अदाणी एंटरप्राइजेज और फ्रांस की डायोक्सिकल की साझेदारी, भारत में लो-कार्बन फॉर्मिक एसिड उत्पादन की शुरुआत
सारांश
मुख्य बातें
अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) और फ्रांस की क्लीन-टेक कंपनी डायोक्सिकल ने 10 जुलाई 2026 को भारत में कम-कार्बन रासायनिक उत्पादन को विकसित करने और व्यावसायिक स्तर पर विस्तारित करने के लिए एक दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की। इस पहल के तहत अहमदाबाद स्थित अदाणी ग्रुप के एक संयंत्र में पायलट परियोजना शुरू होगी, जहाँ कैप्चर किए गए कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) और नवीकरणीय बिजली का उपयोग कर फॉर्मिक एसिड का उत्पादन किया जाएगा।
साझेदारी का स्वरूप और तकनीकी आधार
इस गठजोड़ में डायोक्सिकल की विद्युत-आधारित रासायनिक उत्पादन तकनीक (इलेक्ट्रोकेमिकल प्रक्रिया) को अदाणी ग्रुप की स्वच्छ ऊर्जा क्षमता, सुदृढ़ इंफ्रास्ट्रक्चर और परियोजना क्रियान्वयन की विशेषज्ञता के साथ जोड़ा जाएगा। कंपनी के बयान के अनुसार, पायलट चरण की सफलता के बाद इस तकनीक को पूर्ण व्यावसायिक स्तर पर लागू किया जाएगा। यह मॉडल टिकाऊ और लागत-प्रतिस्पर्धी रासायनिक उत्पादन का नया मानदंड स्थापित करने का लक्ष्य रखता है।
फॉर्मिक एसिड का औद्योगिक महत्व
फॉर्मिक एसिड और इससे जुड़े उत्पादों का उपयोग वस्त्र (टेक्सटाइल), कृषि और विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) सहित अनेक उद्योगों में व्यापक रूप से होता है। इस परियोजना का मूल उद्देश्य यह प्रमाणित करना है कि औद्योगिक कार्बन उत्सर्जन को स्वच्छ ऊर्जा की सहायता से उपयोगी रासायनिक उत्पादों में परिवर्तित किया जा सकता है — जिसे उद्योग जगत में 'कार्बन यूटिलाइजेशन' कहा जाता है।
नेतृत्व की प्रतिक्रिया
अदाणी ग्रुप के निदेशक जीत अदाणी ने कहा, "हमें भारत की पहली ऐसी फॉर्मिक एसिड उत्पादन इकाई शुरू करने पर गर्व है, जो पूरी तरह नवीकरणीय बिजली और कैप्चर किए गए कार्बन पर आधारित होगी। डायोक्सिकल के साथ यह साझेदारी दिखाती है कि रणनीतिक औद्योगिक सहयोग के ज़रिए कार्बन जैसी चुनौती को टिकाऊ और आर्थिक रूप से लाभदायक संपत्ति में बदला जा सकता है।"
डायोक्सिकल की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और सह-संस्थापक सारा लैमिसन ने कहा, "यह साझेदारी दिखाती है कि स्वच्छ तकनीक और बड़े औद्योगिक स्तर का संयोजन आवश्यक रसायनों के उत्पादन के तरीके को बदल सकता है। अदाणी समूह के साथ मिलकर हमारा लक्ष्य कम-कार्बन केमिकल उत्पादन का प्रतिस्पर्धी और बड़े पैमाने पर लागू किया जा सकने वाला मॉडल तैयार करना है।"
भविष्य की योजनाएँ और व्यापक संदर्भ
दोनों कंपनियाँ भविष्य में केवल फॉर्मिक एसिड तक सीमित नहीं रहेंगी — ऊर्जा, पैकेजिंग, मटेरियल्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में उपयोग होने वाले अन्य रसायनों के विकास की संभावनाओं पर भी कार्य किया जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक सप्लाई चेन जीवाश्म ईंधन-आधारित कच्चे माल से दूर जाने का दबाव झेल रही है और भारत अपनी प्रचुर नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के कारण उन्नत विनिर्माण के लिए एक पसंदीदा केंद्र के रूप में उभर रहा है।
कंपनी के अनुसार, यह पहल 'मेक इन इंडिया' और 'विकसित भारत 2047' के राष्ट्रीय लक्ष्यों को भी बल देगी। गौरतलब है कि यह साझेदारी भारत और यूरोप के बीच स्वच्छ प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बढ़ते सहयोग की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम है, और अदाणी ग्रुप के लिए केमिकल सेक्टर में यह एक महत्वपूर्ण रणनीतिक प्रवेश माना जा रहा है।