अमित शाह की बिश्नोई से तुलना पूरी तरह गलत — रामदास आठवले का संजय राउत पर पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने 21 अक्टूबर 2026 को मुंबई में शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत के उस बयान की कड़े शब्दों में निंदा की, जिसमें राउत ने गृह मंत्री अमित शाह की तुलना गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से की थी। आठवले ने इस तुलना को 'पूरी तरह अनुचित और गलत' करार दिया।
राउत के बयान पर आठवले की तीखी प्रतिक्रिया
आठवले ने कहा, 'मेरा मानना है कि ऐसे आरोप लगाना पूरी तरह अनुचित है। अमित शाह देश के गृह मंत्री हैं और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता हैं। उनकी तुलना बिश्नोई से करना बिल्कुल गलत है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि संजय राउत का इस तरह के बयान देते रहना उनकी पुरानी आदत है।
आठवले के अनुसार, राउत वर्षों से 'जब हमारी सरकार आएगी' जैसे बयान देते आ रहे हैं — 2024 में भी यही कहा था और आज भी वही दोहरा रहे हैं।
आंदोलन से सत्ता नहीं बदलती — आठवले का सीधा संदेश
केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष की आंदोलन की राजनीति पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'अगर आप अपनी सरकार लाना चाहते हैं तो आपको कोशिश करने का पूरा हक है, लेकिन सिर्फ धरना-प्रदर्शन और आंदोलन से सरकार नहीं बदली जा सकती।'
गौरतलब है कि उद्धव ठाकरे ने सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके के आंदोलन का समर्थन किया है। इस पर आठवले ने स्पष्ट किया, 'आंदोलन से सत्ता परिवर्तन नहीं होता क्योंकि यह बांग्लादेश नहीं, भारत है। यहाँ केवल चुनाव से ही सत्ता परिवर्तन होता है।'
महायुति गठबंधन में कोई विवाद नहीं — सीएम पद पर स्पष्टता
महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन और मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी आठवले ने अपनी राय रखी। शिवसेना के कुछ नेताओं का कहना है कि एकनाथ शिंदे जल्द फिर से मुख्यमंत्री बनेंगे। इस पर आठवले ने कहा, 'हमारे महायुति गठबंधन में कोई विवाद नहीं है। आज देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री हैं क्योंकि BJP ने 132 सीटें जीती हैं, जबकि एकनाथ शिंदे की पार्टी ने 57 सीटें जीती हैं।'
शिंदे की तारीफ, लेकिन सीट-आधारित दावे की सीमा
आठवले ने एकनाथ शिंदे के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने ढाई वर्षों तक मुख्यमंत्री के रूप में बेहतरीन काम किया। उन्होंने शिंदे की राजनीतिक यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि एक ऑटो-रिक्शा चालक से उठकर शिवसेना के ज़रिए मुख्यमंत्री पद तक पहुँचना उल्लेखनीय है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि शिंदे की पार्टी के नेता चाहते हैं कि वे फिर से मुख्यमंत्री बनें और वे BJP से ज़्यादा सीटें जीतने की उम्मीद रखते हैं, तो यह स्वाभाविक राजनीतिक आकांक्षा है। यह टिप्पणी महाराष्ट्र की आगामी राजनीति और गठबंधन समीकरणों पर बहस की ओर संकेत करती है।