15 अक्टूबर 2026
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अंकिता भंडारी हत्याकांड: ADG मुरुगेशन बोले — 88 दिन में चार्जशीट, तीनों दोषियों को आजीवन कारावास

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अंकिता भंडारी हत्याकांड: ADG मुरुगेशन बोले — 88 दिन में चार्जशीट, तीनों दोषियों को आजीवन कारावास

सारांश

अंकिता भंडारी हत्याकांड में उत्तराखंड पुलिस ने 24 घंटे में गिरफ्तारी, 88 दिन में 500 पन्नों की चार्जशीट और 30 मई 2025 को तीनों दोषियों को आजीवन कारावास दिलाया। ADG डॉ. मुरुगेशन ने इसे राज्य सरकार और पुलिस की त्वरित व प्रभावी कार्रवाई का नतीजा बताया।

मुख्य बातें

मुरुगेशन ने 15 अक्टूबर 2026 को देहरादून में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अंकिता भंडारी मामले की जाँच की जानकारी दी।
घटना सामने आने के 24 घंटे के भीतर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर DIG रैंक की महिला आईपीएस अधिकारी की अगुआई में SIT गठित की गई।
SIT ने 88 दिनों में जाँच पूरी कर लगभग 500 पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल की।
30 मई 2025 को पुलकित आर्य , सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई गई।

उत्तराखंड के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (अपराध एवं कानून-व्यवस्था) डॉ. वी. मुरुगेशन ने 15 अक्टूबर 2026 को देहरादून स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अंकिता भंडारी हत्याकांड की जाँच और न्यायिक कार्यवाही की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड सरकार ने इस संवेदनशील मामले में प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित करने और न्यायिक प्रक्रिया को गति देने के लिए हर आवश्यक कदम उठाया।

घटना और तत्काल कार्रवाई

ऋषिकेश के निकट स्थित वनंतरा रिसॉर्ट में कार्यरत अंकिता भंडारी के साथ हुई इस दुखद घटना के सामने आते ही उत्तराखंड पुलिस ने तत्परता दिखाई। डॉ. मुरुगेशन ने बताया कि पुलिस टीमों ने समन्वित प्रयासों से घटना उजागर होने के 24 घंटे के भीतर ही तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था।

मामले की गंभीरता और सार्वजनिक संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर तत्काल एक विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया गया। जाँच की निष्पक्षता और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए DIG रैंक की एक महिला आईपीएस अधिकारी को SIT का नेतृत्व सौंपा गया।

जाँच की कार्यप्रणाली

SIT ने डिजिटल, तकनीकी, फोरेंसिक और भौतिक — चारों श्रेणियों के साक्ष्य अत्यंत सूक्ष्मता से जुटाए। आरोपियों से विस्तृत पूछताछ, फोरेंसिक रिपोर्ट और गवाहों के बयानों का गहन विश्लेषण किया गया।

डॉ. मुरुगेशन ने बताया कि SIT ने 88 दिनों के भीतर जाँच पूर्ण कर अदालत में लगभग 500 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल की। यह उत्तराखंड पुलिस के लिए किसी हाई-प्रोफाइल मामले में असाधारण रूप से त्वरित जाँच-समापन माना जा रहा है।

अदालत का फैसला

SIT द्वारा प्रस्तुत ठोस साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की प्रभावी दलीलों के आधार पर कोटद्वार की अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने 30 मई 2025 को तीनों आरोपियों — पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता — को दोषी करार दिया।

अदालत ने तीनों को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई। डॉ. मुरुगेशन ने पुष्टि की कि तीनों दोषी फिलहाल जेल में अपनी सजा काट रहे हैं।

सरकार और पुलिस की भूमिका

गौरतलब है कि यह मामला सामने आने के बाद उत्तराखंड में व्यापक जन-आक्रोश देखा गया था। राज्य सरकार पर त्वरित न्याय सुनिश्चित करने का दबाव था। ADG ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि पूरी जाँच और अभियोजन प्रक्रिया को एक महिला अधिकारी की निगरानी में संचालित किया गया, जो संवेदनशीलता और जवाबदेही दोनों का प्रतीक है।

आगे की स्थिति

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में न्यायिक विलंब को लेकर चिंताएँ लगातार उठती रही हैं। इस मामले में 88 दिन में चार्जशीट और 30 मई 2025 को सजा का फैसला, तेज़ न्यायिक प्रक्रिया के एक उदाहरण के रूप में उत्तराखंड पुलिस के लिए संदर्भ बिंदु बन सकता है। दोषियों की संभावित अपील की स्थिति अभी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी ज़रूरी है कि यह तेज़ी क्या सिर्फ राजनीतिक दबाव के कारण आई — और क्या उन मामलों में भी ऐसी ही सक्रियता दिखती है जो मीडिया की सुर्खियाँ नहीं बनते? ADG की प्रेस कॉन्फ्रेंस संस्थागत जवाबदेही की घोषणा कम, उपलब्धि की प्रस्तुति अधिक लगती है। दोषियों की संभावित अपील की स्थिति पर कोई जानकारी न देना भी एक उल्लेखनीय चूक है।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंकिता भंडारी हत्याकांड में तीनों दोषियों को क्या सजा मिली?
कोटद्वार की अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने 30 मई 2025 को पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता — तीनों को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई। तीनों अभी जेल में अपनी सजा काट रहे हैं।
अंकिता भंडारी मामले में SIT का गठन कैसे हुआ?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल SIT गठित की गई। DIG रैंक की एक महिला आईपीएस अधिकारी को SIT का प्रमुख नियुक्त किया गया।
अंकिता भंडारी हत्याकांड में चार्जशीट कितने दिनों में दाखिल हुई?
SIT ने 88 दिनों के भीतर जाँच पूरी कर अदालत में लगभग 500 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल की। इस चार्जशीट में डिजिटल, तकनीकी, फोरेंसिक और भौतिक साक्ष्य शामिल थे।
अंकिता भंडारी कौन थीं और यह घटना कहाँ हुई?
अंकिता भंडारी उत्तराखंड की एक युवती थीं जो ऋषिकेश के पास वनंतरा रिसॉर्ट में कार्यरत थीं। इसी रिसॉर्ट से जुड़े व्यक्तियों द्वारा उनकी हत्या की गई थी, जिसके बाद पूरे प्रदेश में व्यापक जन-आक्रोश देखा गया।
ADG डॉ. वी. मुरुगेशन ने यह जानकारी कब और कहाँ दी?
उत्तराखंड के ADG (अपराध एवं कानून-व्यवस्था) डॉ. वी. मुरुगेशन ने 15 अक्टूबर 2026 को देहरादून स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी साझा की।
राष्ट्र प्रेस
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