अंकिता भंडारी हत्याकांड: इंडिया गेट पर परिवार का धरना, राहुल गांधी ने न्याय का दिलाया भरोसा
सारांश
मुख्य बातें
अंकिता भंडारी हत्याकांड में इंसाफ की माँग को लेकर अंकिता के माता-पिता बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के इंडिया गेट के पास धरने पर बैठ गए। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी वहाँ उनसे मिलने पहुँचे और न्याय की इस लड़ाई में कांग्रेस के साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया।
राहुल गांधी का एक्स पर बयान
राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, 'चार साल से अंकिता भंडारी के परिवार को इंसाफ नहीं मिला, लेकिन एक 'वीआईपी' आरोपी को संरक्षण और संवैधानिक पद का इनाम जरूर मिला।' उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधते हुए कहा कि 'जहाँ बलात्कारियों और हत्यारों का फूल-मालाओं से स्वागत होता है और अपराधियों को सत्ता की ताकत से नवाज़ा जाता है, उस महिला-विरोधी भाजपा से कोई उम्मीद की भी नहीं जा सकती।'
उन्होंने आगे कहा, 'आज, अंकिता के माता-पिता अपनी बच्ची के लिए न्याय की गुहार लेकर, अपने घर से मीलों दूर, इंडिया गेट पर बैठे हैं। मैं और कांग्रेस पार्टी उनके साथ खड़े हैं — उनके दुख में भी और इंसाफ की इस लड़ाई में भी।'
धामी सरकार का पक्ष
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दिलाना इस बात का प्रमाण है कि सरकार ने 'पहले दिन से ही पूरी गंभीरता के साथ काम किया।'
राज्य सरकार की ओर से जारी बयान के अनुसार, आरोपियों को 24 घंटे के भीतर जेल भेजा गया और निष्पक्ष जाँच के लिए विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया गया। आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई।
चार्जशीट और मुकदमे का ब्यौरा
सरकारी बयान के अनुसार, जाँच के दौरान लगभग 500 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट तैयार की गई, जिसमें महत्वपूर्ण साक्ष्य और करीब 100 गवाहों के बयान शामिल किए गए। अभियोजन पक्ष की मजबूत पैरवी के चलते आरोपियों की जमानत याचिकाएँ बार-बार खारिज होती रहीं और वे पूरे ट्रायल के दौरान जेल में रहे।
सरकार के अनुसार, परिवार की माँग पर तीन बार लोक अभियोजकों को बदला गया। इसके अतिरिक्त, जब अंकिता के माता-पिता ने CBI जाँच की माँग की, तो मुख्यमंत्री धामी ने वह आदेश भी दिया।
मामले की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि 2022 में उत्तराखंड के एक रिसॉर्ट में अंकिता भंडारी की कथित तौर पर हत्या कर दी गई थी। इस मामले ने राज्य और देशभर में व्यापक आक्रोश पैदा किया था। मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि इसमें एक 'वीआईपी' आरोपी का नाम सामने आने की बात कही गई थी। चार साल बाद भी परिवार संपूर्ण न्याय न मिलने की भावना के साथ सड़क पर उतरा है, जो इस मामले की जटिलता और संवेदनशीलता को रेखांकित करता है।
आगे क्या
अंकिता के माता-पिता का दिल्ली में धरना राष्ट्रीय राजनीति में इस मामले को फिर से केंद्र में ले आया है। राहुल गांधी के सार्वजनिक समर्थन और BJP पर लगाए गए आरोपों के बाद अब यह देखना होगा कि सत्तारूढ़ दल और उत्तराखंड सरकार इस राजनीतिक दबाव पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।