30 सितंबर 2026
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आंध्र प्रदेश में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए हाई-पावर कमेटी गठित, हमले-हत्या के मामलों की होगी जांच

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आंध्र प्रदेश में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए हाई-पावर कमेटी गठित, हमले-हत्या के मामलों की होगी जांच

सारांश

आंध्र प्रदेश में पत्रकारों पर हमले, हत्या और उत्पीड़न के मामलों की जांच के लिए हाई-पावर कमेटी का गठन हुआ — 2016 के बाद यह दूसरी बार है। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और मंत्री कोलुसु पार्थसारथी की पहल पर जारी शासनादेश को पत्रकार संगठनों ने सराहा है।

मुख्य बातें

आंध्र प्रदेश सरकार ने 30 सितंबर 2026 को पत्रकारों की सुरक्षा और न्याय के लिए हाई-पावर कमेटी के गठन का शासनादेश जारी किया।
समिति पत्रकारों पर हुए हमले, हत्या और उत्पीड़न के मामलों की जांच कर सरकार को सिफारिशें देगी।
चंद्रबाबू नायडू और सूचना मंत्री कोलुसु पार्थसारथी की पहल पर यह समिति गठित हुई।
इससे पहले 2016 में भी इसी तर्ज पर एक हाई-पावर कमेटी बनाई गई थी।
सरकार ने मीडिया एक्रेडिटेशन और स्वास्थ्य बीमा जैसी पत्रकार-कल्याण सुविधाएं भी बहाल की हैं।
राज्यभर के पत्रकार संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है।

आंध्र प्रदेश की गठबंधन सरकार ने 30 सितंबर 2026 को अमरावती से एक अहम शासनादेश जारी करते हुए पत्रकारों पर हुए हमले, हत्या और उत्पीड़न के मामलों की जांच के लिए हाई-पावर कमेटी का गठन किया है। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में उठाया गया यह कदम प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारों के कल्याण की दिशा में राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है।

समिति का दायरा और कार्य

नवगठित हाई-पावर कमेटी पत्रकारों पर हुए हमले, हत्या, उत्पीड़न और उनसे जुड़े अन्य संवेदनशील मामलों की विस्तृत जांच करेगी। इसके साथ ही समिति प्रभावित पत्रकारों को न्याय दिलाने के लिए उचित उपायों की सिफारिश भी करेगी। पत्रकारों की सुरक्षा और कल्याण से जुड़े लंबित मुद्दों के समाधान हेतु यह समिति ठोस सुझाव सरकार को सौंपेगी।

गठबंधन सरकार ने इसके पहले मीडिया एक्रेडिटेशन और पत्रकारों के लिए स्वास्थ्य बीमा जैसी सुविधाओं को भी बहाल किया है, जो पत्रकार कल्याण की व्यापक कोशिशों का हिस्सा हैं।

पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक संदर्भ

गौरतलब है कि 2016 में भी राज्य में एक हाई-पावर कमेटी गठित की गई थी, जिसने उस दौर में पत्रकारों से जुड़े कई मुद्दों के समाधान में अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि, पत्रकार संगठनों का कहना है कि तब से अब तक सुरक्षा और कल्याण से जुड़े कई मामले अनसुलझे ही रहे हैं। संगठनों ने लगातार सरकार के समक्ष यह माँग रखी है कि हमले और उत्पीड़न के शिकार पत्रकारों को न्याय दिलाने के लिए सक्रिय कदम उठाए जाएं।

यह ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। पत्रकारिता को लोकतंत्र का 'चौथा स्तंभ' माना जाता है, और ऐसे में राज्य स्तर पर इस तरह के संस्थागत तंत्र का गठन महत्वपूर्ण है।

सरकार की प्रतिक्रिया और पहल

मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने पत्रकारिता की स्वतंत्रता और उसके मूल्यों की रक्षा तथा अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए जोखिम उठाने वाले पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया है। राज्य के सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री कोलुसु पार्थसारथी ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कई दौर की विचार-विमर्श के बाद इस समिति के गठन का मार्ग प्रशस्त किया।

मंत्री पार्थसारथी की सक्रिय भूमिका के परिणामस्वरूप ही बुधवार, 30 सितंबर को आधिकारिक शासनादेश जारी हो सका।

