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क्या अमित शाह तुष्टिकरण की राजनीति को समाप्त कर एनडीए को तमिलनाडु में सत्ता में लाएंगे?

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क्या अमित शाह तुष्टिकरण की राजनीति को समाप्त कर एनडीए को तमिलनाडु में सत्ता में लाएंगे?

सारांश

क्या अमित शाह तुष्टिकरण की राजनीति को समाप्त कर एनडीए को तमिलनाडु में सत्ता में लाएंगे? भाजपा नेता ए.एन.एस. प्रसाद ने दावा किया है कि आगामी विधानसभा चुनाव में एनडीए एक मजबूत विकल्प बनेगा। जानिए इस बयान के पीछे की सच्चाई और राजनीतिक स्थिति को।

मुख्य बातें

अमित शाह ने तुष्टिकरण की राजनीति पर सवाल उठाए हैं।
2026 के विधानसभा चुनावों में एनडीए एक मजबूत विकल्प बनेगा।
हाल के ओपिनियन पोल्स पर भाजपा ने संदेह जताया है।

चेन्नई, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। तमिलनाडु भाजपा के प्रवक्ता ए.एन.एस. प्रसाद ने रविवार को कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उन चीजों को समाप्त करेंगे, जिन्हें उन्होंने 'बनावटी ओपिनियन पोल और पक्षपातपूर्ण राजनीतिक बातें' कहा। इसके साथ ही शाह 2026 के विधानसभा चुनावों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को सत्ता में लाने का प्रयास करेंगे।

एक बयान में, प्रसाद ने हाल के ओपिनियन पोल्स को खारिज करते हुए कहा कि इनसे सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) की सत्ता में वापसी और मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के पद पर बने रहने की भविष्यवाणी की गई थी।

उन्होंने विशेष रूप से एक एलुमनाई एसोसिएशन द्वारा किए गए सर्वे का उल्लेख किया, जिसमें एक्टर विजय को एआईएडीएमके नेता एडप्पाडी के. पलानीस्वामी से आगे दिखाया गया था।

प्रसाद ने आरोप लगाया कि ऐसे सर्वे लोगों की सोच को बदलने और वोट बैंक को प्रभावित करने के लिए जानबूझकर किए गए थे। उन्होंने धार्मिक आधार पर सर्वे में शामिल लोगों को बांटने की भी आलोचना की और इसे अनैतिक बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रथाएं सामाजिक सद्भाव और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करती हैं।

प्रसाद के अनुसार, एनडीए, जिसमें एआईएडीएमके और भारतीय जनता पार्टी शामिल हैं, 2026 के विधानसभा चुनावों में डीएमके के सामने एक मजबूत विकल्प पेश करेगा।

उन्होंने सत्तारूढ़ पार्टी पर भ्रष्टाचार, कुशासन और अल्पसंख्यकों को खुश करने का आरोप लगाया और कहा कि मौजूदा सरकार में बढ़ती कीमतें, अपराध और ड्रग्स का खतरा गंभीर चिंता का विषय बन गए हैं।

प्रसाद ने आगे दावा किया कि डीएमके और तमिलगा वेट्री कड़गम (टीवीके) अल्पसंख्यक वोटों को मजबूत करने के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। ऐसी राजनीति को लोग खारिज कर देंगे।

उन्होंने कहा, "तमिलनाडु ऐसी बांटने वाली राजनीति को स्वीकार नहीं करेगा जो सांस्कृतिक परंपराओं और सामाजिक एकता को कमजोर करती है।"

चुनावी इतिहास का जिक्र करते हुए, प्रसाद ने 1991 के विधानसभा चुनावों को याद किया, जब डीएमके जे. जयललिता के नेतृत्व वाली एआईएडीएमके के मुकाबले सिर्फ दो सीटों पर सिमट गई थी, और कहा कि भाजपा का मानना है कि 2026 में सत्तारूढ़ पार्टी को भी ऐसा ही झटका लगेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

वहीं दूसरी ओर डीएमके अपने शासन का बचाव कर रही है। यह स्पष्ट है कि आगामी चुनावों में राजनीतिक माहौल और भी गर्माने वाला है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या अमित शाह सच में तुष्टिकरण की राजनीति को समाप्त कर सकते हैं?
प्रसाद का कहना है कि शाह की नीति से एनडीए को सत्ता में लाने का प्रयास किया जाएगा, लेकिन यह चुनावी परिणाम पर निर्भर करेगा।
क्या ओपिनियन पोल्स पर विश्वास किया जा सकता है?
प्रसाद ने ओपिनियन पोल्स को खारिज किया है, यह कहते हुए कि वे राजनीतिक स्वार्थ के लिए बनाए जाते हैं।
एनडीए के लिए चुनावी रणनीति क्या होगी?
एनडीए एक मजबूत और भरोसेमंद विकल्प के रूप में उभरने का प्रयास कर रहा है, जिसमें एआईएडीएमके और भाजपा शामिल हैं।
राष्ट्र प्रेस
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