अमित शाह का पंजाब दौरा: नशा तस्करों का विरोध करने पर मारे गए लोगों के परिजनों से मुलाकात
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को पंजाब का दौरा किया और उन परिवारों से मुलाकात की, जिनके सदस्यों ने कथित तौर पर ड्रग तस्करों के खिलाफ आवाज उठाने के कारण अपनी जान गंवाई। यह दौरा ऐसे समय में हुआ जब पंजाब में नशीले पदार्थों की समस्या को लेकर राजनीतिक तनाव अपने चरम पर है और भारतीय जनता पार्टी (BJP) राज्य की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर लगातार हमलावर रही है।
दौरे का कार्यक्रम
गृह मंत्री अमित शाह ने दोपहर 12:15 बजे गुरदासपुर के ग्राम मारी पनवां में विक्रमजीत सिंह के परिजनों से मुलाकात की। इसके बाद दोपहर 2 बजे उन्होंने संगरूर के ग्राम तूर बंजारा में गुलजार सिंह के परिवार से भेंट की। दोपहर 3 बजे उन्होंने मानसा के वार्ड नं. 21, वाटर वर्क्स रोड पर परविंदर सिंह झोटा के परिजनों से मुलाकात की। शाम 4:30 बजे वे लुधियाना के रामलीला मैदान में विजयादशमी समारोह में शामिल हुए।
शाह ने आप सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
इस दौरे से पहले रविवार को अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर एक पोस्ट में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि वे उन लोगों के परिवारों से मिलेंगे, 'जिनकी हत्या इसलिए कर दी गई क्योंकि उन्होंने कथित तौर पर आप सरकार के संरक्षण में काम कर रहे ड्रग तस्करों के खिलाफ आवाज उठाई थी।' शाह ने अपने पोस्ट में कहा, 'आप सरकार ने पंजाब को नशे की गर्त में धकेलने में कोई कसर नहीं छोड़ी है, जिसके चलते कई परिवारों को अपने बच्चों को खोना पड़ा है।' उन्होंने यह भी कहा कि नशीले पदार्थों के कारोबार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को चुप कराने की कोशिशें कामयाब नहीं होंगी।
BJP नेता बिट्टू की प्रतिक्रिया
भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, 'पंजाब ड्रग्स की गंभीर समस्या से जूझ रहा है, हमें अपने युवाओं और भविष्य को सुरक्षित करने के लिए निर्णायक कार्रवाई, मजबूत नेतृत्व और दृढ़ संकल्प की आवश्यकता है।' बिट्टू ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर आरोप लगाया कि उसने अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही जनता का समर्थन खो दिया है। उन्होंने राज्य की जनता से अपील की कि वे शाह के प्रयासों का समर्थन करें और पंजाब को 'नशा मुक्त' बनाने के मिशन में एकजुट हों।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि यह 20 दिनों में गृह मंत्री का पंजाब का दूसरा दौरा है। इससे पहले 30 सितंबर को उन्होंने जालंधर में एक नशा विरोधी रैली को संबोधित किया था। यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में ड्रग्स की समस्या एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है और AAP सरकार लगातार विपक्ष के निशाने पर है। BJP ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार की आलोचना तेज करते हुए केंद्र की ओर से सक्रिय हस्तक्षेप को रेखांकित करने की कोशिश की है। आलोचकों का कहना है कि यह दौरे विशुद्ध रूप से राजनीतिक हैं, जबकि BJP का तर्क है कि यह पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना और जवाबदेही सुनिश्चित करने की पहल है।
आगे की राह
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पंजाब में नशे की समस्या आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले एक केंद्रीय मुद्दा बनने की संभावना है। पीड़ित परिजनों से शाह की मुलाकात और लुधियाना के विजयादशमी समारोह में उपस्थिति को BJP की राज्य में पुनर्स्थापना की व्यापक रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।