए एक दोहराई जा सकने वाली मिसाल।

मुख्य बातें

अंबुजा सीमेंट्स और लीलाक लिमिटेड (UK) ने 22 जून 2026 को रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की।
परियोजना गुजरात के कच्छ के सांघीपुरम में 6.6 एमटीपीए क्षमता वाले सांघी प्लांट में स्थापित होगी।
सफल होने पर परियोजना को 7-8 गुना विस्तारित किया जा सकेगा; सालाना 10 लाख टन से अधिक CO₂ कैप्चर का लक्ष्य।
अंबुजा सीमेंट्स का लक्ष्य 2050 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन ; SBTi से मान्यता प्राप्त।
कंपनी के पास लगभग 1 गीगावाट की कैप्टिव हरित ऊर्जा क्षमता पहले से मौजूद।
तकनीक उत्पादन प्रक्रिया में कोयले की खपत शून्य करने और CCU की लागत घटाने के लिए डिज़ाइन की गई।

अदाणी ग्रुप की अनुषंगी कंपनी अंबुजा सीमेंट्स ने 22 जून 2026 को घोषणा की कि उसने ब्रिटेन स्थित स्वच्छ प्रौद्योगिकी कंपनी लीलाक लिमिटेड के साथ एक रणनीतिक साझेदारी की है। इस साझेदारी के तहत गुजरात के कच्छ जिले के सांघीपुरम में दुनिया के सबसे बड़े वाणिज्यिक स्तर के लो-कार्बन सीमेंट उत्पादन मार्गों में से एक विकसित किया जाएगा। यह परियोजना भारत के सीमेंट क्षेत्र में डीकार्बोनाइजेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

परियोजना का विवरण और स्थान

यह वाणिज्यिक प्रदर्शन परियोजना सांघीपुरम स्थित अंबुजा सीमेंट्स के 6.6 एमटीपीए क्षमता वाले सांघी प्लांट में स्थापित की जाएगी। इसमें लीलाक की कार्बन कैप्चर और हाइब्रिड इलेक्ट्रिक हीटिंग तकनीक को एकीकृत कर कम उत्सर्जन वाले सीमेंट उत्पादन की संभावनाओं का व्यावहारिक परीक्षण किया जाएगा। यह तकनीक उत्पादन प्रक्रिया में कोयले की खपत को शून्य तक लाने और वैकल्पिक ईंधनों के बेहतर उपयोग के लिए विशेष रूप से तैयार की गई है।

स्केलिंग और कार्बन कैप्चर क्षमता

कंपनी के अनुसार, यदि यह परियोजना सफल रहती है, तो इसे 7 से 8 गुना तक विस्तारित किया जा सकता है। इससे प्रतिवर्ष 10 लाख टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड को कैप्चर करना संभव होगा। कंपनी का मानना है कि यह मॉडल भारत सहित वैश्विक स्तर पर लो-कार्बन सीमेंट उत्पादन के लिए एक दोहराई जा सकने वाली और आर्थिक रूप से व्यवहार्य व्यवस्था साबित हो सकती है। यह साझेदारी कार्बन कैप्चर एवं उपयोग (CCU) तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाने की लागत को भी कम करने में सहायक होगी।

कंपनी नेतृत्व की प्रतिक्रिया

अंबुजा सीमेंट्स के निदेशक करण अदाणी ने कहा, 'लीलाक के साथ हमारी साझेदारी इस बात का प्रमाण है कि हम ऐसी नई तकनीकों का मूल्यांकन कर रहे हैं जो उत्पादन प्रक्रिया से होने वाले उत्सर्जन को कम कर सकें, ऊर्जा दक्षता बढ़ा सकें और दीर्घकालिक टिकाऊ विकास को समर्थन दे सकें।' उन्होंने यह भी कहा कि यह पहल भविष्य के लिए विश्वस्तरीय विनिर्माण सुविधाएँ विकसित करने की दीर्घकालिक सोच के अनुरूप है।

लीलाक लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डेनियल रेनी ने कहा, 'हमारा लक्ष्य कम लागत और कम-कार्बन वाले सीमेंट उत्पादन के लिए वाणिज्यिक स्तर की परियोजना विकसित करना है। हम मिलकर वैश्विक सीमेंट उद्योग के लिए एक आर्थिक, दोहराई जा सकने वाली और भविष्य के अनुरूप समाधान प्रस्तुत करना चाहते हैं।'

