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अंकिता भंडारी केस: माता-पिता ने CBI मुख्यालय में अधिकारियों से की मुलाकात, निष्पक्ष जांच का मिला आश्वासन

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अंकिता भंडारी केस: माता-पिता ने CBI मुख्यालय में अधिकारियों से की मुलाकात, निष्पक्ष जांच का मिला आश्वासन

सारांश

अंकिता भंडारी के माता-पिता ने शुक्रवार को CBI मुख्यालय में अधिकारियों से मुलाकात की और निष्पक्ष जांच का आश्वासन पाया। यह बैठक इंडिया गेट पर हुए विरोध प्रदर्शन के दो दिन बाद हुई, जिसमें राहुल गांधी भी शामिल हुए थे। सितंबर 2022 में उत्तराखंड के रिसॉर्ट में कथित तौर पर मारी गई 19 वर्षीय रिसेप्शनिस्ट का यह केस अब फिर राष्ट्रीय चर्चा में है।

मुख्य बातें

वीरेंद्र सिंह भंडारी और सोनी देवी ने 16 अक्टूबर 2026 को CBI मुख्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की।
CBI ने परिवार को निष्पक्ष और तटस्थ जांच का आश्वासन दिया।
14 अक्टूबर को इंडिया गेट के पास विरोध प्रदर्शन में राहुल गांधी भी शामिल हुए थे।
आरोपियों को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार किया गया था; 500 पन्नों की चार्जशीट और करीब 100 गवाहों के बयान दर्ज हैं।
आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा मिली; जमानत याचिकाएं बार-बार खारिज हुईं।
उत्तराखंड सरकार ने अंकिता के पिता और भाई को ₹25 लाख की आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरियाँ दी हैं।

अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग कर रहे परिवार को शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को एक अहम कदम मिला — अंकिता के माता-पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी और सोनी देवी ने नई दिल्ली स्थित केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) मुख्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की और मामले के विभिन्न पहलुओं से उन्हें अवगत कराया। CBI अधिकारियों ने परिवार को आश्वासन दिया कि जांच निष्पक्ष और तटस्थ तरीके से की जाएगी तथा मामले के सभी पहलुओं की पड़ताल होगी। उत्तराखंड के एक रिसॉर्ट में सितंबर 2022 में कथित तौर पर मारी गई 19 वर्षीय रिसेप्शनिस्ट अंकिता के परिजनों की यह बैठक इंडिया गेट पर हुए विरोध प्रदर्शन के ठीक दो दिन बाद हुई।

विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक समर्थन

14 अक्टूबर 2026 को अंकिता के माता-पिता ने इंडिया गेट के समीप अपनी बेटी के लिए न्याय की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी सम्मिलित हुए और शोकाकुल परिवार से मिलकर उनकी माँग के साथ एकजुटता जाहिर की। यह मुलाकात व्यापक रूप से चर्चा में रही, क्योंकि इसने अंकिता केस को एक बार फिर राष्ट्रीय ध्यान के केंद्र में ला दिया।

उत्तराखंड सरकार का पक्ष

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली उत्तराखंड सरकार ने दो दिन पूर्व जारी एक बयान में कहा कि उसने शुरू से ही मामले को पूरी गंभीरता से लिया। सरकार के अनुसार, आरोपियों को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार किया गया और गहन जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया।

इसके बाद लगभग 500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई, जिसमें साक्ष्य और करीब 100 गवाहों के बयान शामिल थे। मुकदमे के बाद आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई और उनकी जमानत याचिकाएं बार-बार खारिज की गईं।

परिवार को दी गई सहायता

राज्य सरकार के अनुसार, परिवार के अनुरोध पर तीन बार लोक अभियोजकों को बदला गया। अंकिता के माता-पिता की मांग पर ही मुख्यमंत्री धामी ने CBI जांच का आदेश दिया। सरकार ने यह भी कहा कि अंकिता के पिता और भाई को ₹25 लाख की आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरियाँ प्रदान की गई हैं।

मामले की पृष्ठभूमि और व्यापक असर

गौरतलब है कि 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की कथित हत्या सितंबर 2022 में उत्तराखंड के एक रिसॉर्ट में हुई थी, जिसने पूरे राज्य में व्यापक आक्रोश पैदा किया था। यह मामला महिला सुरक्षा और जवाबदेही के व्यापक सवालों से भी जुड़ा रहा है। CBI का हस्तक्षेप इस बात का संकेत है कि परिवार और जनता को राज्य-स्तरीय जांच पर भरोसे की कमी महसूस हुई।

अब जब CBI ने निष्पक्ष जांच का औपचारिक आश्वासन दे दिया है, तो परिवार को उम्मीद है कि इस केस में न्याय मिल सकेगा। आने वाले हफ्तों में CBI की जांच की दिशा और उसके निष्कर्ष इस मामले के भविष्य को तय करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह है कि जब राज्य सरकार ने पहले ही आजीवन कारावास तक की सजा दिलाई और SIT जांच पूरी की, तो परिवार को CBI की दरकार क्यों पड़ी — यह जवाबदेही की उस खाई को उजागर करता है जो पीड़ित परिवारों और संस्थाओं के बीच बनी रहती है। इस केस ने महिला सुरक्षा और राजनीतिक संरक्षण के गंभीर सवाल उठाए थे जो अभी भी अनुत्तरित हैं। विपक्ष की मौजूदगी मामले की राजनीतिक संवेदनशीलता को रेखांकित करती है, लेकिन असली परीक्षा CBI की जांच की स्वतंत्रता और उसके निष्कर्षों की पारदर्शिता होगी।
RashtraPress
17 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंकिता भंडारी कौन थीं और उनके साथ क्या हुआ था?
अंकिता भंडारी उत्तराखंड की एक 19 वर्षीय रिसेप्शनिस्ट थीं, जिनकी कथित तौर पर सितंबर 2022 में एक रिसॉर्ट में हत्या कर दी गई थी। इस मामले ने उत्तराखंड भर में व्यापक आक्रोश पैदा किया था।
अंकिता भंडारी के माता-पिता ने CBI से क्यों मुलाकात की?
14 अक्टूबर को इंडिया गेट के पास विरोध प्रदर्शन के बाद परिवार ने 16 अक्टूबर को CBI मुख्यालय जाकर अधिकारियों को मामले के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया। CBI ने निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया।
अंकिता भंडारी केस में अब तक क्या कार्रवाई हो चुकी है?
आरोपियों को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार किया गया, SIT गठित हुई और लगभग 500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल हुई। मुकदमे के बाद आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई और उनकी जमानत याचिकाएं बार-बार खारिज की गई हैं।
राहुल गांधी का इस मामले से क्या संबंध है?
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी 14 अक्टूबर 2026 को इंडिया गेट के पास हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए और अंकिता के परिवार से मिलकर उनकी माँग के साथ एकजुटता व्यक्त की।
उत्तराखंड सरकार ने अंकिता के परिवार की मदद के लिए क्या किया?
उत्तराखंड सरकार ने अंकिता के पिता और भाई को ₹25 लाख की आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरियाँ प्रदान की हैं। परिवार के अनुरोध पर तीन बार लोक अभियोजकों को बदला गया और मुख्यमंत्री धामी ने परिजनों की माँग पर CBI जांच का आदेश दिया।
राष्ट्र प्रेस
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