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अरुणाचल प्रदेश: एकता का प्रतीक, आदिवासी संस्कृति का सशक्तीकरण

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अरुणाचल प्रदेश: एकता का प्रतीक, आदिवासी संस्कृति का सशक्तीकरण

सारांश

दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री चोवना मीन ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से आदिवासी समुदायों के विकास पर जोर दिया। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश की समृद्ध संस्कृति और विविधता को उजागर किया।

मुख्य बातें

विज्ञान और प्रौद्योगिकी का आदिवासी विकास में महत्वपूर्ण योगदान।
अरुणाचल प्रदेश की संस्कृति और विविधता का महत्व।
समावेशी विकास की प्रतिबद्धता का प्रदर्शन।
आदिवासी समुदायों की संरक्षण की भूमिका।
कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति का योगदान।

दिल्ली, 12 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। राजधानी में 'आदिवासी भारत का परिवर्तन: विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका' शीर्षक से एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें आदिवासी समुदायों के विकास और सशक्तीकरण में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के योगदान पर चर्चा की गई। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

कार्यक्रम में अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री चोवना मीन ने कहा, "इस महत्वपूर्ण और सार्थक विषय पर चर्चा करने का अवसर पाकर मैं बहुत आभारी हूं। आज, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में हो रही प्रगति के साथ-साथ यह आवश्यक है कि हम अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहें। उगते सूरज की भूमि के रूप में जाना जाने वाला अरुणाचल प्रदेश न केवल अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण, बल्कि अपनी समृद्ध संस्कृति और गहन आध्यात्मिक मूल्यों के लिए भी विशेष है। इसकी विविध परंपराएं, भाषाएं और समुदाय इसे भारत की विरासत और विविधता में एकता का जीवंत उदाहरण बनाते हैं।"

चोवना मीन ने आगे कहा, "अरुणाचल प्रदेश के आदिवासी समुदाय समय के एक अनूठे संगम का प्रतिनिधित्व करते हैं, जहां परंपरा और आधुनिकता आत्मविश्वास और सद्भाव के साथ सह-अस्तित्व में हैं। यहाँ के लोग और भू-भाग मिलकर एक सशक्त सांस्कृतिक पहचान को दर्शाते हैं जो प्रेरणा देती है।"

उपमुख्यमंत्री ने कहा, "मैं विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के आयोजकों का धन्यवाद करता हूँ कि उन्होंने इस महत्वपूर्ण अवसर का हिस्सा बनने का मुझे आमंत्रित किया, जो आईटीआईटीआई संस्कृति स्कूल की रजत जयंती का प्रतीक है और समावेशी विकास की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मैं संस्थापकों, शिक्षकों और पूरे समुदाय को बधाई देता हूँ, आपने वास्तव में एक सार्थक कृति का निर्माण किया है। यह सम्मेलन न केवल एक संस्थागत उपलब्धि का स्मरणोत्सव है, बल्कि एक व्यापक राष्ट्रीय प्राथमिकता को भी उजागर करता है। यह सुनिश्चित करना कि नवाचार और तकनीकी प्रगति के लाभ समाज के सभी वर्गों तक सार्थक और समान रूप से पहुंचें।"

चोवना मीन ने कहा, "भारत के आदिवासी समुदाय हमारे राष्ट्रीय ताने-बाने में विविधता और गहराई दोनों को दर्शाते हैं। जैसा कि उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा है, हमारे आदिवासी समुदाय केवल विकास के लाभार्थी नहीं हैं, बल्कि हमारी संस्कृति, विरासत और परंपराओं के सच्चे संरक्षक भी हैं।"

संपादकीय दृष्टिकोण

जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारत के आदिवासी समुदाय हमारी संस्कृति के संरक्षक हैं और उनकी आवाज को सुनना आवश्यक है।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अरुणाचल प्रदेश की विशेषताएँ क्या हैं?
अरुणाचल प्रदेश अपनी अद्वितीय भौगोलिक स्थिति, समृद्ध संस्कृति और विविध परंपराओं के लिए जाना जाता है।
चोवना मीन ने कार्यक्रम में क्या कहा?
चोवना मीन ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से आदिवासी समुदायों के विकास पर जोर दिया।
उपराष्ट्रपति का कार्यक्रम में क्या योगदान था?
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में उपस्थित थे और उन्होंने आदिवासी संस्कृति के संरक्षण पर बल दिया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्या था?
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आदिवासी समुदायों के विकास में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका को उजागर करना था।
क्या कार्यक्रम में कोई विशेष उपलब्धियाँ साझा की गईं?
हाँ, कार्यक्रम ने आईटीआईटीआई संस्कृति स्कूल की रजत जयंती का उल्लेख किया और समावेशी विकास की प्रतिबद्धता को दर्शाया।
राष्ट्र प्रेस
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