नेट-ज़ीरो लक्ष्य और हरित ऊर्जा

यह साझेदारी अंबुजा सीमेंट्स की व्यापक डीकार्बोनाइजेशन रणनीति का अभिन्न हिस्सा है, जो वर्ष 2050 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन हासिल करने के लक्ष्य से जुड़ी है। इस लक्ष्य को साइंस बेस्ड टार्गेट्स इनिशिएटिव (SBTi) से मान्यता भी मिली हुई है। गौरतलब है कि अंबुजा सीमेंट्स के पास वर्तमान में लगभग 1 गीगावाट की कैप्टिव हरित ऊर्जा क्षमता है, जिसके जरिए नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग तेज़ी से बढ़ाया जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक सीमेंट उद्योग — जो कुल वैश्विक CO₂ उत्सर्जन में लगभग 8% का योगदान करता है — पर डीकार्बोनाइजेशन का दबाव लगातार बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में इस परियोजना के परिणाम भारत के अन्य सीमेंट उत्पादकों के लिए भी एक मानक स्थापित कर सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी तब होगी जब वाणिज्यिक प्रदर्शन के आँकड़े सामने आएंगे — क्योंकि कार्बन कैप्चर तकनीक अभी तक वैश्विक स्तर पर सीमेंट उद्योग में बड़े पैमाने पर लागत-प्रभावी साबित नहीं हुई है। यह ऐसे समय में आई है जब भारत का सीमेंट क्षेत्र तेज़ी से विस्तार कर रहा है, और उत्सर्जन में कटौती के दावों की जाँच के लिए स्वतंत्र सत्यापन तंत्र की माँग भी बढ़ रही है। 2050 का नेट-ज़ीरो लक्ष्य दूरगामी है, परंतु निकट भविष्य में — यानी 2030 तक — क्या मील के पत्थर तय किए गए हैं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। बिना पारदर्शी मापन ढाँचे के, यह घोषणा 'ग्रीनवाशिंग' के आरोपों से बच नहीं पाएगी।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंबुजा सीमेंट्स और लीलाक लिमिटेड की साझेदारी क्या है?
यह 22 जून 2026 को घोषित एक रणनीतिक साझेदारी है, जिसके तहत दोनों कंपनियाँ गुजरात के कच्छ जिले के सांघीपुरम में वाणिज्यिक स्तर का लो-कार्बन सीमेंट उत्पादन केंद्र विकसित करेंगी। इसमें लीलाक की कार्बन कैप्चर और हाइब्रिड इलेक्ट्रिक हीटिंग तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
इस परियोजना से कितना CO₂ कैप्चर किया जा सकेगा?
कंपनी के अनुसार, यदि परियोजना सफल रही और इसे 7 से 8 गुना तक बढ़ाया गया, तो प्रतिवर्ष 10 लाख टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड कैप्चर की जा सकेगी। यह भारत और वैश्विक स्तर पर लो-कार्बन सीमेंट उत्पादन का एक दोहराई जा सकने वाला मॉडल बन सकता है।
यह परियोजना किस प्लांट में स्थापित होगी?
यह परियोजना सांघीपुरम स्थित अंबुजा सीमेंट्स के सांघी प्लांट में स्थापित होगी, जिसकी उत्पादन क्षमता 6.6 एमटीपीए है। यह प्लांट गुजरात के कच्छ जिले में स्थित है।
अंबुजा सीमेंट्स का नेट-ज़ीरो लक्ष्य क्या है?
अंबुजा सीमेंट्स का लक्ष्य वर्ष 2050 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन हासिल करना है, जिसे साइंस बेस्ड टार्गेट्स इनिशिएटिव (SBTi) से मान्यता मिली हुई है। इसके लिए कंपनी डीकार्बोनाइजेशन रणनीति के तहत कार्बन कैप्चर, हरित ऊर्जा और विद्युतीकरण पर काम कर रही है।
लीलाक की तकनीक सीमेंट उत्पादन में कैसे काम करती है?
लीलाक की हाइब्रिड इलेक्ट्रिक हीटिंग और कार्बन कैप्चर तकनीक उत्पादन प्रक्रिया में नवीकरणीय बिजली के अधिक उपयोग और अनिवार्य CO₂ उत्सर्जन को कैप्चर करने में सहायक है। यह तकनीक उत्पादन में कोयले की खपत को शून्य तक लाने और वैकल्पिक ईंधनों के बेहतर उपयोग के लिए डिज़ाइन की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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