पत्रकार संगठनों की प्रतिक्रिया

राज्यभर के पत्रकार संगठनों ने इस फैसले का खुलकर स्वागत किया है। संगठनों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री नायडू और मंत्री पार्थसारथी को इस पहल के लिए धन्यवाद दिया है। पत्रकार संगठनों का कहना है कि यह समिति लंबे समय से चली आ रही उनकी माँगों को पूरा करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।

आगे क्या होगा

शासनादेश जारी होने के बाद अब समिति के सदस्यों की घोषणा और उसकी कार्यप्रणाली तय होना अगला महत्वपूर्ण चरण होगा। पत्रकार संगठनों को उम्मीद है कि समिति शीघ्रता से काम शुरू करेगी और लंबित मामलों की जांच में पारदर्शिता बरती जाएगी। यदि यह समिति अपने जनादेश के अनुरूप काम करती है, तो यह अन्य राज्यों के लिए भी एक नज़ीर बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी समिति की संरचना, स्वायत्तता और समयसीमा होगी — क्योंकि 2016 की कमेटी के बावजूद दशकों पुराने कई मामले अनसुलझे रहे। पत्रकार संगठनों की लंबी माँगों के बाद आई इस पहल में यदि स्वतंत्र जाँच तंत्र और पारदर्शी रिपोर्टिंग की कमी रही, तो यह एक और औपचारिक कवायद बनकर रह जाएगी। देश में प्रेस स्वतंत्रता के वैश्विक सूचकांकों पर भारत की स्थिति को देखते हुए राज्य स्तर पर ऐसे ठोस संस्थागत तंत्र की ज़रूरत निर्विवाद है। मीडिया एक्रेडिटेशन और स्वास्थ्य बीमा की बहाली सकारात्मक संकेत हैं, पर न्याय तब ही मिलेगा जब समिति की सिफारिशों पर कार्रवाई भी हो।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आंध्र प्रदेश में पत्रकारों के लिए गठित हाई-पावर कमेटी क्या है?
यह आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा 30 सितंबर 2026 को जारी शासनादेश से गठित एक उच्च-स्तरीय जाँच समिति है, जो पत्रकारों पर हुए हमले, हत्या और उत्पीड़न के मामलों की जांच कर सरकार को उचित सिफारिशें देगी। यह पत्रकारों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने की व्यापक सरकारी पहल का हिस्सा है।
इस समिति का गठन किसकी पहल पर हुआ?
मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के मार्गदर्शन और सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री कोलुसु पार्थसारथी की सक्रिय पहल पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कई दौर की चर्चा के बाद इस समिति के गठन का शासनादेश जारी किया गया। पत्रकार संगठन लंबे समय से इस तरह के तंत्र की माँग कर रहे थे।
यह समिति क्या-क्या काम करेगी?
समिति पत्रकारों पर हुए हमले, हत्या और उत्पीड़न के मामलों की जांच करेगी, प्रभावित पत्रकारों को न्याय दिलाने के लिए उपायों की सिफारिश करेगी और पत्रकारों की सुरक्षा व कल्याण से जुड़े लंबित मुद्दों के समाधान हेतु सुझाव देगी।
क्या इससे पहले भी ऐसी कमेटी बनाई गई थी?
हाँ, 2016 में भी आंध्र प्रदेश में इसी तर्ज पर एक हाई-पावर कमेटी गठित की गई थी, जिसने पत्रकारों से जुड़े कई मुद्दों के समाधान में अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि, पत्रकार संगठनों का कहना है कि सुरक्षा और कल्याण से जुड़े कई मुद्दे अभी भी लंबित हैं।
पत्रकार संगठनों ने इस फैसले पर क्या प्रतिक्रिया दी?
राज्यभर के पत्रकार संगठनों ने हाई-पावर कमेटी के गठन का खुलकर स्वागत किया है और मुख्यमंत्री नायडू व मंत्री पार्थसारथी का आभार जताया है। संगठनों का कहना है कि यह उनकी लंबे समय से चली आ रही माँगों को पूरा करने की दिशा में सकारात्मक कदम है।
राष्ट्र प्रेस
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