बुद्ध पूर्णिमा पर अमित शाह का लेह दौरा, भगवान बुद्ध के पिपरहवा अवशेषों का करेंगे दर्शन
सारांश
Key Takeaways
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 30 अप्रैल 2026 को दो दिवसीय दौरे पर केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख पहुँचे। उन्होंने घोषणा की कि वह 1 मई को 2569वीं बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं के साथ भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा अवशेषों को नमन करेंगे। यह अमित शाह का पिछले साल सितंबर में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद लद्दाख का पहला दौरा है।
मुख्य घटनाक्रम
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, ''शुक्रवार को लद्दाख के लिए ऐतिहासिक दिन होगा। बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष लद्दाख के लोगों के दर्शन के लिए उपलब्ध रहेंगे।'' उन्होंने यह भी कहा, ''मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूँ कि मुझे भी कल इन पवित्र अवशेषों के दुर्लभ दर्शन का अवसर मिलेगा।''
शाह ने बताया कि उन्होंने लद्दाख के उपराज्यपाल और संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर यह सुनिश्चित किया कि अगले दो हफ्तों तक लद्दाख के लोग इन पवित्र अवशेषों के आसानी से दर्शन कर सकें।
भव्य स्वागत और उपराज्यपाल की प्रतिक्रिया
लेह पहुँचने पर गृह मंत्री का स्वागत उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने किया। स्वागत में शामिल कई लोग पारंपरिक लद्दाखी वेशभूषा में नजर आए।
उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने कहा, ''गृह मंत्री का यह दौरा और लद्दाख के विकास को लेकर उनका विजन हमें यहाँ के लोगों की उम्मीदों को पूरा करने के लिए प्रेरित करेगा।'' भगवान बुद्ध के पिपरहवा अवशेष लेह पहुँचने के बाद से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनके दर्शन के लिए जुट रहे हैं।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि पिछले साल सितंबर में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर लद्दाख में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे। उन प्रदर्शनों में चार लोगों की मौत हुई थी और 80 से अधिक लोग घायल हुए थे। यह दौरा उन्हीं घटनाओं के बाद शाह की लद्दाख की पहली यात्रा है।
केंद्र सरकार ने लद्दाख के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करने का फैसला किया है, ताकि उनकी चिंताओं को दूर किया जा सके और क्षेत्र की अनोखी पर्यावरणीय व सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के उपायों पर विचार किया जा सके।
विकास परियोजनाओं की शुरुआत
अमित शाह अपने इस लद्दाख दौरे के दौरान डेयरी और सहकारिता क्षेत्र से जुड़ी कई बड़ी परियोजनाओं की भी शुरुआत करेंगे। यह दौरा धार्मिक आस्था के साथ-साथ क्षेत्रीय विकास और राजनीतिक संवाद की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आने वाले दिनों में केंद्र और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच होने वाली बातचीत यह तय करेगी कि क्षेत्र की दीर्घकालिक राजनीतिक और सांस्कृतिक माँगों पर कोई ठोस कदम उठाया जाता है या नहीं।